अंबाला का प्रसिद्ध बासड़ा मेला, यहां शीतला माता दूर करती हैं स्किन रोग Haryana News & Updates

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हरियाण के अंबाला छावनी में भी लगभग 100 साल से भी ज्यादा पुराना प्राचीन शीतला माता मंदिर बना हुआ है ओर इस मंदिर में हर साल होली के कुछ दिन बाद बासड़ा मेले का आयोजन किया जाता हैं.दरअसल इस मेले में हरियाणा ही नहीं बल्कि आस पास के राज्यों से भी श्रद्धालु पूजा करने के लिए पहुंचते है .

अंबाला: हिंदू धर्म में माता शीतला की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है और मां शीतला देवी को रोगों से रक्षा करने वाली देवी भी कहा जाता है. मान्यता है कि माता शीतला अपने भक्तों को विशेष रूप से त्वचा संबंधी रोगों और संक्रामक बीमारियों से बचाती हैं. वहीं हरियाणा के अंबाला छावनी में भी लगभग 100 साल से भी ज्यादा पुराना प्राचीन शीतला माता मंदिर बना हुआ है और इस मंदिर में हर साल होली के कुछ दिन बाद बासड़ा मेले का आयोजन किया जाता है.

दूर-दूर आते हैं श्रद्धालु

दरअसल, इस मेले में हरियाणा ही नहीं बल्कि आस पास के राज्यों से भी श्रद्धालु पूजा करने के लिए पहुंचते हैं और सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर में माथा टेकने वाले श्रद्धालुओं की लंबी लंबी कतारें देखने को मिलती है. बता दें कि बासड़ा मेले वाले दिन बासी खाने का भोग माता रानी को श्रद्धालु के द्वारा चढ़ाया जाता है, जिसे प्रसाद के रूप में पूरा दिन भक्त खाते हैं. ऐसी भी मान्यता है कि इस खाने को खाने से शरीर के कई रोग मिट जाते हैं और हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है.

स्किन रोगों से मिलती है मुक्ति

वहीं इस बारे में लोकल 18 को जानकारी देते हुए मंदिर कमेटी के उपप्रधान सुधीर डिंपी गिहारा ने बताया कि हर साल होली के बाद बासड़ा का मेला भरा जाता है और अंबाला का यह सबसे प्राचीन मंदिर है, जिसमें सुबह से ही श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं. उन्होंने बताया कि इस बासड़ा मेले का महत्व है कि जिन भी लोगों को चिकन पॉक्स यानी त्वचा से जुड़ी बीमारी होती है,वह सुबह-सुबह मंदिर में जाकर जल चढ़कर ठंडा करते है ओर रात का बना बासा खाने का भोग शीतला माता को लगाते है तो उनकी सभी तरह की बीमारी ठीक हो जाती है.उन्होंने बताया कि यह अंबाला छावनी का बहुत ही प्राचीन मंदिर है और लोग इस मंदिर में दूर-दूर से माथा टेकने के लिए आते हैं.

क्या है पौराणिक कथा

वही मंदिर के पुजारी अरविंद भट्ट ने बताया कि होली के अगले दिन से शीतला माता के मेले की शुरुआत हो जाती है और जो पहला सोमवार आता है उसे दिन भक्तों की काफी ज्यादा भीड़ मंदिर में देखने को मिलती है और जिसके बाद अगले मंगलवार तक यह मेल चलता है. उन्होंने कहा कि एक पुरानी कथा यह भी है कि जब माता शीतला देवी धरती पर आई थी तब उस दौरान उनके ऊपर गर्म पानी की बाण डाल दी थी, तब उस दौरान भक्तों ने ठण्डा करने के लिए कच्ची लस्सी माता के ऊपर चढ़ाई थी और उन्हें बासा खाने का भोग लगाया था. तभी से बच्चों की आरोग्यता को दूर करने के लिए इस मेले का आयोजन किया जाता है.

मनोकामनाएं होती हैं पूरी

उन्होंने कहा कि बासड़ा मेले में भक्त जान बासा खाने का भोग लगाकर माता की पूजा करते हैं, और फिर सारा दिन बासा खाना खाते हैं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की कोई भी स्किन से जुड़ी हुई समस्या ना हो. उन्होंने बताया कि यह मंदिर तो लगभग 1936 में बनाया गया था लेकिन कहा जाता है कि यह मंदिर उससे भी पहले का बना हुआ है. उन्होंने कहा कि इस मंदिर में यह भी खास मान्यता है कि यदि कोई भी भक्त सच्चे मन से कोई मनोकामना मांगता है तो उसकी पूरी जरूरत होती है, ओर फिर वह भक्त एक छोटा मंदिर( मठ) का निर्माण करवाता है. उन्होंने बताया कि भक्त अपनी मान्यता की अनुसार बच्चों के ऊपर से मुर्गे को भी वारते है ताकि उनके ऊपर से सारे कष्ट खत्म हो जाए ओर मैं बिल्कुल खुशहाल जीवन व्यतीत कर सके.

वही मंदिर में आए भक्त बलविंद गुप्ता ने बताया कि इस मंदिर में उनकी पुरानी आस्था जुडी हुई है और पूर्वजों के जमाने से वह पीढ़ी दर पीढ़ी इस मंदिर में माथा टेकने के लिए आ रहे हैं.उन्होंने कहा कि बासड़ा मेले में वह हर साल आते है ओर एक दिन पहले रात के समय माता को चढ़ाए जाने वाला प्रसाद बनाते हैं ओर फिर अगले दिन सुबह वह बासे प्रसाद का भोग लगाकर पूजा करते हैं. उन्होंने बताया कि इस पूजा के बाद उनके घर में किसी भी व्यक्ति को कोई स्किन से जुड़ी हुई समस्या नहीं होती है और वह बिल्कुल निरोग्य रहते हैं. दिल्ली से आए श्रद्धालु सुधीर कुमार ने बताया कि इस मंदिर से उनकी पुरानी आस्था जुडी हुई है और वह माता देखने के लिए मंदिर में आए हैं. उन्होंने कहा कि सुबह से ही लंबी-लंबी लाइन मंदिर में लगी हुई थी और इसके बाद उन्होंने माथा टेककर अपनी मनोकामना मां शीतला से मांगी.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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