अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में भारतीय गाय-भैंस का दूध कम, हिसार में जेनेटिक इंजीनियरिंग पर हो रहा शोध Latest Haryana News

[ad_1]


देश की गाय- भैंस अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में कम दूध देती हैं। इसके लिए कुछ जीन जिम्मेदार हैं। वैज्ञानिकों ने इन जीन की पहचान कर ली है। मुख्य तौर पर दो मुख्य जीन दूध की मात्रा को प्रभावित करते हैं। स्टार 3, स्टार 5 जीन मुख्य रूप से दूध के लिए जिम्मेदार हैं। वैज्ञानिकों ने इन जीन की पहचान कर इन पर काम शुरु किया है।

हमारे वैज्ञानिक जीन जेनेटिक इंजीनियरिंग पर भी काम कर रहे हैं। भविष्य में यह शोध भी किया जाएगा कि इन जीन को बदल कर दूसरे जीन पशु में डाले जाएं। जिससे हमारे देश की गाय भैंस भी विदेशों की तरह से इंटरनेशनल मानकों के अनुसार दूध उत्पादन द सकें।

एनटीआर कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंस के वैज्ञानिक डॉ. नवीन स्वरूप ने हिसार के लुवास में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। डॉ. नवीन स्वरूप ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि पशु चिकित्सा जैव रसायन और न्यूरोसाइंसेज में पीएचडी की डिग्री है। उन्होंने बताया कि वह पशुओं में दूध की मात्रा के लिए जिम्मेदार जीन पर रिसर्च कर रहे हैं। भारत की गाय-भैंसें मुख्य रूप से ””ए2 बीटा-केसीन”” जीन वाली होती हैं जो सेहतमंद मानी जाती है। विदेशी नस्लें ””ए1”” और ””ए2”” जीन के मिश्रण वाली होती हैं। जिसके चलते विदेशी नस्लें ज्यादा दूध देती हैं। भारतीय नस्लों में दूध उत्पादन क्षमता आनुवंशिक रूप से कम होती है। उन्होंने कहा कि स्टार 3, स्टार 5 जीन के चलते हमारे यहां के पशुओं में दूध कम हैं। हम इन जीन पर विस्तृत शोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शोध में काफी लंबा समय लगता है। हम इस समय को कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीन इंजीनियरिंग के लिए भी प्रयोग किए जा रहे हैं। जब जीन इंजीनियरिंग का शोध पूरा हो जाएगा तो पशु पालन क्षेत्र में व्यापक स्तर पर क्रांति आएगी।

प्रो बायोटिक का प्रयोग करें
काफी क्षेत्र में पशु चिकित्सकों की सलाह के बिना एंटी बायोटिक का प्रयोग किया जाता है। लंबे समय तक इनका निरंतर प्रयोग करने से पशुओं एंटी बायोटिक काम करना बंद कर देते हैं। पशु के बीमार होने पर उसकी पूरी जांच करानी चाहिए। पशु को एंटी बायोटिक की बजाए प्रो बायोटिक दी जानी चाहिए।

अंडे बढ़ाने पर भी शोध
डा. नवीन स्वरुप ने बताया कि भारतीय नस्ल की मुर्गियों की अंडा देने की क्षमता भी कम है। दूसरे देशों में जहां मुर्गी एक साल में 300 अंडे देती हैं वहीं हमारे यहां की मुर्गी एक साल में 180 अंडे तक ही देती हैं। हम इस अंतर को दूर करने के लिए भी प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक अंडे में दो येलो जर्दी डालने का प्रयोग किया था। जिसको ज्यादा पसंद नहीं किया गया।

विदेशों की तुलना में 8 से 10 गुणा तक कम
विदेशों में गाय औसतन 25 से 30 लीटर दूध देती हैं। जिसमें अधिकतम 50 लीटर दूध देने वाली गाय भी हैं। होल्स्टीन ,जर्सी,आयर शायर, ब्राउन स्विस नस्ल प्रमुख हैं। भारत में देसी किस्म की गिर, साहीवाल, राठी, थारपारकर गाय औसतन 3 से 10 लीटर तक दूध देती हैं। शंकर किस्म की गाय औसतन 10 से 15 लीटर तक दूध देती हैं। दूसरे देशों में भैंसाें की संख्या बेहद कम हैं।

[ad_2]
अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में भारतीय गाय-भैंस का दूध कम, हिसार में जेनेटिक इंजीनियरिंग पर हो रहा शोध