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भारत में गैस की कमी की वजह से सरकारी तेल और गैस कंपनियां अब नए देशों से सप्लाई का ऑप्शन तलाश रही हैं। इसी कड़ी में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और गेल (इंडिया) लिमिटेड अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल से रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदने के लिए बात कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कंपनियां अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल के साथ लंबी अवधि के समझौते (टर्म कॉन्ट्रैक्ट) करने पर विचार कर रही हैं। हालांकि, बातचीत अभी शुरुआती दौर में है और सरकार से सरकार के स्तर पर भी चर्चा जारी है। यह हालात इसलिए बने हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है। यह रास्ता दुनिया में तेल और गैस सप्लाई के लिए बहुत अहम माना जाता है। इसके बंद होने से भारत समेत कई देशों की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत दुनिया का दूसरा बड़ा LPG उपभोक्ता भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 60% इंपोर्ट करता है। वहीं, करीब 50% LNG भी इंपोर्ट करता है। अभी तक भारत को ज्यादातर गैस मिडिल ईस्ट के देशों, खासकर कतर और UAE से मिलती रही है। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण भारत की करीब 90% LPG आयात पर असर पड़ा है। इसी वजह से सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियम सख्त कर दिए हैं। अब शहरों में 25 दिन और गांवों में 45 दिन के अंतराल पर ही सिलेंडर बुक किया जा सकता है। अंगोला पहली बार भारत को LPG कर सकता है एक्सपर्ट्स का कहना है कि अफ्रीका से गैस सप्लाई अमेरिका की तुलना में 10 से 15 दिन जल्दी भारत पहुंच सकती है। ऐसे में अंगोला भारत के लिए एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है। अगर यह करार होता है, तो अंगोला पहली बार भारत को रसोई गैस सप्लाई करेगा। भारतीय कंपनियां LPG के लिए करीब एक साल और LNG के लिए कम से कम 10 साल का करार करने पर विचार कर रही हैं। अंगोला के पास करीब 4.6 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है और वह पहले से ही भारत को कच्चा तेल और LNG सप्लाई करता रहा है। वित्त वर्ष 2025 में अंगोला भारत का पांचवां सबसे बड़ा LNG सप्लायर था। ऑस्ट्रेलिया-अल्जीरिया और रूस से भी LPG खरीदने की तैयारी भारत सिर्फ अंगोला ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी गैस इंपोर्ट के ऑप्शन तलाश रहा है, ताकि किसी एक रीजन पर निर्भरता कम की जा सके। इस गैस संकट का असर उर्वरक (फर्टिलाइजर) और स्टील सेक्टर जैसे उद्योगों पर भी पड़ सकता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो गैस की कीमतें भी बढ़ सकती हैं और भारत को महंगे दामों पर गैस -खरीदनी पड़ सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट की सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में दो बड़े जहाज करीब 94 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर भारत की ओर रवाना हुए हैं। भारत की 92% LPG खाड़ी के 4 देशों से आती है भारत का ज्यादातर LPG आयात फारस की खाड़ी के देशों UAE, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से होता है। खास बात यह है कि इन सभी देशों से आने वाली गैस एक ही रास्ते, होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। यह सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री रास्ता है, लेकिन दुनिया के करीब 20% तेल और गैस का व्यापार यहीं से होता है। 2024-25 में भारत के करीब 92% LPG आयात इन्हीं चार खाड़ी देशों से आए। इनमें यूएई सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है, जिसकी हिस्सेदारी बढ़कर 40% से ज्यादा हो गई है। वहीं, कतर और सऊदी अरब की हिस्सेदारी में गिरावट आई है। भारत में LPG की मांग बढ़ी लेकिन उत्पादन नहीं भारत में LPG की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन घरेलू उत्पादन लगभग नहीं बढ़ रहा। यही वजह है कि देश को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगवाना पड़ रहा है, जिससे सप्लाई को लेकर जोखिम भी बढ़ गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने साल 2024-25 में 20.67 मिलियन टन LPG आयात किया, जो 2019-20 के 14.81 मिलियन टन के मुकाबले करीब 40% ज्यादा है। यानी सिर्फ पांच साल में आयात में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। भारत का घरेलू उत्पादन लगभग स्थिर बना हुआ है। 2019-20 में देश ने 12.82 मिलियन टन LPG का उत्पादन किया था, जो 2024-25 में घटकर करीब 12.79 मिलियन टन रह गया। यानी उत्पादन में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई। 2024-25 में भारत ने 31.32 मिलियन टन LPG का इस्तेमाल किया, जो 2019-20 के मुकाबले करीब 19% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में गैस कनेक्शन बढ़ने की वजह से हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों परिवारों को LPG कनेक्शन दिए गए हैं। अब देश में 33 करोड़ से ज्यादा एक्टिव गैस कनेक्शन हैं, जिससे मांग लगातार बढ़ रही है।
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अंगोला से गैस खरीदने की तैयारी में भारतीय कंपनियां: सरकारी स्तर पर भी बातचीत जारी, होर्मुज संकट की वजह से भारत नए ऑप्शन तलाश रहा

