हिसार जिले में गठबंधन के 6 विधायक, तीन के पास मंत्री की कुर्सी फिर भी दोनों चेयरपर्सन प्रत्याशी हारे


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सुरेंद्र दलाल
हिसार। प्रदेश में गठबंधन की सरकार में सबसे अधिक राजनीतिक ताकत रखने वाले हिसार जिले में गठबंधन को निकाय चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। हांसी नगर परिषद में भाजपा की चेयरपर्सन प्रत्याशी और बरवाला नगरपालिका में प्रधान पद के लिए मैदान में उतरे जजपा प्रत्याशी को निर्दलीय उम्मीदवार ने धूल चटा दी। हांसी में भाजपा विधायक विनोद भयाना, बरवाला में जजपा विधायक जोगीराम सिहाग अपने चेयरपर्सन प्रत्याशियों को जिताने में नाकाम साबित हुए। गठबंधन सरकार में दोनों दलों के विधायकों की राजनीतिक परीक्षा थी, जिसमें दोनों सफल नहीं हो सके।
जिले की कुल 7 विधानसभा में तीन पर भाजपा, तीन पर जजपा और एक में कांग्रेस विधायक है। भाजपा के नलवा से विधायक रणबीर गंगवा को डिप्टी स्पीकर, हिसार से विधायक डॉ. कमल गुप्ता को शहरी निकाय मंत्री की कुर्सी मिली हुई है। उकलाना से जजपा विधायक अनूप धानक श्रम व रोजगार मंत्री हैं। जिले में गठबंधन के 6 में से 3 को मंत्री की कुर्सी मिली हुई है। इसके अलावा उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, जेल मंत्री रणजीत सिंह चौटाला का भी हिसार पर अधिक फोकस रहता है। शहरी क्षेत्रों में भाजपा का दबदबा माना जाता है। हिसार जिले में भाजपा-जजपा गठबंधन ने एक-एक प्रत्याशी उतारा था। दोनों विधायकों ने अपने विधानसभा में प्रत्याशियों को जिताने के लिए पूरा जोर लगाया था। हांसी नगर पालिका चेयरपर्सन का पद भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ था। इसमें प्रत्याशी की जीत के लिए विधायक विनोद भयाना के अलावा पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ सहित अन्य लोगों ने प्रचार किया।
मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने भी वीडियो कांफ्रेंस के जरिये जनता से मीनू सेठी के लिए वोट मांगे थे। इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी को हार मिली। जजपा प्रत्याशी रामकेश बंसल के लिए विधायक जोगीराम सिहाग, राज्यमंत्री अनूप धानक वोट की अपील के लिए पहुंचे थे। इसके बाद भी वह पराजित हुए।
पार्टी निशान पर पार्षदों का बहुमत भी नहीं जुटा सके
बरवाला में जजपा ने वार्ड प्रत्याशी चुनाव निशान पर मैदान में नहीं उतारे थे। हांसी में कुल 27 नगर पार्षदों में से भाजपा ने 25 पर अपने निशान पर प्रत्याशी उतारे। जिसमें केवल 12 ही जीत हासिल कर सके। पार्षदों की संख्या में भी गठबंधन अपने निशान पर बहुमत का आंकड़ा हासिल करने में नाकाम रहा।
गठबंधन के लिए चुनौती होगी
यह परिणाम भाजपा-जजपा को चुनौती देने वाले हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों व चेयरमैन ने अपनी जीत से साबित कर दिया कि गठबंधन उतना असरदार नहीं रहा। शहरी एरिया में भी भाजपा को इस तरह की हार आने वाले समय के लिए चुनौती है।
कुलदीप बिश्नोई के लिए अच्छे संकेत
आदमपुर विधायक कुलदीप बिश्नोई के लिए यह अच्छा अवसर हो सकता है। हिसार जिले में उनका राजनीतिक असर है। ऐसे में हांसी, हिसार, बरवाला, आदमपुर, उकलाना, नारनौंद शहरों में पार्टी को मजबूत करने के लिए भाजपा कुलदीप बिश्नोई को अच्छे ऑफर मिल सकते हैं।
जजपा ने हमारे साथ सरेआम विश्वासघात किया है। उन्होंने गठबंधन धर्म नहीं निभाया। हम चुनाव को सही तरह से मैनेज नहीं कर सके। इस कारण चेयरपर्सन प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। हमारे 12 सिंबल और एक बिना सिबंल पार्षद बना है। न हमारी हार है न पार्टी की। – विनोद भयाना, विधायक, हांसी

सुरेंद्र दलाल

हिसार। प्रदेश में गठबंधन की सरकार में सबसे अधिक राजनीतिक ताकत रखने वाले हिसार जिले में गठबंधन को निकाय चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। हांसी नगर परिषद में भाजपा की चेयरपर्सन प्रत्याशी और बरवाला नगरपालिका में प्रधान पद के लिए मैदान में उतरे जजपा प्रत्याशी को निर्दलीय उम्मीदवार ने धूल चटा दी। हांसी में भाजपा विधायक विनोद भयाना, बरवाला में जजपा विधायक जोगीराम सिहाग अपने चेयरपर्सन प्रत्याशियों को जिताने में नाकाम साबित हुए। गठबंधन सरकार में दोनों दलों के विधायकों की राजनीतिक परीक्षा थी, जिसमें दोनों सफल नहीं हो सके।

जिले की कुल 7 विधानसभा में तीन पर भाजपा, तीन पर जजपा और एक में कांग्रेस विधायक है। भाजपा के नलवा से विधायक रणबीर गंगवा को डिप्टी स्पीकर, हिसार से विधायक डॉ. कमल गुप्ता को शहरी निकाय मंत्री की कुर्सी मिली हुई है। उकलाना से जजपा विधायक अनूप धानक श्रम व रोजगार मंत्री हैं। जिले में गठबंधन के 6 में से 3 को मंत्री की कुर्सी मिली हुई है। इसके अलावा उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, जेल मंत्री रणजीत सिंह चौटाला का भी हिसार पर अधिक फोकस रहता है। शहरी क्षेत्रों में भाजपा का दबदबा माना जाता है। हिसार जिले में भाजपा-जजपा गठबंधन ने एक-एक प्रत्याशी उतारा था। दोनों विधायकों ने अपने विधानसभा में प्रत्याशियों को जिताने के लिए पूरा जोर लगाया था। हांसी नगर पालिका चेयरपर्सन का पद भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ था। इसमें प्रत्याशी की जीत के लिए विधायक विनोद भयाना के अलावा पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ सहित अन्य लोगों ने प्रचार किया।

मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने भी वीडियो कांफ्रेंस के जरिये जनता से मीनू सेठी के लिए वोट मांगे थे। इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी को हार मिली। जजपा प्रत्याशी रामकेश बंसल के लिए विधायक जोगीराम सिहाग, राज्यमंत्री अनूप धानक वोट की अपील के लिए पहुंचे थे। इसके बाद भी वह पराजित हुए।

पार्टी निशान पर पार्षदों का बहुमत भी नहीं जुटा सके

बरवाला में जजपा ने वार्ड प्रत्याशी चुनाव निशान पर मैदान में नहीं उतारे थे। हांसी में कुल 27 नगर पार्षदों में से भाजपा ने 25 पर अपने निशान पर प्रत्याशी उतारे। जिसमें केवल 12 ही जीत हासिल कर सके। पार्षदों की संख्या में भी गठबंधन अपने निशान पर बहुमत का आंकड़ा हासिल करने में नाकाम रहा।

गठबंधन के लिए चुनौती होगी

यह परिणाम भाजपा-जजपा को चुनौती देने वाले हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों व चेयरमैन ने अपनी जीत से साबित कर दिया कि गठबंधन उतना असरदार नहीं रहा। शहरी एरिया में भी भाजपा को इस तरह की हार आने वाले समय के लिए चुनौती है।

कुलदीप बिश्नोई के लिए अच्छे संकेत

आदमपुर विधायक कुलदीप बिश्नोई के लिए यह अच्छा अवसर हो सकता है। हिसार जिले में उनका राजनीतिक असर है। ऐसे में हांसी, हिसार, बरवाला, आदमपुर, उकलाना, नारनौंद शहरों में पार्टी को मजबूत करने के लिए भाजपा कुलदीप बिश्नोई को अच्छे ऑफर मिल सकते हैं।

जजपा ने हमारे साथ सरेआम विश्वासघात किया है। उन्होंने गठबंधन धर्म नहीं निभाया। हम चुनाव को सही तरह से मैनेज नहीं कर सके। इस कारण चेयरपर्सन प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। हमारे 12 सिंबल और एक बिना सिबंल पार्षद बना है। न हमारी हार है न पार्टी की। – विनोद भयाना, विधायक, हांसी

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Written by Haryanacircle

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