हनुमान जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की टीम पहुंची


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कैथल। कर्नाटक के कोपड़ जिले में स्थित किष्किंध्या आश्रम से श्री हनुमान जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की टीम कैथल पहुंची। इस टीम में ट्रस्ट के अध्यक्ष सहित सात सदस्य शामिल हैं। यह टीम अपने साथ एक रथ लेकर पहुंचे हैं। ट्रस्ट की यह टीम लगातार 12 वर्षों तक पूरे भारत की यात्रा कर भगवान हनुमान से जुड़े तीर्थों की जानकारी प्राप्त कर रही है। यात्रा का नेतृत्व ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत गोविंदानंद सरस्वती कर हैं।
मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान का जन्मस्थली को कैथल से भी जोड़कर देखा जाता रहा है इसलिए यह टीम कैथल में पहुंची है। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत गोविंदानंद सरस्वती ने बताया कि अयोध्या में बन रहे भव्य श्री राम मंदिर की तर्ज पर किष्किंध्या में भी श्री हनुमान मंदिर बनाने का एलान किया है। इसी कड़ी में ट्रस्ट ने पूरे भारत की यात्रा करने का फैसला लिया है। यह यात्रा छह महीने पहले ही जनवरी में शुरू की गई थी, जो विजयदशमी तक जारी रहेगी।
इसके बाद जनवरी में फिर से यात्रा प्रारंभ होगी। महंत गोविंदानंद सरस्वती ने बताया कि कैथल का इतिहास भी महाभारत काल से जुड़ा है। महाभारत के युद्ध में भगवान हनुमान भी काफी भूमिका रही थी। ऐसा शास्त्रों के अनुसार है। इसलिए ही कैथल में जानकारी जुटाने के लिए पहुंचे हैं। वे तीन दिन तक संत महात्माओं और इतिहासकारों से मिलकर जानकारी प्राप्त करेंगे।

कैथल। कर्नाटक के कोपड़ जिले में स्थित किष्किंध्या आश्रम से श्री हनुमान जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की टीम कैथल पहुंची। इस टीम में ट्रस्ट के अध्यक्ष सहित सात सदस्य शामिल हैं। यह टीम अपने साथ एक रथ लेकर पहुंचे हैं। ट्रस्ट की यह टीम लगातार 12 वर्षों तक पूरे भारत की यात्रा कर भगवान हनुमान से जुड़े तीर्थों की जानकारी प्राप्त कर रही है। यात्रा का नेतृत्व ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत गोविंदानंद सरस्वती कर हैं।

मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान का जन्मस्थली को कैथल से भी जोड़कर देखा जाता रहा है इसलिए यह टीम कैथल में पहुंची है। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत गोविंदानंद सरस्वती ने बताया कि अयोध्या में बन रहे भव्य श्री राम मंदिर की तर्ज पर किष्किंध्या में भी श्री हनुमान मंदिर बनाने का एलान किया है। इसी कड़ी में ट्रस्ट ने पूरे भारत की यात्रा करने का फैसला लिया है। यह यात्रा छह महीने पहले ही जनवरी में शुरू की गई थी, जो विजयदशमी तक जारी रहेगी।

इसके बाद जनवरी में फिर से यात्रा प्रारंभ होगी। महंत गोविंदानंद सरस्वती ने बताया कि कैथल का इतिहास भी महाभारत काल से जुड़ा है। महाभारत के युद्ध में भगवान हनुमान भी काफी भूमिका रही थी। ऐसा शास्त्रों के अनुसार है। इसलिए ही कैथल में जानकारी जुटाने के लिए पहुंचे हैं। वे तीन दिन तक संत महात्माओं और इतिहासकारों से मिलकर जानकारी प्राप्त करेंगे।

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Written by Haryanacircle

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