सीनियर्स के विरोध में आए एमबीबीएस छात्र, निदेशक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन


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रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विभाग विश्वविद्यालय में शुक्रवार देर शाम निदेशक कार्यालय के बाहर एमबीबीएस के विद्यार्थियों ने अपने सीनियरों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आरोप है कि हॉस्टल के सुपरीटेंडेंट व सहायक सुपरीटेंडेंट दो डॉक्टरों ने विद्यार्थियों के साथ हॉस्टल में अभद्रता की और निलंबित कराने की धमकी देते हुए उन्हें डंडा दिखाया। दोनों पर कार्रवाई की मांग को लेकर विद्यार्थी शाम छह बजे से रात दस बजे तक निदेशक कार्यालय के बाहर डटे रहे।
पीजीआईएमएस में एमबीबीएस छात्र पंकज ने बताया कि उसके व एमबीबीएस इंटर्न कर रहे छात्र के साथ हॉस्टल सुपरीटेंडेंट डॉ. संजय गुप्ता व सहायक सुपरीटेंडेंट डॉ. रजत गुप्ता ने अभद्र व्यवहार किया। इसके चलते हॉस्टल के सभी सीनियर व जूनियर विद्यार्थी उनके समर्थन में निदेशक कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन में बैठ गए हैं। सभी की मांग है कि दोनों सीनियर डॉक्टरों को सबसे पहले हॉस्टल के पदों की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए। इसके बाद जांच हो और फिर कोई बात होगी। एमबीबीएस छात्र पंकज ने बताया कि शुक्रवार को हॉस्टल की समस्या पर बैठक चल रही थी, इसमें डॉ. रजत गुप्ता भी थे। हॉस्टल की समस्या के निदान के लिए एक कमेटी गठित है, जबकि इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। इनका कोई फैसला किसी की सहमति से नहीं लिया जाता। जब सभी ने इस पर सवाल उठाया तो कहा गया कि अब तुम इतने बड़े हो गए हो कि सवाल जवाब करोगे। इस पर डॉ. रजत ने डॉ. संजय गुप्ता को संदेश दिया। मौके पर डॉ. संजय गुप्ता आए तो उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उनको डंडा दिखाया। इसके विरोध में सभी छात्र चार घंटे से निदेशक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। छात्रों की मांग है कि उनकी मांग पूरी की जाए नहीं तो वह धरने से नहीं उठेंगे। पंकज ने बताया कि उनसे बात करने के लिए डीन डॉ. आरबी जैन व निदेशक डॉ. एसएस लोहचब आए थे, लेकिन उनकी बात से कोई सहमत नहीं है। इसलिए विरोध प्रदर्शन अभी जारी है। गौरतलब है कि पहले भी हॉस्टल के एक सीनियर डॉक्टर की शिकायत हुई थी। जब डिग्री का लेने का समय आया तो माफी लिखवाने का दबाव बनाया गया।
वर्जन
इस मामले की जांच के लिए कमेटी बना दी गई है। इसमें डीन, वार्डन व सुरक्षा अधिकारी तीन सदस्य होंगे। विद्यार्थियों को समझा दिया गया है कि कमेटी की जांच पर कार्रवाई करेंगे, लेकिन वह नहीं मान रहे हैं। यदि डॉक्टर की गलती मिलती है तो उनसे उनका हॉस्टल का चार्ज ले लिया जाएगा। शिक्षक-विद्यार्थी को गुरु शिष्य की गरिमा का मान रखना चाहिए। विद्यार्थियों से बातचीत का प्रयास किया जा रहा है।
– डॉ. एसएस लोहचब, निदेशक, पीजीआईएमएस

रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विभाग विश्वविद्यालय में शुक्रवार देर शाम निदेशक कार्यालय के बाहर एमबीबीएस के विद्यार्थियों ने अपने सीनियरों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आरोप है कि हॉस्टल के सुपरीटेंडेंट व सहायक सुपरीटेंडेंट दो डॉक्टरों ने विद्यार्थियों के साथ हॉस्टल में अभद्रता की और निलंबित कराने की धमकी देते हुए उन्हें डंडा दिखाया। दोनों पर कार्रवाई की मांग को लेकर विद्यार्थी शाम छह बजे से रात दस बजे तक निदेशक कार्यालय के बाहर डटे रहे।

पीजीआईएमएस में एमबीबीएस छात्र पंकज ने बताया कि उसके व एमबीबीएस इंटर्न कर रहे छात्र के साथ हॉस्टल सुपरीटेंडेंट डॉ. संजय गुप्ता व सहायक सुपरीटेंडेंट डॉ. रजत गुप्ता ने अभद्र व्यवहार किया। इसके चलते हॉस्टल के सभी सीनियर व जूनियर विद्यार्थी उनके समर्थन में निदेशक कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन में बैठ गए हैं। सभी की मांग है कि दोनों सीनियर डॉक्टरों को सबसे पहले हॉस्टल के पदों की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए। इसके बाद जांच हो और फिर कोई बात होगी। एमबीबीएस छात्र पंकज ने बताया कि शुक्रवार को हॉस्टल की समस्या पर बैठक चल रही थी, इसमें डॉ. रजत गुप्ता भी थे। हॉस्टल की समस्या के निदान के लिए एक कमेटी गठित है, जबकि इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। इनका कोई फैसला किसी की सहमति से नहीं लिया जाता। जब सभी ने इस पर सवाल उठाया तो कहा गया कि अब तुम इतने बड़े हो गए हो कि सवाल जवाब करोगे। इस पर डॉ. रजत ने डॉ. संजय गुप्ता को संदेश दिया। मौके पर डॉ. संजय गुप्ता आए तो उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उनको डंडा दिखाया। इसके विरोध में सभी छात्र चार घंटे से निदेशक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। छात्रों की मांग है कि उनकी मांग पूरी की जाए नहीं तो वह धरने से नहीं उठेंगे। पंकज ने बताया कि उनसे बात करने के लिए डीन डॉ. आरबी जैन व निदेशक डॉ. एसएस लोहचब आए थे, लेकिन उनकी बात से कोई सहमत नहीं है। इसलिए विरोध प्रदर्शन अभी जारी है। गौरतलब है कि पहले भी हॉस्टल के एक सीनियर डॉक्टर की शिकायत हुई थी। जब डिग्री का लेने का समय आया तो माफी लिखवाने का दबाव बनाया गया।

वर्जन

इस मामले की जांच के लिए कमेटी बना दी गई है। इसमें डीन, वार्डन व सुरक्षा अधिकारी तीन सदस्य होंगे। विद्यार्थियों को समझा दिया गया है कि कमेटी की जांच पर कार्रवाई करेंगे, लेकिन वह नहीं मान रहे हैं। यदि डॉक्टर की गलती मिलती है तो उनसे उनका हॉस्टल का चार्ज ले लिया जाएगा। शिक्षक-विद्यार्थी को गुरु शिष्य की गरिमा का मान रखना चाहिए। विद्यार्थियों से बातचीत का प्रयास किया जा रहा है।

– डॉ. एसएस लोहचब, निदेशक, पीजीआईएमएस

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Written by Haryanacircle

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