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सिरसा: दुर्घटना में अपना पैर गंवाने वाले किसान को बीमा कंपनी देगी छह फीसदी ब्याज सहित 9 लाख रुपये


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हरियाणा के सिरसा में दुर्घटना में अपनी एक टांग गवाने वाले किसान को जिला उपभोक्ता फोरम ने इंसाफ देते हुए बीमा कंपनी को 6 फीसदी ब्याज सहित 9 लाख रुपये क्लेम राशि देने के आदेश दिया है। इसके साथ ही बीमा कंपनी को 25 हजार रुपये मुआवजा और पीड़ित किसान की कानूनी लड़ाई में खर्च हुई राशि के तौर पर 10 हजार रुपये देने होंगे। तमाम राशि का भुगतान 45 दिन के भीतर करना होगा। 

मामले के अनुसार जिला के गांव धिंगतानिया निवासी बलबीर ने सिरसा इंडसइंड बैंक से 30 फरवरी 2016 को किसान क्रेडिट कार्ड बनाया था। कार्ड बनाने के साथ ही रेलिगेयर हेल्थ कंपनी की तरफ से पॉलिसी दी जा रही थी। किसान बलबीर ने नौ लाख का हेल्थ बीमा करवाया। इस बीमे में सारे रिस्क कवर थे। 25 फरवरी 2018 को बलबीर धिंगतानियां से रंगड़ी खेड़ा जा रहा था और रास्ते में हादसा हो गया।

दुर्घटना में बलबीर बुरी तरह से घायल हो गया और उसकी टांग टूट गई। उसे राहगीरों ने सिरसा के एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल करवाया। 26 फरवरी 2018 को चोपटा थाना पुलिस ने घायल बलबीर का बयान दर्ज कर एफआईआर दर्ज कर ली। इसके पश्चात बलबीर ने बीमा कंपनी से क्लेम राशि मांगी, लेकिन बीमा कंपनी क्लेम राशि देने में आनाकानी करने लगी।

इसके बाद किसान बलबीर ने 29 अक्टूबर 2018 को जिला उपभोक्ता फोरम का द्वार खटखटाते हुए इंसाफ की गुहार लगाई।  सात जून को इस मामले का निपटारा करते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष पदम सिंह ठाकुर ने फैसला सुनाया। फैसले में उन्होंने बीमा कंपनी को 9 लाख रुपये बीमा राशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित पीड़ित किसान को देने का आदेश दिया। यह ब्याज राशि 29 अक्टूबर 2018 से 7 जून 2022 की अवधि के हिसाब से दी जाएगी। साथी पीड़ित किसान को जो मानसिक तनाव झेलना पड़ा उसकी पूर्ति के लिए बीमा कंपनी को 25 हजार रुपये देने होंगे।
 
लोगों का कर्जा चुकाऊंगा
पीड़ित किसान बलबीर का कहना है कि उपभोक्ता न्यायालय से उसे न्याय की उम्मीद थी, जो उसे न्यायालय ने प्रदान किया है। दुर्घटना के बाद से वह कामकाज करने में असमर्थ हो गया। जिससे उसके ऊपर काफी कर्ज चढ़ा हुआ है। बीमा क्लेम की राशि मिलने पर सारा कर्ज चुकाऊंगा।

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हरियाणा के सिरसा में दुर्घटना में अपनी एक टांग गवाने वाले किसान को जिला उपभोक्ता फोरम ने इंसाफ देते हुए बीमा कंपनी को 6 फीसदी ब्याज सहित 9 लाख रुपये क्लेम राशि देने के आदेश दिया है। इसके साथ ही बीमा कंपनी को 25 हजार रुपये मुआवजा और पीड़ित किसान की कानूनी लड़ाई में खर्च हुई राशि के तौर पर 10 हजार रुपये देने होंगे। तमाम राशि का भुगतान 45 दिन के भीतर करना होगा। 

मामले के अनुसार जिला के गांव धिंगतानिया निवासी बलबीर ने सिरसा इंडसइंड बैंक से 30 फरवरी 2016 को किसान क्रेडिट कार्ड बनाया था। कार्ड बनाने के साथ ही रेलिगेयर हेल्थ कंपनी की तरफ से पॉलिसी दी जा रही थी। किसान बलबीर ने नौ लाख का हेल्थ बीमा करवाया। इस बीमे में सारे रिस्क कवर थे। 25 फरवरी 2018 को बलबीर धिंगतानियां से रंगड़ी खेड़ा जा रहा था और रास्ते में हादसा हो गया।

दुर्घटना में बलबीर बुरी तरह से घायल हो गया और उसकी टांग टूट गई। उसे राहगीरों ने सिरसा के एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल करवाया। 26 फरवरी 2018 को चोपटा थाना पुलिस ने घायल बलबीर का बयान दर्ज कर एफआईआर दर्ज कर ली। इसके पश्चात बलबीर ने बीमा कंपनी से क्लेम राशि मांगी, लेकिन बीमा कंपनी क्लेम राशि देने में आनाकानी करने लगी।

इसके बाद किसान बलबीर ने 29 अक्टूबर 2018 को जिला उपभोक्ता फोरम का द्वार खटखटाते हुए इंसाफ की गुहार लगाई।  सात जून को इस मामले का निपटारा करते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष पदम सिंह ठाकुर ने फैसला सुनाया। फैसले में उन्होंने बीमा कंपनी को 9 लाख रुपये बीमा राशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित पीड़ित किसान को देने का आदेश दिया। यह ब्याज राशि 29 अक्टूबर 2018 से 7 जून 2022 की अवधि के हिसाब से दी जाएगी। साथी पीड़ित किसान को जो मानसिक तनाव झेलना पड़ा उसकी पूर्ति के लिए बीमा कंपनी को 25 हजार रुपये देने होंगे।

 

लोगों का कर्जा चुकाऊंगा

पीड़ित किसान बलबीर का कहना है कि उपभोक्ता न्यायालय से उसे न्याय की उम्मीद थी, जो उसे न्यायालय ने प्रदान किया है। दुर्घटना के बाद से वह कामकाज करने में असमर्थ हो गया। जिससे उसके ऊपर काफी कर्ज चढ़ा हुआ है। बीमा क्लेम की राशि मिलने पर सारा कर्ज चुकाऊंगा।

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