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सरकार की वादा खिलाफी के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, गुर्जर धर्मशाला से लघु सचिवालय तक निकाला जुलूस


गुर्जर धर्मशाला से लघु सचिवालय तक जुलूस निकालते किसान।

गुर्जर धर्मशाला से लघु सचिवालय तक जुलूस निकालते किसान।
– फोटो : Palwal

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पलवल। किसान आंदोलन की समाप्ति पर सरकार द्वारा मानी गईं मांगों को पूरा नहीं करने के विरोध में मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शन किया। किसान गांव कुसलीपुर स्थित गुर्जर धर्मशाला में एकत्रित हुए और सभा की। इसके बाद भारी संख्या में किसान जुलूस निकालकर लघु सचिवालय पहुंचे। सचिवालय में मुख्यमंत्री के नाम जिला राजस्व अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने एमएसपी सहित सभी मांगों को पूरा नहीं किया तो किसान आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। इस दौरान किसानों ने स्थानीय समस्याओं के समाधान की भी मांग की।
प्रदर्शन की अध्यक्षता किसान नेता हेतलाल पहलवान ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद घुघेरा ने किया। गांव कुसलीपुर स्थित गुर्जर धर्मशाला में किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि करीब 1.25 साल तक किसानों ने नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन किया। आंदोलन के दौरान किसान सड़कों पर रहे। इस दौरान सैकड़ों किसानों की जान गंवाई। तब जाकर सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लिया और किसानों से छह सूत्रीय मांगों को पूरा करने का वादा किया। सरकार ने अब तक न तो एमएसपी पर कमेटी बनाई है और न ही आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को शहीद का दर्जा दिया। भाजपा नेता अजय मिश्र टेनी की गिरफ्तारी और किसान शहीद स्मारक बनाए जाने की मांग भी अधूरी पड़ी है। सरकार को लगता है कि आंदोलन समाप्त हो गया तो मनमर्जी कर सकते हैं। किसान आंदोलन में सैकड़ों किसानों की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। यदि सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो किसान आंदोलन को दोबारा शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शन को उदय सिंह सरपंच, सोहनपाल चौहान, नरेंद्र सहरावत, ताराचंद, बीधू सिंह, राजेंद्र बैंसला, जेसी कारना, बिजेंद्र सरपंच, देवेंद्र चौहान, ऋषिपाल चौहान, जयनारायण, श्रीचंद महाशय, श्रीपाल सिंह तंवर, जगपाल तेवतिया, हरदयाल सिंह, दीपक सिंह, राजेंद्र घर्रोट, नंदलाल महाशय, गजराज गायक, रणजीत चौहान, चंद्रमुनि, बीर सिंह पंच, अतर सहरावत, भीगारथ बेनीवाल, रमेश चंद्र और दरियाब सिंह ने संबोधित किया।
गेहूं की खरीद पर 500 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजा दे सरकार
किसान नेता राजकुमार ओहलियान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस वर्ष गेहूं के उत्पादन में आई गिरावट तथा कृषि में बढ़ रही लागत को देखते हुए गेहूं की खरीद पर 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियों ने भी पर्याप्त मात्रा में गेहूं की खरीद नहीं की है, जिससे किसानों को उत्पादन की कमी तथा फसल की कम खरीद की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। सरकारी नीतियों का फायदा उठाकर निजी व्यापारी व पूंजीपति कंपनियां अनाज की मुनाफाखोरी में लगे हैं। उन्होंने कहा कि पलवल की चीनी मिल भ्रष्टाचार का अड्डा बनी हुई है। मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये हड़प लिए गए हैं। बार-बार मिल बंद होने से किसानों का गन्ना सूख रहा है।
मनरेगा घोटाले के आरोपियों को मिले सख्त सजा
किसान नेताओं ने कहा कि मनरेगा के तहत गांवों में हुए कार्यों में अधिकारियों और कर्मचारियों ने करोड़ों का गबन किया है। मुकदमे दर्ज होने के बावजूद भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। मुख्य आरोपी एसडीओ, जेई, अकाउंटेंट व सरपंचों के नाम मुकदमों में नहीं दिए गए हैं। मुकदमों में गबन की धनराशि को भी नहीं दिखाया गया है। उन्होंने मांग कि है कि घोटाले करने वाले अधिकारी, कर्मचारी, सरपंच और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

पलवल। किसान आंदोलन की समाप्ति पर सरकार द्वारा मानी गईं मांगों को पूरा नहीं करने के विरोध में मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शन किया। किसान गांव कुसलीपुर स्थित गुर्जर धर्मशाला में एकत्रित हुए और सभा की। इसके बाद भारी संख्या में किसान जुलूस निकालकर लघु सचिवालय पहुंचे। सचिवालय में मुख्यमंत्री के नाम जिला राजस्व अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने एमएसपी सहित सभी मांगों को पूरा नहीं किया तो किसान आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। इस दौरान किसानों ने स्थानीय समस्याओं के समाधान की भी मांग की।

प्रदर्शन की अध्यक्षता किसान नेता हेतलाल पहलवान ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद घुघेरा ने किया। गांव कुसलीपुर स्थित गुर्जर धर्मशाला में किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि करीब 1.25 साल तक किसानों ने नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन किया। आंदोलन के दौरान किसान सड़कों पर रहे। इस दौरान सैकड़ों किसानों की जान गंवाई। तब जाकर सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लिया और किसानों से छह सूत्रीय मांगों को पूरा करने का वादा किया। सरकार ने अब तक न तो एमएसपी पर कमेटी बनाई है और न ही आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को शहीद का दर्जा दिया। भाजपा नेता अजय मिश्र टेनी की गिरफ्तारी और किसान शहीद स्मारक बनाए जाने की मांग भी अधूरी पड़ी है। सरकार को लगता है कि आंदोलन समाप्त हो गया तो मनमर्जी कर सकते हैं। किसान आंदोलन में सैकड़ों किसानों की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। यदि सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो किसान आंदोलन को दोबारा शुरू किया जाएगा।

प्रदर्शन को उदय सिंह सरपंच, सोहनपाल चौहान, नरेंद्र सहरावत, ताराचंद, बीधू सिंह, राजेंद्र बैंसला, जेसी कारना, बिजेंद्र सरपंच, देवेंद्र चौहान, ऋषिपाल चौहान, जयनारायण, श्रीचंद महाशय, श्रीपाल सिंह तंवर, जगपाल तेवतिया, हरदयाल सिंह, दीपक सिंह, राजेंद्र घर्रोट, नंदलाल महाशय, गजराज गायक, रणजीत चौहान, चंद्रमुनि, बीर सिंह पंच, अतर सहरावत, भीगारथ बेनीवाल, रमेश चंद्र और दरियाब सिंह ने संबोधित किया।

गेहूं की खरीद पर 500 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजा दे सरकार

किसान नेता राजकुमार ओहलियान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस वर्ष गेहूं के उत्पादन में आई गिरावट तथा कृषि में बढ़ रही लागत को देखते हुए गेहूं की खरीद पर 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियों ने भी पर्याप्त मात्रा में गेहूं की खरीद नहीं की है, जिससे किसानों को उत्पादन की कमी तथा फसल की कम खरीद की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। सरकारी नीतियों का फायदा उठाकर निजी व्यापारी व पूंजीपति कंपनियां अनाज की मुनाफाखोरी में लगे हैं। उन्होंने कहा कि पलवल की चीनी मिल भ्रष्टाचार का अड्डा बनी हुई है। मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये हड़प लिए गए हैं। बार-बार मिल बंद होने से किसानों का गन्ना सूख रहा है।

मनरेगा घोटाले के आरोपियों को मिले सख्त सजा

किसान नेताओं ने कहा कि मनरेगा के तहत गांवों में हुए कार्यों में अधिकारियों और कर्मचारियों ने करोड़ों का गबन किया है। मुकदमे दर्ज होने के बावजूद भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। मुख्य आरोपी एसडीओ, जेई, अकाउंटेंट व सरपंचों के नाम मुकदमों में नहीं दिए गए हैं। मुकदमों में गबन की धनराशि को भी नहीं दिखाया गया है। उन्होंने मांग कि है कि घोटाले करने वाले अधिकारी, कर्मचारी, सरपंच और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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