विश्व एड्स दिवस: जिंदादिली से दी बीमारी को मात, पढ़ें ऐसे संक्रमितों की कहानी.. जिन्होंने हिम्मत नहीं हारी


एचआईवी एड्स

एचआईवी एड्स
– फोटो : सोशल मीडिया

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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है, जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है… यह लाइन उस हौसले को बयां करती है, जिससे हर नामुमकिन को मुमकिन बनाया जा सकता है। ऐसे ही कुछ एचआईवी पॉजिटिव हैं, जो अपनी जिंदादिली और हिम्मत से 30 से 35 वर्षों से इस लाइलाज बीमारी के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं और अपने सपनों को सच कर रहे हैं क्योंकि जीना इसी का नाम है।  
खास बात यह है कि इनमें से कोई डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा है तो कोई इंजीनियरिंग कर सफलता की गाथा लिख रहा है। साथ ही ये लोग अपने जीवन और सकारात्मक सोच से दुनिया के लाखों एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को सकारात्मक संदेश देने की कोशिश भी  कर रहे हैं। सकारात्मक सोच ने ही उन्हें संक्रमण के साथ जीने और अपने सपनों को सच करने की हिम्मत दी है। विश्व एड्स दिवस पर अमर उजाला ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कहे जाने वाले पीजीआई एआरटी सेंटर में इलाज करा रहे ऐसे कुछ पॉजिटिव मरीजों से बात की।

एचआईवी संक्रमित हूं तो क्या हुआ, मैं भी डॉक्टर बनूंगी
लुधियाना निवासी 23 वर्षीय कंचन (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उन्हें महज पांच वर्ष की उम्र में एचआईवी संक्रमित होने की जानकारी मिली थी। यह संक्रमण उन्हें अपनी मां से मिला था। कंचन ने बताया कि एक साल के बाद वह लगातार बीमार पड़ने लगीं थीं। पांच साल की हुईं तो माता-पिता ने पीजीआई में दिखाया। जांच में एचआईवी संक्रमित पाई गईं। इसके बाद इलाज शुरू हुआ। अब वह डॉक्टरी की पढ़ाई पढ़ रही हैं। सब सामान्य है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि अगर समय पर दवा लेने के साथ ही हेल्दी जीवन शैली अपनाई जाए और पोषक तत्व युक्त भोजन लिया जाए तो संक्रमण को काबू में रखा जा सकता है। अपने इसी मंत्र के बल पर मैं लगातार अपने सपनों को सच करने में सफल हो रही हूं। जल्द ही मैं डॉक्टर बनकर एचआईवी मरीजों का इलाज भी करने लगूंगी।

संक्रमित होने की जानकारी के बावजूद मंगेतर ने शादी की, आज मेरे दो स्वस्थ बच्चे हैं
मैं 35 वर्षों से एचआईवी के साथ जिंदा हूं। मेरा मानना है कि संक्रमित होने के बाद भी एक सामान्य जीवन जिया जा सकता है। बस जरूरत है सकारात्मक सोच और सूझबूझ की। यह कहना है हिमाचल निवासी 52 वर्षीय सिमरत कौर (बदला हुआ नाम )का। वह 19 साल की उम्र में ड्यूटी के दौरान संक्रमित हो गईं थीं। सिमरत हिमाचल में ही एक अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ थीं। शादी के कुछ दिनों पहले ही उन्हें पता चला कि वह एचआईवी संक्रमित हैं। उन्होंने इसकी जानकारी अपने होने वाले पति को दी। वह इसकी जानकारी होने के बावजूद सिमरत को अपना जीवनसाथी बनाने के निर्णय पर अडिग रहे। दोनों की शादी हुई और सिमरत का पीजीआई एआरटी में इलाज शुरू हुआ। सिमरत आज दो बच्चों की मां हैं और उनके दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं। 

सकारात्मक सोच और दृढ़ निश्चय ने एचआईवी पर दिलाई जीत
हां, मैं एचआईवी संक्रमित हूं लेकिन मुझे इस बात से कोई डर नहीं क्योंकि संक्रमित होने के बाद मैंने इस पर विजय प्राप्त करना सीख लिया है। यह कहना है 43 वर्षीय सौरभ (बदला हुआ नाम) का, जो एक दुर्घटना का शिकार होने के बाद संक्रमित खून चढ़ाए जाने से एचआईवी की चपेट में आ गए थे। उन्होंने कहा कि महज 21 वर्ष की उम्र में इस संक्रमण की चपेट में आने के बाद शुरुआती दौर में ऐसे लगा कि जैसे जीवन खत्म हो गया। सारे सपने चूर हो गए। सोचा था इंजीनियर बनकर माता-पिता का नाम रोशन करूंगा लेकिन इस संक्रमण से हौसला डगमगा गया। सौरभ कहते हैं पीजीआई एआरटी सेंटर में काउंसलिंग के बाद यह महसूस हुआ कि बस एक गोली प्रतिदिन खानी है और अपने जीवन को सामान्य रास्ते पर वैसे ही ले जाना है जैसे बाकी लोग ले जा रहे हैं। इस सोच के साथ मैंने नई पारी की शुरुआत की। इस बार मेरे पास दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच दोनों ही पहले से कहीं ज्यादा था। इन दोनों के बल पर मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। आज मैं एक अच्छी कंपनी में कार्यरत हूं। मेरा मानना है कि सोच और दृढ़ निश्चय के बल पर एचआईवी जैसे संक्रमण पर काबू पाना बेहद आसान हो जाता है जो मैंने कर दिखाया है।

एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति इन बातों का रखें ध्यान 
– एचआईवी पीड़ित लोग कमजोर होते हैं और उनका वजन भी कम हो जाता है। ऐसे में उनके लिए रोजाना व्यायाम करना जरूरी है ताकि मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत हो सकें। उन्हें ऐसा व्यायाम करना चाहिए जिससे उन्हें शारीरिक तनाव न होने पाए। इसके अलावा दिन में कम ये कम 8 घंटे की नींद जरूरी है क्योंकि ज्यादा आराम से शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है।
– संक्रमित व्यक्ति भावनात्मक रूप से भी कमजोर होने लगता है। ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए दोस्तों और परिवारवालों से बात करते रहना चाहिए। अकेलापन होने से वे डिप्रेशन यानी अवसाद का शिकार हो सकते हैं।
– एचआईवी पीड़ित की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। किसी तरह का नशा खतरनाक हो सकता है। शराब या ड्रग्स लेने से उपचार में बाधा आ सकती है और व्यक्ति को चक्कर आने व बेहोशी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा सिगरेट पीने वाले लोगों दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बना रहता है।
– नियमित रूप से चेकअप कराने जाएं। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें क्योंकि अपने आप किसी दवा के सेवन से साइड इफेक्ट का खतरा हो सकता है।
– रोग प्रतिरोध क्षमता कमजोर होने की वजह से संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में स्वच्छता बनाए रखें। बार-बार हाथ धोएं और बीमार लोगों से दूरी बनाएं। 
(जैसा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की सीनियर मेडिकल रविंदर कौर ने बताया)

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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है, जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है… यह लाइन उस हौसले को बयां करती है, जिससे हर नामुमकिन को मुमकिन बनाया जा सकता है। ऐसे ही कुछ एचआईवी पॉजिटिव हैं, जो अपनी जिंदादिली और हिम्मत से 30 से 35 वर्षों से इस लाइलाज बीमारी के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं और अपने सपनों को सच कर रहे हैं क्योंकि जीना इसी का नाम है।  

खास बात यह है कि इनमें से कोई डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा है तो कोई इंजीनियरिंग कर सफलता की गाथा लिख रहा है। साथ ही ये लोग अपने जीवन और सकारात्मक सोच से दुनिया के लाखों एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को सकारात्मक संदेश देने की कोशिश भी  कर रहे हैं। सकारात्मक सोच ने ही उन्हें संक्रमण के साथ जीने और अपने सपनों को सच करने की हिम्मत दी है। विश्व एड्स दिवस पर अमर उजाला ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कहे जाने वाले पीजीआई एआरटी सेंटर में इलाज करा रहे ऐसे कुछ पॉजिटिव मरीजों से बात की।

एचआईवी संक्रमित हूं तो क्या हुआ, मैं भी डॉक्टर बनूंगी

लुधियाना निवासी 23 वर्षीय कंचन (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उन्हें महज पांच वर्ष की उम्र में एचआईवी संक्रमित होने की जानकारी मिली थी। यह संक्रमण उन्हें अपनी मां से मिला था। कंचन ने बताया कि एक साल के बाद वह लगातार बीमार पड़ने लगीं थीं। पांच साल की हुईं तो माता-पिता ने पीजीआई में दिखाया। जांच में एचआईवी संक्रमित पाई गईं। इसके बाद इलाज शुरू हुआ। अब वह डॉक्टरी की पढ़ाई पढ़ रही हैं। सब सामान्य है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि अगर समय पर दवा लेने के साथ ही हेल्दी जीवन शैली अपनाई जाए और पोषक तत्व युक्त भोजन लिया जाए तो संक्रमण को काबू में रखा जा सकता है। अपने इसी मंत्र के बल पर मैं लगातार अपने सपनों को सच करने में सफल हो रही हूं। जल्द ही मैं डॉक्टर बनकर एचआईवी मरीजों का इलाज भी करने लगूंगी।

संक्रमित होने की जानकारी के बावजूद मंगेतर ने शादी की, आज मेरे दो स्वस्थ बच्चे हैं

मैं 35 वर्षों से एचआईवी के साथ जिंदा हूं। मेरा मानना है कि संक्रमित होने के बाद भी एक सामान्य जीवन जिया जा सकता है। बस जरूरत है सकारात्मक सोच और सूझबूझ की। यह कहना है हिमाचल निवासी 52 वर्षीय सिमरत कौर (बदला हुआ नाम )का। वह 19 साल की उम्र में ड्यूटी के दौरान संक्रमित हो गईं थीं। सिमरत हिमाचल में ही एक अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ थीं। शादी के कुछ दिनों पहले ही उन्हें पता चला कि वह एचआईवी संक्रमित हैं। उन्होंने इसकी जानकारी अपने होने वाले पति को दी। वह इसकी जानकारी होने के बावजूद सिमरत को अपना जीवनसाथी बनाने के निर्णय पर अडिग रहे। दोनों की शादी हुई और सिमरत का पीजीआई एआरटी में इलाज शुरू हुआ। सिमरत आज दो बच्चों की मां हैं और उनके दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं। 

सकारात्मक सोच और दृढ़ निश्चय ने एचआईवी पर दिलाई जीत

हां, मैं एचआईवी संक्रमित हूं लेकिन मुझे इस बात से कोई डर नहीं क्योंकि संक्रमित होने के बाद मैंने इस पर विजय प्राप्त करना सीख लिया है। यह कहना है 43 वर्षीय सौरभ (बदला हुआ नाम) का, जो एक दुर्घटना का शिकार होने के बाद संक्रमित खून चढ़ाए जाने से एचआईवी की चपेट में आ गए थे। उन्होंने कहा कि महज 21 वर्ष की उम्र में इस संक्रमण की चपेट में आने के बाद शुरुआती दौर में ऐसे लगा कि जैसे जीवन खत्म हो गया। सारे सपने चूर हो गए। सोचा था इंजीनियर बनकर माता-पिता का नाम रोशन करूंगा लेकिन इस संक्रमण से हौसला डगमगा गया। सौरभ कहते हैं पीजीआई एआरटी सेंटर में काउंसलिंग के बाद यह महसूस हुआ कि बस एक गोली प्रतिदिन खानी है और अपने जीवन को सामान्य रास्ते पर वैसे ही ले जाना है जैसे बाकी लोग ले जा रहे हैं। इस सोच के साथ मैंने नई पारी की शुरुआत की। इस बार मेरे पास दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच दोनों ही पहले से कहीं ज्यादा था। इन दोनों के बल पर मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। आज मैं एक अच्छी कंपनी में कार्यरत हूं। मेरा मानना है कि सोच और दृढ़ निश्चय के बल पर एचआईवी जैसे संक्रमण पर काबू पाना बेहद आसान हो जाता है जो मैंने कर दिखाया है।

एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति इन बातों का रखें ध्यान 

– एचआईवी पीड़ित लोग कमजोर होते हैं और उनका वजन भी कम हो जाता है। ऐसे में उनके लिए रोजाना व्यायाम करना जरूरी है ताकि मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत हो सकें। उन्हें ऐसा व्यायाम करना चाहिए जिससे उन्हें शारीरिक तनाव न होने पाए। इसके अलावा दिन में कम ये कम 8 घंटे की नींद जरूरी है क्योंकि ज्यादा आराम से शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है।

– संक्रमित व्यक्ति भावनात्मक रूप से भी कमजोर होने लगता है। ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए दोस्तों और परिवारवालों से बात करते रहना चाहिए। अकेलापन होने से वे डिप्रेशन यानी अवसाद का शिकार हो सकते हैं।

– एचआईवी पीड़ित की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। किसी तरह का नशा खतरनाक हो सकता है। शराब या ड्रग्स लेने से उपचार में बाधा आ सकती है और व्यक्ति को चक्कर आने व बेहोशी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा सिगरेट पीने वाले लोगों दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बना रहता है।

– नियमित रूप से चेकअप कराने जाएं। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें क्योंकि अपने आप किसी दवा के सेवन से साइड इफेक्ट का खतरा हो सकता है।

– रोग प्रतिरोध क्षमता कमजोर होने की वजह से संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में स्वच्छता बनाए रखें। बार-बार हाथ धोएं और बीमार लोगों से दूरी बनाएं। 

(जैसा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की सीनियर मेडिकल रविंदर कौर ने बताया)

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Written by Haryanacircle

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