लक्ष्य बनाकर मेहनत की जाए तो कामयाबी जरूर मिलेगी : सुहानी


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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में 496 अंक लेकर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल करने वाली सुहानी का कहना है कि अगर लक्ष्य बनाकर उसे पाने के लिए मेहनत की जाए तो कामयाबी जरूर मिलेगी। लगातार स्कूल जाकर बिना कोचिंग के भी परीक्षाएं बेहतर अंकों के साथ पास की जा सकती हैं। सुहानी सोनीपत जिले में राई खंड के गांव हलालपुर स्थित लखीराम मेमोरियल पब्लिक उच्च विद्यालय की छात्रा हैं। सुहानी डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती हैं।
महाराष्ट्र के सोलापुर की रहने वाली सुहानी फिलहाल अपने माता-पिता के साथ गांव झिंझोली में रहती हैं। सुहानी की मां रेखा हलालपुर स्थित लखीराम मेमोरियल पब्लिक उच्च विद्यालय में ही लिपिक हैं। जबकि पिता शकील मकानदार दिल्ली की एक कंपनी में प्रबंधक रूप में कार्यरत हैं। सुहानी का सपना अब मेडिकल साइंस लेकर आगे बढ़ने का है, ताकि वह डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा कर सके। सुहानी कहती हैं कि कामयाबी कोई एक दिन में नहीं मिलती, इसके लिए शुरू से ही मेहनत जरूरी है। इसलिए उसने स्कूल से छुट्टियां किए बगैर अपनी पढ़ाई को जारी रखा। अपनी शंकाओं का निदान करते हुए आगे बढ़कर यह मुकाम पाया है। स्कूल में शिक्षकों से सवाल पूछने में उसने कभी शर्म महसूस नहीं की। हर विषय के लिए उसने अलग से समय निर्धारित किया और पढ़ाई की। जिसके चलते स्कूल स्टाफ व अपने अभिभावकों के सहारे आज वह इस मुकाम को हासिल कर पाई है।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में 496 अंक लेकर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल करने वाली सुहानी का कहना है कि अगर लक्ष्य बनाकर उसे पाने के लिए मेहनत की जाए तो कामयाबी जरूर मिलेगी। लगातार स्कूल जाकर बिना कोचिंग के भी परीक्षाएं बेहतर अंकों के साथ पास की जा सकती हैं। सुहानी सोनीपत जिले में राई खंड के गांव हलालपुर स्थित लखीराम मेमोरियल पब्लिक उच्च विद्यालय की छात्रा हैं। सुहानी डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती हैं।

महाराष्ट्र के सोलापुर की रहने वाली सुहानी फिलहाल अपने माता-पिता के साथ गांव झिंझोली में रहती हैं। सुहानी की मां रेखा हलालपुर स्थित लखीराम मेमोरियल पब्लिक उच्च विद्यालय में ही लिपिक हैं। जबकि पिता शकील मकानदार दिल्ली की एक कंपनी में प्रबंधक रूप में कार्यरत हैं। सुहानी का सपना अब मेडिकल साइंस लेकर आगे बढ़ने का है, ताकि वह डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा कर सके। सुहानी कहती हैं कि कामयाबी कोई एक दिन में नहीं मिलती, इसके लिए शुरू से ही मेहनत जरूरी है। इसलिए उसने स्कूल से छुट्टियां किए बगैर अपनी पढ़ाई को जारी रखा। अपनी शंकाओं का निदान करते हुए आगे बढ़कर यह मुकाम पाया है। स्कूल में शिक्षकों से सवाल पूछने में उसने कभी शर्म महसूस नहीं की। हर विषय के लिए उसने अलग से समय निर्धारित किया और पढ़ाई की। जिसके चलते स्कूल स्टाफ व अपने अभिभावकों के सहारे आज वह इस मुकाम को हासिल कर पाई है।

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Written by Haryanacircle

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