राहत भी आफत भी : साढ़े तीन माह से खत्म कई दवाओं की खेप पहुंची, 10 तरह की दवाओं का अभी भी टोटा


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सोनीपत। नागरिक अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार कराने के लिए आने वाले मरीजों के लिए थोड़ी राहत की खबर है। साढ़े तीन माह बाद रोहतक वेयर हाउस से यहां 10 तरह की दवाएं पहुंची हैं। हालांकि अभी भी कई दवाओं का टोटा है। नागरिक अस्पताल में तीन माह से एंटी रैबिज इंजेक्शन नहीं है। वहीं 10 तरह की अन्य दवाओं की कमी के कारण मरीजों का दर्द बढ़ रहा है। डिस्पेंसरी में पूरी दवाएं नहीं मिलने से मरीजों को मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
बारिश के बाद नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल में रोजाना 1600 की ओपीडी हो रही है। चर्म रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। टीम बुधवार सुबह 11 बजे नागरिक अस्पताल पहुंची तो वहां पर फार्मेसी अधिकारियों की तरफ से वेयरहाउस र्से आइं दवाओं का वितरण किया जा रहा था। अस्पताल में मंगलवार शाम को ही करीब 10 तरह की दवाएं पहुंची है। जिससे मरीजों को कुछ हद तक राहत मिली है। इसके बावजूद अस्पताल में अभी भी कई तरह की दवाओं का टोटा बना हुआ है। जिससे मरीजों का दर्द पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है। सरकारी अस्पतालों में दवाओं के संकट की वजह से मरीजों व उनके तीमारदारों को मेडिकल स्टोरों से दवा खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
अमर उजाला समाचार पत्र में दवाओं की किल्लत के मुद्दे पर 23 अगस्त को समाचार प्रकाशित किया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दवाओं की डिमांड भेजी गई थी। मंगलवार को रोहतक वेयरहाउस से सोनीपत कई दवाओं की खेप पहुंची। इसमें 10 मुख्य दवाओं के साथ कुछ अन्य दवाएं भी शामिल हैं। बुधवार को फार्मेसी अधिकारियों की देखरेख में दवाओं का वितरण किया गया। डिस्पेंसरी के बाहर दवा लेने वाले मरीजों की संख्या भी कम थी। हालांकि अभी भी एलर्जी व अन्य तरह की दवाएं न होने की वजह से मरीजों का दर्द बढ़ रहा है।
इंसेट
अस्पताल में रोहतक से ये दवाएं पहुंचीं
अस्पताल में मरीजों के बेहतर उपचार के लिए एंटीबायोटिक समेत 10 तरह की दवाएं पहुंची हैं। इन दवाओं की करीब साढ़े तीन माह से किल्लत थी। अस्पताल की डिस्पेंसरी में लंबे इंतजार के बाद दवाओं की खेप पहुंचने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। बुखार के साथ गले में होने वाली खराश निवारण के लिए एजिथ्रो सिरप, कैप्सूल अमोक्सी, बच्चों की खांसी के लिए सिट्राजिन सिरप, पीसीएम सिरप, कैल्शियम सिरप, एंटी एलर्जिक, कफ सिरप, हार्ट के लिए खून पतला करने वाले एस्प्रिन, दर्द निवारक के लिए ब्रूफेन समेत कई अन्य दवाओं की खेप आई है।
इंसेट
इन दवाओं का अब भी है टोटा
अस्पताल में सिफेक्सिम टेबलेट, ओफ्लोक्स, डिक्लो, डाइक्लोपारा, अमोक्सी क्लेव, पर्मेथ्रिन लोशन, मेट्रोजिल, क्लोट्रीमाजोल सहित कई दवाओं का टोटा है। ऐसे में मरीजों को पैसे खर्च करके बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। दवाओं की कमी साढ़े तीन माह से चल रही है, साथ ही तीन माह से अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन भी नहीं आ रहे हैं। 4 जून को एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गए थे।
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मुझे काफी समय से एलर्जी है। कई बार अस्पताल में एलर्जी की दवा लेने आ चुका हूं, लेकिन दवाएं नहीं मिलने के कारण परेशानी हो रही है। एलर्जी के इलाज के लिए मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं मिल रही हैं। सरकार की ओर से जल्द दवाओं की आपूर्ति की जानी चाहिए। – सुरेश निवासी मोहन नगर

मुझे कई दिन से पैरों में दर्द रहता है। अस्पताल में आया तो चिकित्सक ने ओपीडी पर्ची पर कुछ दवाएं लिख कर दी। डिस्पेंसरी में दर्द निवारक दवाई न मिलने से परेशानी हो रही है।- राकेश निवासी ब्रह्म नगर

बेटी के पैर में कुत्ते ने काट लिया था। अस्पताल में बेटी को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आया तो इंजेक्शन नहीं मिला। यहां आकर पता चला कि 4 जून से अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। अब मेडिकल स्टोर पर महंगे दामों पर इंजेक्शन खरीदकर लगवाने पहुंचा।- अजय प्रताप निवासी बहालगढ़
वर्जन
अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में 10 तरह की दवाएं आई हैं। मरीजों को इन दवाओं का वितरण शुरू कर दिया है। अन्य दवाएं एक सप्ताह के अंदर आने की संभावना है। दवाओं का संकट साढ़े तीन माह से बना हुआ था। दवाएं पूरी मिलने के बाद मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदने से छुटकारा मिल जाएगा।-डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन

सोनीपत। नागरिक अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार कराने के लिए आने वाले मरीजों के लिए थोड़ी राहत की खबर है। साढ़े तीन माह बाद रोहतक वेयर हाउस से यहां 10 तरह की दवाएं पहुंची हैं। हालांकि अभी भी कई दवाओं का टोटा है। नागरिक अस्पताल में तीन माह से एंटी रैबिज इंजेक्शन नहीं है। वहीं 10 तरह की अन्य दवाओं की कमी के कारण मरीजों का दर्द बढ़ रहा है। डिस्पेंसरी में पूरी दवाएं नहीं मिलने से मरीजों को मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।

बारिश के बाद नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल में रोजाना 1600 की ओपीडी हो रही है। चर्म रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। टीम बुधवार सुबह 11 बजे नागरिक अस्पताल पहुंची तो वहां पर फार्मेसी अधिकारियों की तरफ से वेयरहाउस र्से आइं दवाओं का वितरण किया जा रहा था। अस्पताल में मंगलवार शाम को ही करीब 10 तरह की दवाएं पहुंची है। जिससे मरीजों को कुछ हद तक राहत मिली है। इसके बावजूद अस्पताल में अभी भी कई तरह की दवाओं का टोटा बना हुआ है। जिससे मरीजों का दर्द पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है। सरकारी अस्पतालों में दवाओं के संकट की वजह से मरीजों व उनके तीमारदारों को मेडिकल स्टोरों से दवा खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।

अमर उजाला समाचार पत्र में दवाओं की किल्लत के मुद्दे पर 23 अगस्त को समाचार प्रकाशित किया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दवाओं की डिमांड भेजी गई थी। मंगलवार को रोहतक वेयरहाउस से सोनीपत कई दवाओं की खेप पहुंची। इसमें 10 मुख्य दवाओं के साथ कुछ अन्य दवाएं भी शामिल हैं। बुधवार को फार्मेसी अधिकारियों की देखरेख में दवाओं का वितरण किया गया। डिस्पेंसरी के बाहर दवा लेने वाले मरीजों की संख्या भी कम थी। हालांकि अभी भी एलर्जी व अन्य तरह की दवाएं न होने की वजह से मरीजों का दर्द बढ़ रहा है।

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अस्पताल में रोहतक से ये दवाएं पहुंचीं

अस्पताल में मरीजों के बेहतर उपचार के लिए एंटीबायोटिक समेत 10 तरह की दवाएं पहुंची हैं। इन दवाओं की करीब साढ़े तीन माह से किल्लत थी। अस्पताल की डिस्पेंसरी में लंबे इंतजार के बाद दवाओं की खेप पहुंचने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। बुखार के साथ गले में होने वाली खराश निवारण के लिए एजिथ्रो सिरप, कैप्सूल अमोक्सी, बच्चों की खांसी के लिए सिट्राजिन सिरप, पीसीएम सिरप, कैल्शियम सिरप, एंटी एलर्जिक, कफ सिरप, हार्ट के लिए खून पतला करने वाले एस्प्रिन, दर्द निवारक के लिए ब्रूफेन समेत कई अन्य दवाओं की खेप आई है।

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इन दवाओं का अब भी है टोटा

अस्पताल में सिफेक्सिम टेबलेट, ओफ्लोक्स, डिक्लो, डाइक्लोपारा, अमोक्सी क्लेव, पर्मेथ्रिन लोशन, मेट्रोजिल, क्लोट्रीमाजोल सहित कई दवाओं का टोटा है। ऐसे में मरीजों को पैसे खर्च करके बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। दवाओं की कमी साढ़े तीन माह से चल रही है, साथ ही तीन माह से अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन भी नहीं आ रहे हैं। 4 जून को एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गए थे।

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मुझे काफी समय से एलर्जी है। कई बार अस्पताल में एलर्जी की दवा लेने आ चुका हूं, लेकिन दवाएं नहीं मिलने के कारण परेशानी हो रही है। एलर्जी के इलाज के लिए मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं मिल रही हैं। सरकार की ओर से जल्द दवाओं की आपूर्ति की जानी चाहिए। – सुरेश निवासी मोहन नगर



मुझे कई दिन से पैरों में दर्द रहता है। अस्पताल में आया तो चिकित्सक ने ओपीडी पर्ची पर कुछ दवाएं लिख कर दी। डिस्पेंसरी में दर्द निवारक दवाई न मिलने से परेशानी हो रही है।- राकेश निवासी ब्रह्म नगर



बेटी के पैर में कुत्ते ने काट लिया था। अस्पताल में बेटी को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आया तो इंजेक्शन नहीं मिला। यहां आकर पता चला कि 4 जून से अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। अब मेडिकल स्टोर पर महंगे दामों पर इंजेक्शन खरीदकर लगवाने पहुंचा।- अजय प्रताप निवासी बहालगढ़

वर्जन

अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में 10 तरह की दवाएं आई हैं। मरीजों को इन दवाओं का वितरण शुरू कर दिया है। अन्य दवाएं एक सप्ताह के अंदर आने की संभावना है। दवाओं का संकट साढ़े तीन माह से बना हुआ था। दवाएं पूरी मिलने के बाद मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदने से छुटकारा मिल जाएगा।-डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन

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Written by Haryanacircle

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