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रतिया में 32 पशुओं को किया गया चिह्नित, दो का इलाज शुरू


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रतिया/फतेहाबाद। फतेहाबाद में पशुपालन विभाग लंपी बीमारी की आशंका में 32 पशुओं को चिह्नित कर चुका है। रतिया में दो गोवंश का इलाज भी प्रारंभ हो गया है।
फतेहाबाद जिले में पशुपालन विभाग द्वारा रतिया में दो और गायों को लंपी स्कीन बीमारी के लक्षण मिलने पर चिह्नित किया गया है। गांव धारसूल में एक गाय को चिह्नित करके उसका इलाज शुरू किया गया। रतिया के प्रभारी पशु चिकित्सक डॉ. सुनील बिश्नोई ने बताया कि रतिया क्षेत्र में लंपी स्किन रोग से आशंकित गोवंशों को चिह्नित किया जा रहा है। अब तक 32 पशु चिह्नित किए जा चुके हैं, जिनका इलाज चल रहा है।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को रतिया के आसपास के गांव तथा रतिया में स्थित सभी गोशाला व नंदीशाला के पशुओं में लंपी स्किन रोग के आशंकित संक्रमण का पता लगाने के लिए शुक्रवार को दूसरे दिन उपनिदेशक डॉ.सुखविंदर सिंह तथा उप मंडल अधिकारी डॉक्टर रामफल कुंडू के निर्देशन में जिला रोग निदान प्रयोगशाला की टीम के मुखिया डॉ. सुमित चौधरी तथा पशु चिकित्सालय की टीम ने क्षेत्र के कई गांव का दौरा किया। अब तक असंगठित पशुओं के कुल 14 खून तथा नाक से नमूने लिए, जिनको जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजिज भोपाल भेजा जाएगा।
मृत्य दर बेहद कम, पीड़ित पशु को दूसरे पशुओं से अलग रखें: डॉ.सिंह
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ.सुखविंद्र सिंह का कहना है कि रतिया में 32 और गांव धारसूल में एक केस लंपी स्किन डिजिज का आया है। इस रोग में मृत्यु दर बेहद कम है, इसलिए पशुपालकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। जब तक पशु ठीक न हों, तब तक उसे दूसरे पशुओं से अलग रख दें। यह रोग ज्यादा मच्छर-मक्खियों के एकत्रित होने से पशुओं को लग जाता है।

रतिया/फतेहाबाद। फतेहाबाद में पशुपालन विभाग लंपी बीमारी की आशंका में 32 पशुओं को चिह्नित कर चुका है। रतिया में दो गोवंश का इलाज भी प्रारंभ हो गया है।

फतेहाबाद जिले में पशुपालन विभाग द्वारा रतिया में दो और गायों को लंपी स्कीन बीमारी के लक्षण मिलने पर चिह्नित किया गया है। गांव धारसूल में एक गाय को चिह्नित करके उसका इलाज शुरू किया गया। रतिया के प्रभारी पशु चिकित्सक डॉ. सुनील बिश्नोई ने बताया कि रतिया क्षेत्र में लंपी स्किन रोग से आशंकित गोवंशों को चिह्नित किया जा रहा है। अब तक 32 पशु चिह्नित किए जा चुके हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

उन्होंने बताया कि शुक्रवार को रतिया के आसपास के गांव तथा रतिया में स्थित सभी गोशाला व नंदीशाला के पशुओं में लंपी स्किन रोग के आशंकित संक्रमण का पता लगाने के लिए शुक्रवार को दूसरे दिन उपनिदेशक डॉ.सुखविंदर सिंह तथा उप मंडल अधिकारी डॉक्टर रामफल कुंडू के निर्देशन में जिला रोग निदान प्रयोगशाला की टीम के मुखिया डॉ. सुमित चौधरी तथा पशु चिकित्सालय की टीम ने क्षेत्र के कई गांव का दौरा किया। अब तक असंगठित पशुओं के कुल 14 खून तथा नाक से नमूने लिए, जिनको जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजिज भोपाल भेजा जाएगा।

मृत्य दर बेहद कम, पीड़ित पशु को दूसरे पशुओं से अलग रखें: डॉ.सिंह

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ.सुखविंद्र सिंह का कहना है कि रतिया में 32 और गांव धारसूल में एक केस लंपी स्किन डिजिज का आया है। इस रोग में मृत्यु दर बेहद कम है, इसलिए पशुपालकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। जब तक पशु ठीक न हों, तब तक उसे दूसरे पशुओं से अलग रख दें। यह रोग ज्यादा मच्छर-मक्खियों के एकत्रित होने से पशुओं को लग जाता है।

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