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‘यही भोजन घर में क्या बच्चों को खिलाओगे’


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ढांड। ढांड के सरकारी कार्यालयों का डीसी डॉ. संगीता तेतरवाल ने मंगलवार को औचक निरीक्षण किया। इससे पहले आंगनबाड़ी केंद्र 102 व 106 के दौरान महज 15 बच्चे मिले। इन्हें परोसे जाने वाले भोजन की जांच की गई तो उसमें कई कमियां पाई गई। इसके लिए डीसी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर यही भोजन आपके घर में बना हो तो क्या आप अपने बच्चों को खिलाएंगी? जवाब में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने कहा कि मैडम जी हमारे पास जो गेहूं और चावल आता है, उसी हिसाब से बना देते हैं।
बच्चों से बोर्ड पर लिखे चार्ट से डीसी ने जो कुछ पूछा, उन्होंने सटीक जवाब दिया। इसके लिए उन्होंने बच्चों की पीठ थपथपाई। इसके बाद डीसी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया और डाक्टर के बारे में पूछा। वह किसी कार्य से कोर्ट गए हुए थे। डिलीवरी कौन करता है, कितनी होती है? के जवाब में मौके पर मौजूद एएनएम ने बताया कि एएनएम कराती हैं। महीने में सात या आठ सामान्य डिलीवरी की जाती है। गंभीर स्थिति में केस कैथल रेफर किया जाता है।
जच्चा-बच्चा वार्ड में दाखिल दो महिलाओं से डीसी ने स्वयं बात की और इलाज के बारे में पूछा। मरीजों को दी जाने वाली दवाइयों के स्टाक रजिस्टर की भी जांच की गई। इसके बाद पीडीएस स्कीम के तहत गरीबों को वितरित किए जाने वाले सरकारी राशन की दुकान का भी निरीक्षण किया। जहां स्टाक के बारे में पूछे जाने पर केवल 20 किलो चीनी का ही स्टाक पाया गया।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कार्यालय में हाजिरी रजिस्टर चेक करने पर पाया कि किसी ने हाजिरी नहीं लगाई थी। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों को हाजिरी लगाने का मौका दिए जाने के बाद एक इंस्पेक्टर गैर हाजिर मिला। हाजिरी रजिस्टर में स्वयं उपायुक्त ने उसे गैर हाजिर दिखाया और फटकार लगाई कि भविष्य में फील्ड में जाने से पहले मूमेंट रजिस्टर में दर्ज करने के बाद ही कार्यालय से बाहर निकलें। इस अवसर पर उनके साथ डीडीपीओ कंवर दमन सिंह, डीआईपीआरओ धर्मबीर सिंह, बीडीपीओ ढांड श्याम लाल शर्मा भी मौजूद थे।

ढांड। ढांड के सरकारी कार्यालयों का डीसी डॉ. संगीता तेतरवाल ने मंगलवार को औचक निरीक्षण किया। इससे पहले आंगनबाड़ी केंद्र 102 व 106 के दौरान महज 15 बच्चे मिले। इन्हें परोसे जाने वाले भोजन की जांच की गई तो उसमें कई कमियां पाई गई। इसके लिए डीसी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर यही भोजन आपके घर में बना हो तो क्या आप अपने बच्चों को खिलाएंगी? जवाब में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने कहा कि मैडम जी हमारे पास जो गेहूं और चावल आता है, उसी हिसाब से बना देते हैं।

बच्चों से बोर्ड पर लिखे चार्ट से डीसी ने जो कुछ पूछा, उन्होंने सटीक जवाब दिया। इसके लिए उन्होंने बच्चों की पीठ थपथपाई। इसके बाद डीसी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया और डाक्टर के बारे में पूछा। वह किसी कार्य से कोर्ट गए हुए थे। डिलीवरी कौन करता है, कितनी होती है? के जवाब में मौके पर मौजूद एएनएम ने बताया कि एएनएम कराती हैं। महीने में सात या आठ सामान्य डिलीवरी की जाती है। गंभीर स्थिति में केस कैथल रेफर किया जाता है।

जच्चा-बच्चा वार्ड में दाखिल दो महिलाओं से डीसी ने स्वयं बात की और इलाज के बारे में पूछा। मरीजों को दी जाने वाली दवाइयों के स्टाक रजिस्टर की भी जांच की गई। इसके बाद पीडीएस स्कीम के तहत गरीबों को वितरित किए जाने वाले सरकारी राशन की दुकान का भी निरीक्षण किया। जहां स्टाक के बारे में पूछे जाने पर केवल 20 किलो चीनी का ही स्टाक पाया गया।

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कार्यालय में हाजिरी रजिस्टर चेक करने पर पाया कि किसी ने हाजिरी नहीं लगाई थी। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों को हाजिरी लगाने का मौका दिए जाने के बाद एक इंस्पेक्टर गैर हाजिर मिला। हाजिरी रजिस्टर में स्वयं उपायुक्त ने उसे गैर हाजिर दिखाया और फटकार लगाई कि भविष्य में फील्ड में जाने से पहले मूमेंट रजिस्टर में दर्ज करने के बाद ही कार्यालय से बाहर निकलें। इस अवसर पर उनके साथ डीडीपीओ कंवर दमन सिंह, डीआईपीआरओ धर्मबीर सिंह, बीडीपीओ ढांड श्याम लाल शर्मा भी मौजूद थे।

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