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महंगी बीज और जल्दी तैयार फसल…आखिर क्यों नॉर्मल गोभी से बेहतर है हाइब्रिड गोभी, यहां जानिए पूरे मुनाफे का गणित Haryana News & Updates

महंगी बीज और जल्दी तैयार फसल…आखिर क्यों नॉर्मल गोभी से बेहतर है हाइब्रिड गोभी, यहां जानिए पूरे मुनाफे का गणित Haryana News & Updates

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फरीदाबाद: फरीदाबाद में गोभी की खेती हर साल किसानों को अच्छा मुनाफा देती है, लेकिन गोभी की दो किस्में नॉर्मल (देसी) और हाइब्रिड इनके बीच कई तरह के फर्क होते हैं. किसान अपनी ज़रूरत लागत और बाज़ार भाव देखकर तय करते हैं कि किस किस्म की खेती करनी है. सबसे बड़ा फर्क इन दोनों में बीज की कीमत और तैयार होने के समय का है. यही वजह है कि आजकल ज़्यादातर किसान हाइब्रिड की तरफ़ ज्यादा झुकते दिख रहे हैं, क्योंकि इसकी मांग मार्केट में हमेशा बनी रहती है.

हाइब्रिड गोभी का बीज काफी महंगा

किसान बसंत ने Local18 से बातचीत में बताया कि हाइब्रिड गोभी का बीज काफी महंगा मिलता है, लेकिन इसकी पैदावार और क्वालिटी देखकर किसान इसे लगाना पसंद करते हैं. बसंत के मुताबिक हाइब्रिड का बीज मेड पर सीधे डाल दिया जाता है और यह जमीन से सीधे उग आता है. इसका फूल सफेद और चमकदार निकलता है जो दिखने में आकर्षक लगता है.

क्या है हाइब्रिड गोभी की खूबियां

किसान कहते हैं कि बाजार में लोग चमकदार गोभी ही ज्यादा पसंद करते हैं. इसी कारण हाइब्रिड गोभी जल्दी बिक जाती है और अच्छी कीमत भी दिलाती है. हाइब्रिड गोभी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका फूल करीब ढाई महीने में निकलना शुरू हो जाता है यानी फसल जल्दी तैयार हो जाती है.

क्या पड़ती है लागत

बसंत बताते हैं कि हाइब्रिड बीज की कीमत 35 हजार से 55 हजार रुपये किलो तक मिलती है. अगर अगले महीने बीज लिया जाए तो इसकी कीमत 90 हजार से लेकर 1 लाख रुपये किलो तक पहुंच जाती है यानी बीज काफी महंगा है, लेकिन किसान कहते हैं कि दाम ज्यादा होने के बावजूद उसकी पैदावार और बिक्री अच्छे पैसे दिला देती है. बल्लभगढ़ में हाइब्रिड का बीज आसानी से मिल भी जाता है.

नॉर्मल गोभी का बीज सस्ता लेकिन मेहनत ज्यादा

अब बात करते हैं नॉर्मल या देसी गोभी की. बसंत बताते हैं कि नॉर्मल गोभी का बीज काफी सस्ता होता है. इसकी कीमत 2 हजार से 3 हजार रुपये किलो तक ही होती है. नॉर्मल गोभी में सबसे बड़ी मेहनत पौधा तैयार करने में लगती है. पहले बीज को क्यारी में डालकर नर्सरी तैयार करनी पड़ती है. इसमें 1 महीने से लेकर सवा महीने तक लग जाता है। जब पौधे तैयार हो जाते हैं तब मेड बनाकर उन्हें खेत में ट्रांसप्लांट किया जाता है. यानी नॉर्मल गोभी में मेहनत और समय दोनों ज्यादा लगते हैं.

हाइब्रिड गोभी में झंझट नहीं होता है

वहीं हाइब्रिड गोभी में न तो नर्सरी बनाने का झंझट होता है और न ही ज्यादा पौधे खराब होते हैं. बस बीज मेड पर डालना है, और वहां से पौधे अपने आप निकल आते हैं. इसी वजह से हाइब्रिड में बीज की खराबी बहुत कम होती है. किसान कहते हैं कि नॉर्मल और हाइब्रिड गोभी के स्वाद में ज्यादा फर्क नहीं होता दोनों का स्वाद लगभग एक जैसा ही होता है. लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है कि देसी गोभी मंडी में अच्छे दाम पर बिक जाती है और कभी घाटे में भी चली जाती है.

हाइब्रिड गोभी की डिमांड ज्यादा

वहीं हाइब्रिड गोभी की डिमांड हमेशा बनी रहती है. नॉर्मल गोभी की जो पुरानी किस्में चल रही हैं उसमें डॉक्टर और विग्रो जैसी वैरायटी शामिल हैं. बसंत के अनुसार दोनों किस्मों का अपना-अपना फायदा है लेकिन समय, मेहनत और बाजार की मांग को देखते हुए किसान तेजी से हाइब्रिड गोभी की तरफ़ जा रहे हैं. फसल जल्दी तैयार हो जाती है, ज्यादा नहीं मरती, चमक अच्छी होती है और दाम भी बढ़िया मिलते हैं यही कारण है कि किसान आजकल हाइब्रिड गोभी को पहली पसंद मानते हैं.

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