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भूजल संकट : 455 में से 444 गांव रेड जोन में


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अजय जौली
कुरुक्षेत्र। भूजल स्तर लगातार घटता जा रहा है। कुरुक्षेत्र की स्थिति पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा खराब है। हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण (एचडब्ल्यूआरए) की रिपोर्ट की अनुसार यहां के 455 गांव में से 444 रेड जोन में शामिल हैं, जोकि बहुत ही ज्यादा गंभीर स्थिति है। पहले जहां भूजल 30 मीटर तक आसानी से मिल जाता है, लेकिन अब यह कई गांव में 230 मीटर तक नीचे जा चुका है। जिले में सबसे ज्यादा खराब स्थिति शाहाबाद और उसके बाद लाडवा और पिहोवा की है। इन क्षेत्रों भूजल स्तर एक से डेढ़ से मीटर की दर से प्रति वर्ष गिर रहा है।
हाल ही में अटल भूजल योजना के तहत टीम की ओर से इन तीनों खंडों के 189 गांव का सर्वे किया गया है, जिसमें आंकड़े चौंकाने वाले आए हैं। सर्वे के अनुसार शाहाबाद में मौजूदा जलस्तर 150 से 230, पिहोवा में 150 से 180 और लाडवा में 80 से 130 मीटर आंका गया है। भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन के निर्देशन में टीम ने शाहाबाद के 73, पिहोवा के 65 और लाडवा के 51 गांव का सर्वे किया था। सर्वे रिपोर्ट में आया कि इन तीनों खंडों में पिछले 10 साल में भूजल स्तर करीब 15 मीटर नीचे चला गया है।
वहीं हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण की रिपोर्ट की अनुसार थानेसर के 77 गांव में से 76, शाहाबाद के 90 में से 90, पिहोवा के 77 में से 77, लाडवा के 55 में से 45, बाबैन के 48 में से 48, इस्माईलाबाद के 54 में से 54 और पिपली खंड के भी 54 में से 54 गांव गंभीर रूप से भूजल संकटग्रस्त हैं। वहीं थानेसर के एक और लाडवा के नौ गांव मध्यम भूजल दबाव में हैं और लाडवा का एक गांव संभावित भूजल संकटग्रस्त है। संवाद
भूजल स्तर गिरने के पीछे के मुख्य कारण
जिले में गेहूं, धान और गन्ने की खेती अधिक होती हैं। इन फसलों की सिंचाई में पानी अधिक लगता है। नहर के पानी की कमी के कारण अधिकांश कृषि गतिविधियां भूजल पर निर्भर हैं। डॉ. नवीन नैन ने बताया कि इस जमीन की रिचार्ज कैपेसिटी भी ठीक नहीं। यहां ज्यादातर भूमि में चिकनी मिट्टी है जो पानी को रिचार्ज नहीं होने देती। हमें पानी के इस्तेमाल में 50 प्रतिशत की कमी लानी होगी। तालाबों की सफाई करनी होगी, ताकि उनमें बारिश पानी इकट्ठा कर इस्तेमाल किया जा सके।
जून के बाद योजना पर होगा अमल : डॉ. नैन
अटल भूजल योजना से भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैन ने कहा कि उनकी टीम ने तीन खंडों के 189 गांव का सर्वे किया है, जिसमें स्थिति काफी खराब पाई गई है। सर्वे के बाद सिक्योरिटी प्लान तैयार किया गया है, जिसे जून के बाद इंप्लीमेंट करना शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 189 गांव में पीजोमीटर लगेंगे, जोकि प्रतिदिन घटने व बढ़ने वाले जलस्तर को दर्शाएंगे। इसके अलावा रेन गेज इंस्टॉल करेंगे। बरसात का पानी सीधे उसमें जाएगा, कितनी बारिश हुई यह गेज बताएगा। वाटर लेवल इंडिकेटर इंस्टॉल करेंगे। 1890 वाटर फ्लो मीटर लगाएंगे, जोकि यह बताएंगे कि एक फसल को पकाने के लिए कितने पानी का इस्तेमाल किया है। इस योजना से जलस्तर ऊपर लाने का प्रयास किया जाएगा।

तिरुपति बालाजी मंदिर के पास टंकी के पाइप से बहता पानी।  संवाद

तिरुपति बालाजी मंदिर के पास टंकी के पाइप से बहता पानी। संवाद– फोटो : Kurukshetra

अजय जौली

कुरुक्षेत्र। भूजल स्तर लगातार घटता जा रहा है। कुरुक्षेत्र की स्थिति पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा खराब है। हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण (एचडब्ल्यूआरए) की रिपोर्ट की अनुसार यहां के 455 गांव में से 444 रेड जोन में शामिल हैं, जोकि बहुत ही ज्यादा गंभीर स्थिति है। पहले जहां भूजल 30 मीटर तक आसानी से मिल जाता है, लेकिन अब यह कई गांव में 230 मीटर तक नीचे जा चुका है। जिले में सबसे ज्यादा खराब स्थिति शाहाबाद और उसके बाद लाडवा और पिहोवा की है। इन क्षेत्रों भूजल स्तर एक से डेढ़ से मीटर की दर से प्रति वर्ष गिर रहा है।

हाल ही में अटल भूजल योजना के तहत टीम की ओर से इन तीनों खंडों के 189 गांव का सर्वे किया गया है, जिसमें आंकड़े चौंकाने वाले आए हैं। सर्वे के अनुसार शाहाबाद में मौजूदा जलस्तर 150 से 230, पिहोवा में 150 से 180 और लाडवा में 80 से 130 मीटर आंका गया है। भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन के निर्देशन में टीम ने शाहाबाद के 73, पिहोवा के 65 और लाडवा के 51 गांव का सर्वे किया था। सर्वे रिपोर्ट में आया कि इन तीनों खंडों में पिछले 10 साल में भूजल स्तर करीब 15 मीटर नीचे चला गया है।

वहीं हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण की रिपोर्ट की अनुसार थानेसर के 77 गांव में से 76, शाहाबाद के 90 में से 90, पिहोवा के 77 में से 77, लाडवा के 55 में से 45, बाबैन के 48 में से 48, इस्माईलाबाद के 54 में से 54 और पिपली खंड के भी 54 में से 54 गांव गंभीर रूप से भूजल संकटग्रस्त हैं। वहीं थानेसर के एक और लाडवा के नौ गांव मध्यम भूजल दबाव में हैं और लाडवा का एक गांव संभावित भूजल संकटग्रस्त है। संवाद

भूजल स्तर गिरने के पीछे के मुख्य कारण

जिले में गेहूं, धान और गन्ने की खेती अधिक होती हैं। इन फसलों की सिंचाई में पानी अधिक लगता है। नहर के पानी की कमी के कारण अधिकांश कृषि गतिविधियां भूजल पर निर्भर हैं। डॉ. नवीन नैन ने बताया कि इस जमीन की रिचार्ज कैपेसिटी भी ठीक नहीं। यहां ज्यादातर भूमि में चिकनी मिट्टी है जो पानी को रिचार्ज नहीं होने देती। हमें पानी के इस्तेमाल में 50 प्रतिशत की कमी लानी होगी। तालाबों की सफाई करनी होगी, ताकि उनमें बारिश पानी इकट्ठा कर इस्तेमाल किया जा सके।

जून के बाद योजना पर होगा अमल : डॉ. नैन

अटल भूजल योजना से भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैन ने कहा कि उनकी टीम ने तीन खंडों के 189 गांव का सर्वे किया है, जिसमें स्थिति काफी खराब पाई गई है। सर्वे के बाद सिक्योरिटी प्लान तैयार किया गया है, जिसे जून के बाद इंप्लीमेंट करना शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 189 गांव में पीजोमीटर लगेंगे, जोकि प्रतिदिन घटने व बढ़ने वाले जलस्तर को दर्शाएंगे। इसके अलावा रेन गेज इंस्टॉल करेंगे। बरसात का पानी सीधे उसमें जाएगा, कितनी बारिश हुई यह गेज बताएगा। वाटर लेवल इंडिकेटर इंस्टॉल करेंगे। 1890 वाटर फ्लो मीटर लगाएंगे, जोकि यह बताएंगे कि एक फसल को पकाने के लिए कितने पानी का इस्तेमाल किया है। इस योजना से जलस्तर ऊपर लाने का प्रयास किया जाएगा।

तिरुपति बालाजी मंदिर के पास टंकी के पाइप से बहता पानी।  संवाद

तिरुपति बालाजी मंदिर के पास टंकी के पाइप से बहता पानी। संवाद– फोटो : Kurukshetra

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