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राजस्थान की सीमा से सटा ऐतिहासिक गांव किकराल सिवानी उपमंडल से सिर्फ छह किलोमीटर दूर 300 वर्ष पूर्व बसाया गया है। यह अपनी उपजाऊ धरती, अनुशासित सामाजिक ढांचे और पीढ़ियों से चले आ रहे भाईचारे की वजह से पूरे इलाके में मिसाल माना जाता है। गांव की स्थापना का इतिहास भी उतना ही रोचक है
ग्रामीणों के अनुसार यहां वर्षों पहले प्रसिद्ध पहलवान कीकर सिंह रहते थे। उसी के नाम पर यह स्थान पहले ‘कीकर वाला’ कहा जाता था, जो समय के साथ बदलकर ‘किकराल’ के नाम से जाना जाने लगा। करीब 500 परिवार, 2,500 जनसंख्या और 1,400 वोटरों वाला यह गांव कृषि और पशुपालन पर आधारित है। इसकी मिट्टी पूरे क्षेत्र में सबसे उपजाऊ मानी जाती है। किकराल का इतिहास केवल खेती तक सीमित नहीं यह गांव देश की आजादी के संघर्ष में भी शानदार योगदान दे चुका है।
वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में सेवा दे चुके मुंशी राम खटक समेत आजाद हिंद फौज हवलदार माईराम नोखवाल, लांसनायक जीराम, हवलदार जयलाल, हवलदार रणजीत सिंह खटक इस गांव के गौरव हैं। धार्मिक सौहार्द, सर्वसम्मति से बनती पंचायतें, एकजुट निर्णय और विकास की साझा सोच किकराल को प्रदेश के उन खास गांवों की श्रेणी में शामिल करते हैं, जो अपने संस्कार, भूमि और परंपराओं से जुड़े हैं। इस गांव की गलियों में अपनापन दौड़ता है। खेतों में सोना उगता है और दिलों में भाईचारा बसा है। इसीलिए किकराल सिर्फ एक गांव नहीं बल्कि लोगों की भावनाओं का केंद्र है। संवाद
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और मजार में है आस्था
गांव में कुल छह मंदिर हैं। आजादी से पहले की मस्जिद है। गुरुद्वारा है और पीर बाबा की मजार है। गांव के शिक्षा के लिए वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय है, जिसमें आसपास के बच्चे भी शिक्षा ग्रहण के लिए आते हैं। गांव की मुख्य समस्या गांव में कोई रोडवेज सेवा नहीं है। गांव में पशु अस्पताल और पीएचसी खुला है लेकिन इन दोनों अस्पतालों के लिए सरकारी भवन नहीं बन सका है।
आपसी भाईचारे और शांति के लिए बनी पहचान
गांव किकराल पूरे इलाके में आपसी भाईचारे, शांति और सद्भाव के लिए जाना जाता है। गांव में अधिकतर सरपंच सर्वसम्मति से ही चुने जाते रहे हैं। समय के साथ चुनाव होने लगे, लेकिन गांव का परंपरागत भाईचारा आज भी कायम है। यहां किसी प्रकार का बड़ा विवाद या मुकदमा नहीं होता। सभी मतभेद गांव की पंचायत में ही आपसी सहमति से निपटा लिए जाते हैं। – हितेश शर्मा, सदस्य, भारत विकास परिषद एवं आजाद युवा परिषद
हिंदू बहुल गांव किकराल के लोग मिलजुलकर शांतिपूर्वक रहते हैं। गांव में बिजली और पानी की उत्तम व्यवस्था है, जो हर नागरिक की मूल आवश्यकता है। युवाओं के लिए गांव में बड़ा स्टेडियम भी है, जो उन्हें खेलों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करता है। गांव की प्रमुख समस्याओं में से एक है पंचायती भूमि पर अवैध कब्जे की बढ़ती स्थिति, जिसे सुलझाने की आवश्यकता है। – सौरभ भारद्वाज, ग्रामीण।
कीकर सिंह पहलवान के नाम पर गांव का नाम पहले ‘कीकर वाला’, जो समय के साथ बदलकर ‘किकराल’ हो गया। गांव की पहचान खेती, पशुपालन और मजबूत भाईचारे में है। यहां हर मसला आपसी सहमति से निपटाया जाता रहा है। यही कारण रहा कि पंचायतें कई वर्षों तक सर्वसम्मति से ही बनीं। यही गांव की सबसे बड़ी ताकत है। – निहाल सिंह, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि।
किकराल की मिट्टी पूरे क्षेत्र में सबसे उपजाऊ मानी जाती है। यहां के किसान मेहनती और कृषि ज्ञान में दक्ष हैं। गांव का भाईचारा ऐसा है कि किसी भी दुख-सुख में पूरा गांव एकजुट हो जाता है। भूमि की उर्वरता और लोगों की एकता यही दो आधार किकराल को उसकी विशिष्ट पहचान देते हैं। – कृष्ण कुमार वर्मा, ग्रामीण।
पिछले तीन वर्षों में लगभग 70 लाख रुपये की लागत से कई महत्वपूर्ण विकास कार्य पूरे किए गए हैं। इनमें स्कूल के सामने वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या का समाधान, पार्क और श्मशान भूमि का विकास, स्टेडियम का सुधार, दीवारों पर पेंटिंग और स्लोगन, जिम सेंटर की स्थापना प्रमुख हैं। – हवा सिंह, सरपंच प्रतिनिधि।
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भिवानी: किकराल की मिट्टी में उगता है सोना, मेहनती हैं किसान



