भाजपा और कांग्रेस में मुकाबला पर चौंका सकती है आप


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कैथल। नगर परिषद चेयरपर्सन की कुर्सी की जंग में प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला रविवार को ईवीएम में बंद हो गया। सभी प्रत्याशियों की ओर से भले ही जीत के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं। कारण कि स्थानीय चुनाव में भी जातीय समीकरण, सत्तापक्ष, राहुल गांधी की ईडी की पेशी और अनाज मंडी की राजनीति गहरा असर डालती हुई दिख रही है। वहीं कमतर आंकी जा रही आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन भी लोगों को चौंका सकता है।
पहली बार सीधे मतदान से हो रहे नगर परिषद चेयरपर्सन के चुनाव में जातीय समीकरण सबसे बड़ा फैक्टर बनकर सामने आया है। भाजपा और आम आदमी पार्टी ने अग्रवाल समाज से उम्मीदवार उतारे थे तो कांग्रेस ने पंजाबी समाज पर दांव खेला है। उम्मीदवारों की जातियों के कारण वोटों का ध्रुवीकरण हुआ, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया कि पंजाबी, अग्रवाल, सैनी व जाट समाज के 90 प्रतिशत तक वोट किसी एक उम्मीदवार को मिले हों।
ऐसे में इन जातियों में जितनी सेंधमारी दूसरे उम्मीदवार लगा पाएंगे, वही उनकी हार-जीत का कारण बनता दिख रहा है। बूथों के बाहर व शहर में लोगों से चर्चा अनुसार मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच ही दिख रहा है, लेकिन आम आदमी पार्टी को मिले दो जातियों के समर्थन से परिणाम चौंकाने वाला हो सकता है।
दूसरा बड़ा फैक्टर दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ईडी की पेशी रही, जिस कारण रणदीप सुरजेवाला चुनाव के ऐन जरूरी समय में तीन दिन प्रचार के लिए नहीं निकाल पाए। इससे कांग्रेस को थोड़ा नुकसान हो सकता है, लेकिन वापसी के बाद सुरजेवाला ने इसे कवर करने की पूरी कोशिश की है।
इसके अलावा कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी आदर्श थरेजा की वार्डों में मजबूत पकड़, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला की शहर की गली-गली में चुनाव प्रचार कर वोट की अपील और नगर परिषद कैथल की कार्यप्रणाली कांग्रेस की मुख्य मजबूती का कारण हो सकता है।
तीसरा बड़ा फैक्टर अनाज मंडी की राजनीति का रहा, जिसमें तीन माह पहले ही भाजपा प्रत्याशी सुरभि गर्ग के ताऊ ससुर श्याम लाल गर्ग कांग्रेस, भाजपा सहित कई धड़ों के समर्थक आढ़तियों की खुली मदद से प्रधान चुने गए थे। इसका लाभ चेयरपर्सन चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी को मिलता दिखा।
चुनाव में एक अन्य बड़ा फैक्टर भाजपा को मुख्य मुकाबले में बनाए रखने वाला रहा। सत्ताधारी दल से होने के साथ-साथ शहर में भाजपा का बूथ स्तर का मजबूत संगठन नेटवर्क, पर्दे के पीछे की कार्ययोजना, चुनावी के लिए हर तरह से संपन्न सुरेश गर्ग का परिवार और मुख्यमंत्री मनोहर लाल तक का सीधी वोट की अपील इस चुनाव के परिणाम पर बड़ा असर डालेगा।
आम आदमी पार्टी प्रत्याशी नीलम गुप्ता को कमजोर उम्मीदवार माना जा रहा था, लेकिन मतदान के दिन कई वार्डों में उनके पक्ष में बना माहौल चौंकाने वाला दिखा। शहर की बाहरी बस्तियों के अलावा शहर के कई पॉश इलाकों में गुप्ता के पक्ष में दिखे माहौल से अंदाजा है कि आप का प्रदर्शन चौंकाने वाला हो सकता है।
इसके बावजूद मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है, लेकिन चुनावी राजनीति में चौंकाने वाला परिणाम देने वाली आम आदमी पार्टी को भी कम नहीं आंका जा सकता। शेष उम्मीदवारों में इनेलो प्रत्याशी उमा रानी गर्ग, पुष्पा सैनी, कमलेश शर्मा और सुदेश कश्यप ने भी जोरआजमाइश की है। अब प्रत्याशियों के साथ ही जनता को भी 22 जून को होने वाली मतगणना का इंतजार है।

कैथल। नगर परिषद चेयरपर्सन की कुर्सी की जंग में प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला रविवार को ईवीएम में बंद हो गया। सभी प्रत्याशियों की ओर से भले ही जीत के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं। कारण कि स्थानीय चुनाव में भी जातीय समीकरण, सत्तापक्ष, राहुल गांधी की ईडी की पेशी और अनाज मंडी की राजनीति गहरा असर डालती हुई दिख रही है। वहीं कमतर आंकी जा रही आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन भी लोगों को चौंका सकता है।

पहली बार सीधे मतदान से हो रहे नगर परिषद चेयरपर्सन के चुनाव में जातीय समीकरण सबसे बड़ा फैक्टर बनकर सामने आया है। भाजपा और आम आदमी पार्टी ने अग्रवाल समाज से उम्मीदवार उतारे थे तो कांग्रेस ने पंजाबी समाज पर दांव खेला है। उम्मीदवारों की जातियों के कारण वोटों का ध्रुवीकरण हुआ, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया कि पंजाबी, अग्रवाल, सैनी व जाट समाज के 90 प्रतिशत तक वोट किसी एक उम्मीदवार को मिले हों।

ऐसे में इन जातियों में जितनी सेंधमारी दूसरे उम्मीदवार लगा पाएंगे, वही उनकी हार-जीत का कारण बनता दिख रहा है। बूथों के बाहर व शहर में लोगों से चर्चा अनुसार मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच ही दिख रहा है, लेकिन आम आदमी पार्टी को मिले दो जातियों के समर्थन से परिणाम चौंकाने वाला हो सकता है।

दूसरा बड़ा फैक्टर दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ईडी की पेशी रही, जिस कारण रणदीप सुरजेवाला चुनाव के ऐन जरूरी समय में तीन दिन प्रचार के लिए नहीं निकाल पाए। इससे कांग्रेस को थोड़ा नुकसान हो सकता है, लेकिन वापसी के बाद सुरजेवाला ने इसे कवर करने की पूरी कोशिश की है।

इसके अलावा कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी आदर्श थरेजा की वार्डों में मजबूत पकड़, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला की शहर की गली-गली में चुनाव प्रचार कर वोट की अपील और नगर परिषद कैथल की कार्यप्रणाली कांग्रेस की मुख्य मजबूती का कारण हो सकता है।

तीसरा बड़ा फैक्टर अनाज मंडी की राजनीति का रहा, जिसमें तीन माह पहले ही भाजपा प्रत्याशी सुरभि गर्ग के ताऊ ससुर श्याम लाल गर्ग कांग्रेस, भाजपा सहित कई धड़ों के समर्थक आढ़तियों की खुली मदद से प्रधान चुने गए थे। इसका लाभ चेयरपर्सन चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी को मिलता दिखा।

चुनाव में एक अन्य बड़ा फैक्टर भाजपा को मुख्य मुकाबले में बनाए रखने वाला रहा। सत्ताधारी दल से होने के साथ-साथ शहर में भाजपा का बूथ स्तर का मजबूत संगठन नेटवर्क, पर्दे के पीछे की कार्ययोजना, चुनावी के लिए हर तरह से संपन्न सुरेश गर्ग का परिवार और मुख्यमंत्री मनोहर लाल तक का सीधी वोट की अपील इस चुनाव के परिणाम पर बड़ा असर डालेगा।

आम आदमी पार्टी प्रत्याशी नीलम गुप्ता को कमजोर उम्मीदवार माना जा रहा था, लेकिन मतदान के दिन कई वार्डों में उनके पक्ष में बना माहौल चौंकाने वाला दिखा। शहर की बाहरी बस्तियों के अलावा शहर के कई पॉश इलाकों में गुप्ता के पक्ष में दिखे माहौल से अंदाजा है कि आप का प्रदर्शन चौंकाने वाला हो सकता है।

इसके बावजूद मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है, लेकिन चुनावी राजनीति में चौंकाने वाला परिणाम देने वाली आम आदमी पार्टी को भी कम नहीं आंका जा सकता। शेष उम्मीदवारों में इनेलो प्रत्याशी उमा रानी गर्ग, पुष्पा सैनी, कमलेश शर्मा और सुदेश कश्यप ने भी जोरआजमाइश की है। अब प्रत्याशियों के साथ ही जनता को भी 22 जून को होने वाली मतगणना का इंतजार है।

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Written by Haryanacircle

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