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बारिश पर निर्भर होगा बाजरे का रकबा बढ़ेगा या धान का


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जींद। पिछली बार कपास में आई गुलाबी सुंडी का असर इस बार इसकी बिजाई पर साफ देखने को मिला है। पिछले वर्ष की तुलना में कपास का रकबा इस बार 30 हजार हेक्टेयर कम हो गया। इस 30 हजार हेक्टेयर में से यदि बारिश अधिक हुई तो धान का रकबा बढ़ेगा और बारिश कम हुई तो बाजरे का रकबा बढ़ेगा। फिलहाल जिले में औसतन से भी कम बारिश हुई है। जो धान की रोपाई की गई गई है, उसमें भी पानी नहीं रहने के कारण सूख रही है। इसके अलावा धान को जीवित रखने के लिए किसान महंगे भाव का डीजल भी फूंक रहे हैं।
पिछले वर्ष जिले में लगभग 12 हजार हेक्टेयर में बाजरे की बिजाई की गई थी। फिलहाल जिले में तीन से चार हजर हेक्टेयर में बाजरे की बिजाई की गई है। पूरा जुलाई महीना बाजरे की बिजाई के लिए उचित समय है। काफी लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पिछले सप्ताह हुई बारिश के बाद ही जिले में बाजरे की बिजाई शुरू हुई थी। वहीं पिछले वर्ष जिले में लगभग 64 हजार हेक्टेयर में कपास की बिजाई की गई है। पिछले वर्ष गुलाबी सुुंडी के कारण कपास की 80 प्रतिशत फसल खराब हो गई थी। इसी कारण इस बार किसानों ने लगभग 34 हजार हेक्टयेर में कपास की बिजाई की है। कपास की बिजाई का समय अब बीत चुका है। अब बारिश पर निर्भर होगा कि किसान बाजरे की बिजाई करेंगे या फिर धान की। कपास का जो 30 हजार हेक्टेयर रकबा कम हुआ है, उसमें बाजरे या फिर धान की बिजाई की जाएगी। उम्मीद है कि इस बार बाजरे का रकबा अधिक बढ़ेगा क्योंकि जहां पर पानी की कमी है, वहां पर लोग धान की बजाय बाजरा ही लगाएंगे। पिछले वर्ष जिले में एक लाख 46 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई थी। अब धान की रोपाई का समय आ चुका है और किसान धान की रोपाई कर रहे हैं लेकिन बारिश कम होने के कारण अब धान की रोपाई का कार्य भी धीमा हो गया। इस बार एक लाख 50 हजार हेक्टेयर में धान की बिजाई हो सकती है और पिछले वर्ष बाजरे की बिजाई 12 हजार हेक्टेयर में थी तो इस बार 20 हजार हेक्टेयर से ज्यादा बाजरे की बिजाई होने की संभावना है।
धान का रकबा घटाने पर जोर
सरकार व कृषि विभाग प्रदेश में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए धान का रकबा घटाने पर जोर दे रहा है। समय-समय पर कृषि विभाग धान की बजाय दूसरी फसलों की बिजाई के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। धान की जगह मूंग की फसल लगाने पर सात हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा ढेंचा का बीज भी फ्री में दिया जाता है।
इस बार धान की बजाय बाजरे का रकबा बढ़ाने प कृषि विभाग जोर दे रहा है। जिले में अभी तक कोई खास बारिश नहीं हुई है। इसलिए किसानों को भी अन्य फसलों की बिजाई करनी चाहिए। धान की बिजाई सीधी करनी चहिए। इससे पानी की बचत होती है। पिछले वर्ष 12 हजार हेक्टेयर में बाजरे की फसल बोई गई थी। इस बार यह 20 हजार हेक्टेयर से अधिक होने का अनुमान है। कपास की 30 हजार हेक्टेयर के लगभग रकबा घटा है।
–सुनील कुमार, कृषि विकास अधिकारी।

जींद। पिछली बार कपास में आई गुलाबी सुंडी का असर इस बार इसकी बिजाई पर साफ देखने को मिला है। पिछले वर्ष की तुलना में कपास का रकबा इस बार 30 हजार हेक्टेयर कम हो गया। इस 30 हजार हेक्टेयर में से यदि बारिश अधिक हुई तो धान का रकबा बढ़ेगा और बारिश कम हुई तो बाजरे का रकबा बढ़ेगा। फिलहाल जिले में औसतन से भी कम बारिश हुई है। जो धान की रोपाई की गई गई है, उसमें भी पानी नहीं रहने के कारण सूख रही है। इसके अलावा धान को जीवित रखने के लिए किसान महंगे भाव का डीजल भी फूंक रहे हैं।

पिछले वर्ष जिले में लगभग 12 हजार हेक्टेयर में बाजरे की बिजाई की गई थी। फिलहाल जिले में तीन से चार हजर हेक्टेयर में बाजरे की बिजाई की गई है। पूरा जुलाई महीना बाजरे की बिजाई के लिए उचित समय है। काफी लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पिछले सप्ताह हुई बारिश के बाद ही जिले में बाजरे की बिजाई शुरू हुई थी। वहीं पिछले वर्ष जिले में लगभग 64 हजार हेक्टेयर में कपास की बिजाई की गई है। पिछले वर्ष गुलाबी सुुंडी के कारण कपास की 80 प्रतिशत फसल खराब हो गई थी। इसी कारण इस बार किसानों ने लगभग 34 हजार हेक्टयेर में कपास की बिजाई की है। कपास की बिजाई का समय अब बीत चुका है। अब बारिश पर निर्भर होगा कि किसान बाजरे की बिजाई करेंगे या फिर धान की। कपास का जो 30 हजार हेक्टेयर रकबा कम हुआ है, उसमें बाजरे या फिर धान की बिजाई की जाएगी। उम्मीद है कि इस बार बाजरे का रकबा अधिक बढ़ेगा क्योंकि जहां पर पानी की कमी है, वहां पर लोग धान की बजाय बाजरा ही लगाएंगे। पिछले वर्ष जिले में एक लाख 46 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई थी। अब धान की रोपाई का समय आ चुका है और किसान धान की रोपाई कर रहे हैं लेकिन बारिश कम होने के कारण अब धान की रोपाई का कार्य भी धीमा हो गया। इस बार एक लाख 50 हजार हेक्टेयर में धान की बिजाई हो सकती है और पिछले वर्ष बाजरे की बिजाई 12 हजार हेक्टेयर में थी तो इस बार 20 हजार हेक्टेयर से ज्यादा बाजरे की बिजाई होने की संभावना है।

धान का रकबा घटाने पर जोर

सरकार व कृषि विभाग प्रदेश में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए धान का रकबा घटाने पर जोर दे रहा है। समय-समय पर कृषि विभाग धान की बजाय दूसरी फसलों की बिजाई के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। धान की जगह मूंग की फसल लगाने पर सात हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा ढेंचा का बीज भी फ्री में दिया जाता है।

इस बार धान की बजाय बाजरे का रकबा बढ़ाने प कृषि विभाग जोर दे रहा है। जिले में अभी तक कोई खास बारिश नहीं हुई है। इसलिए किसानों को भी अन्य फसलों की बिजाई करनी चाहिए। धान की बिजाई सीधी करनी चहिए। इससे पानी की बचत होती है। पिछले वर्ष 12 हजार हेक्टेयर में बाजरे की फसल बोई गई थी। इस बार यह 20 हजार हेक्टेयर से अधिक होने का अनुमान है। कपास की 30 हजार हेक्टेयर के लगभग रकबा घटा है।

–सुनील कुमार, कृषि विकास अधिकारी।

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