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बाढ़ नियंत्रण को लेकर उपायुक्त ने ली अधिकारियों की बैठक


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नारनौल। आपदा में जान-माल बचाने में अच्छा प्रबंधन और अधिकारियों का तालमेल सबसे अहम होता है। ऐसे में अधिकारी बाढ़ जैसी परिस्थिति के लिए तैयार रहें। इसको लेकर किए गए प्रबंधों की रिपोर्ट 10 जून तक भेजें। ये निर्देश उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने शुक्रवार को लघु सचिवालय में बाढ़ नियंत्रण को लेकर हुई बैठक में अधिकारियों के दिए।
डीसी ने कहा कि अधिकारी अपने क्षेत्र में बांधों का निरीक्षण करें। बाढ़ प्रबंधन की हम सभी को पहले से ही तैयारी करनी है। सिंचाई विभाग को नहरों के किनारे दुरुस्त रखने, पंप हाउस चालू हालत में रखने के निर्देश दिए। बिजली विभाग के अधिकारियों से कहा कि पानी भरने की स्थिति में भी बिजली सप्लाई सुचारु रहे। बीएंडआर विभाग से कहा कि बाढ़ आने की स्थिति में आवागमन प्रभावित ना हो। स्वास्थ्य विभाग से कहा कि दवाइयों का उचित प्रबंध रखे। पशुपालन विभाग भी पशुओं की बीमारी से बचाव के सभी उपाय रखें। बाढ़ प्रबंधन में काम आने वाली सभी मशीनरी की अपडेटेड सूची तैयार की जाए। सभी अधिकारियों की फोन नंबर सहित अपडेटेड सूची तैयार करें। नालों की सफाई कराई जाए।
फ्लड कंट्रोल रूम स्थापित
उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने बताया कि महेंद्रगढ़ में फ्लड कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। बाढ़ आने की स्थिति में कोई भी नागरिक 01282-251209 पर सूचना दे सकता है। यह नंबर व्यस्त रहता है या नहीं मिलता है तो वह कैंप कार्यालय के लैंडलाइन नंबर 01282-251200 तथा 251202 पर फोन कर सकते हैं। अगर यह नंबर भी व्यस्त रहते हैं तो 112 नंबर पर डायल कर सकते हैं। यह सेंट्रलाइज के नंबर है जो पूरे हरियाणा के लिए है।
– बाक्स
मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल अभियान से जुड़ें
नारनौल। उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने कहा कि जिला महेंद्रगढ़ में पानी को जमीन के अंदर सहेजने के लिए जिला प्रशासन ने मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल अभियान शुरू किया है। अधिकारी जब भी गांव में जाएं तो ग्रामीणों को साथ लेकर खेतों के चारों कोनों पर गड्ढे खुदवाएं ताकि पानी का संचयन हो। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे अपने अपने खेतों में गड्ढे खुदवाएं। इससे न केवल पानी का संचयन होगा बल्कि उनके खेत की उर्वरा शक्ति भी बरकरार रहेगी। पानी के अचानक बहाव से उनके खेत की उर्वरा शक्ति दूसरे स्थान पर बह जाती है। यह गड्ढे बनने के बाद वह सारी खाद उन्हीं गड्ढों में जमा हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि अगर हम सभी इसी तरह अपने अपने खेतों में गड्ढे खोदकर जमीन में पानी सहेजने का कार्य करें तो जिला महेंद्रगढ़ को पानी के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा। हमारा मकसद खेत का पानी खेत में ही रखने का है।

नारनौल। आपदा में जान-माल बचाने में अच्छा प्रबंधन और अधिकारियों का तालमेल सबसे अहम होता है। ऐसे में अधिकारी बाढ़ जैसी परिस्थिति के लिए तैयार रहें। इसको लेकर किए गए प्रबंधों की रिपोर्ट 10 जून तक भेजें। ये निर्देश उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने शुक्रवार को लघु सचिवालय में बाढ़ नियंत्रण को लेकर हुई बैठक में अधिकारियों के दिए।

डीसी ने कहा कि अधिकारी अपने क्षेत्र में बांधों का निरीक्षण करें। बाढ़ प्रबंधन की हम सभी को पहले से ही तैयारी करनी है। सिंचाई विभाग को नहरों के किनारे दुरुस्त रखने, पंप हाउस चालू हालत में रखने के निर्देश दिए। बिजली विभाग के अधिकारियों से कहा कि पानी भरने की स्थिति में भी बिजली सप्लाई सुचारु रहे। बीएंडआर विभाग से कहा कि बाढ़ आने की स्थिति में आवागमन प्रभावित ना हो। स्वास्थ्य विभाग से कहा कि दवाइयों का उचित प्रबंध रखे। पशुपालन विभाग भी पशुओं की बीमारी से बचाव के सभी उपाय रखें। बाढ़ प्रबंधन में काम आने वाली सभी मशीनरी की अपडेटेड सूची तैयार की जाए। सभी अधिकारियों की फोन नंबर सहित अपडेटेड सूची तैयार करें। नालों की सफाई कराई जाए।

फ्लड कंट्रोल रूम स्थापित

उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने बताया कि महेंद्रगढ़ में फ्लड कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। बाढ़ आने की स्थिति में कोई भी नागरिक 01282-251209 पर सूचना दे सकता है। यह नंबर व्यस्त रहता है या नहीं मिलता है तो वह कैंप कार्यालय के लैंडलाइन नंबर 01282-251200 तथा 251202 पर फोन कर सकते हैं। अगर यह नंबर भी व्यस्त रहते हैं तो 112 नंबर पर डायल कर सकते हैं। यह सेंट्रलाइज के नंबर है जो पूरे हरियाणा के लिए है।

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मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल अभियान से जुड़ें

नारनौल। उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने कहा कि जिला महेंद्रगढ़ में पानी को जमीन के अंदर सहेजने के लिए जिला प्रशासन ने मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल अभियान शुरू किया है। अधिकारी जब भी गांव में जाएं तो ग्रामीणों को साथ लेकर खेतों के चारों कोनों पर गड्ढे खुदवाएं ताकि पानी का संचयन हो। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे अपने अपने खेतों में गड्ढे खुदवाएं। इससे न केवल पानी का संचयन होगा बल्कि उनके खेत की उर्वरा शक्ति भी बरकरार रहेगी। पानी के अचानक बहाव से उनके खेत की उर्वरा शक्ति दूसरे स्थान पर बह जाती है। यह गड्ढे बनने के बाद वह सारी खाद उन्हीं गड्ढों में जमा हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि अगर हम सभी इसी तरह अपने अपने खेतों में गड्ढे खोदकर जमीन में पानी सहेजने का कार्य करें तो जिला महेंद्रगढ़ को पानी के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा। हमारा मकसद खेत का पानी खेत में ही रखने का है।

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