बदलाव : अब हरे ड्रेस में मध्याह्न भोजन बनाएंगी रसोइया


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जींद। सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील (मध्याह्न भोजन) तैयार करने वाली रसोइयों का ड्रेस शिक्षा विभाग ने बदल दिया है। पहले उन्हें नीले-काले रंग का कुर्ता और काले रंग की सलवार पहननी होती थी। अब उन्हें हरे रंग का कुर्ता और सलवार पहनना होगा। नया ड्रेस कोड एक जुलाई से लागू हो जाएगा।
जिले के सरकारी स्कूलों में रसोइयों को एक जुलाई से नई ड्रेस में आना होगा। इस संबंध में निदेशक मौलिक शिक्षा ने स्कूलों को नए ड्रेस कोड का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। पहली बार रसोइयों के ड्रेस में बदलाव किया गया है। शिक्षा विभाग की तरफ से प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के विद्यार्थियों को मिड-डे-मील दिया जाता है। जिले के 530 से ज्यादा स्कूलों में मिड-डे-मील दिया जा रहा है। सभी स्कूलों में रसोइया तैनात हैं। शिक्षा विभाग प्रत्येक रसोइया को साल में दो ड्रेस के लिए 1200 रुपये की जारी करता है।
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एक जुलाई से स्कूलों में पहले की तरह बनेगा मध्याह्न भोजन
कोरोना महामारी के चलते वर्ष 2020 से स्कूलों में मिड-डे-मील (मध्याह्न भोजन) नहीं बन रहा है। दो माह पहले स्कूलों में मिड-डे-मील देने के आदेश जारी हुए थे लेकिन कुकिंग कास्ट अधिक होने के चलते 10 फीसदी स्कूलों में ही मिड-डे-मील बनना शुरू हुआ है। शिक्षा विभाग कुकिंग कास्ट लेकर बैकफुट पर आ चुका है और एक जुलाई से स्कूलों में ही विद्यार्थियों को पहले की तरह मिड-डे-मील देने के आदेश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग ने रसोइयों के ड्रेस में बदलाव किया है। कुक को अब हरे रंग की ड्रेस पहननी होगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। एक जुलाई से स्कूलों में मिड डे मील मिलना शुरू होगा। स्कूल खुलने के बाद मिड-डे-मील रसोइयों को हरे रंग की वर्दी में आना होगा।-सुशील कुमार जैन खंड शिक्षा अधिकारी जींद।

जींद। सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील (मध्याह्न भोजन) तैयार करने वाली रसोइयों का ड्रेस शिक्षा विभाग ने बदल दिया है। पहले उन्हें नीले-काले रंग का कुर्ता और काले रंग की सलवार पहननी होती थी। अब उन्हें हरे रंग का कुर्ता और सलवार पहनना होगा। नया ड्रेस कोड एक जुलाई से लागू हो जाएगा।

जिले के सरकारी स्कूलों में रसोइयों को एक जुलाई से नई ड्रेस में आना होगा। इस संबंध में निदेशक मौलिक शिक्षा ने स्कूलों को नए ड्रेस कोड का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। पहली बार रसोइयों के ड्रेस में बदलाव किया गया है। शिक्षा विभाग की तरफ से प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के विद्यार्थियों को मिड-डे-मील दिया जाता है। जिले के 530 से ज्यादा स्कूलों में मिड-डे-मील दिया जा रहा है। सभी स्कूलों में रसोइया तैनात हैं। शिक्षा विभाग प्रत्येक रसोइया को साल में दो ड्रेस के लिए 1200 रुपये की जारी करता है।

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एक जुलाई से स्कूलों में पहले की तरह बनेगा मध्याह्न भोजन

कोरोना महामारी के चलते वर्ष 2020 से स्कूलों में मिड-डे-मील (मध्याह्न भोजन) नहीं बन रहा है। दो माह पहले स्कूलों में मिड-डे-मील देने के आदेश जारी हुए थे लेकिन कुकिंग कास्ट अधिक होने के चलते 10 फीसदी स्कूलों में ही मिड-डे-मील बनना शुरू हुआ है। शिक्षा विभाग कुकिंग कास्ट लेकर बैकफुट पर आ चुका है और एक जुलाई से स्कूलों में ही विद्यार्थियों को पहले की तरह मिड-डे-मील देने के आदेश दिए गए हैं।

शिक्षा विभाग ने रसोइयों के ड्रेस में बदलाव किया है। कुक को अब हरे रंग की ड्रेस पहननी होगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। एक जुलाई से स्कूलों में मिड डे मील मिलना शुरू होगा। स्कूल खुलने के बाद मिड-डे-मील रसोइयों को हरे रंग की वर्दी में आना होगा।-सुशील कुमार जैन खंड शिक्षा अधिकारी जींद।

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Written by Haryanacircle

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