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फ्यूल और केमिकल हुआ मंहगा, 25 हजार करोड़ का डाइंग कारोबार, 50 प्रतिशत कम हुआ


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फ्यूल और केमिकल महंगा, 25 हजार करोड़ का डाइंग कारोबार आधा
– बंद होने के कगार पर आए डाइंग हाउस
– कोयले के रेट छह से बढ़कर 16 रुपये प्रति किग्रा हुआ, केमिकल 100 से बढ़कर 200 रुपये हुए
– अब उद्यमियों को दो दिन बंद करने पड़ेंगे उद्योग
संदीप सिंह
पानीपत। इस वक्त पानीपत का डाइंग कारोबार बुरे दौर से गुजर रहा है। डाइंग यूनिट को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं क्योंकि एक्सपोर्ट कम हो गया है। कोयले का रेट छह से बढ़कर 16 रुपये किलोग्राम हो गया है। केमिकल के रेट 100 से बढ़कर 200 रुपये किलोग्राम हो गया है। डाइंग में इस्तेमाल होने वाले सभी पांचों केमिकलों के दाम दोगुने हो गए हैं। लिक्विड ब्रीच का रेट दो से बढ़कर आठ रुपये किग्रा. हो गया है। ऐसे में डाई करना उद्यमियों के लिए तीन गुना महंगा हो रहा है। डायर्स भी अपने रेट 20 प्रतिशत बढ़ा रहे हैं। इससे टेक्सटाइल कारोबार को झटका लग रहा है। डाइंग के रेट बढ़ने से कपड़े के रेट भी बढ़ेंगे। उद्यमियों ने खर्च कम करने के लिए सप्ताह में दो दिन डाइंग यूनिट बंद करने का निर्णय लिया है। 10 जून के बाद हर शनिवार और रविवार को उद्योग बंद रहेंगे। लेबर की महीने में चार दिन की सैलरी काटी जाएगी। 25 हजार करोड़ का डाइंग कारोबार 50 प्रतिशत तक कम हो गया है।

धागा लगभग तीन गुना महंगा
रूस-यूक्रेन युद्ध से टेक्सटाइल नगरी को इस वर्ष रुई की बढ़ी कीमतों के कारण करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पिछले वर्ष के 120 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर रुई के दाम 330 रुपये तक पहुंच गया है। इससे कॉटन यार्न यानी धागा महंगा हो गया है। इसका सीधा असर कपड़ा उद्योग पर पड़ रहा है। यार्न के दाम बढ़ने से विदेशों से मिलने वाले ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं। पानीपत के निर्यात में इस वर्ष 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में निर्यात 20 हजार करोड़ तक पहुंच गया था। इस साल यह महज 12 हजार करोड़ पर ही अटक सकता है। यार्न के बढ़े दामों से सीधा आठ हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है। यूरोपियन देशों के खरीदार माल को पांच-छह माह बाद भेजने के लिए ई-मेल कर रहे हैं। ऐसे में निर्यातक काफी परेशान हैं। वर्ष 2020 में इटली को पछाड़कर पानीपत रंगीन धागे के उत्पादन में पहले स्थान पर पहुंचा था। रोज 20 लाख किलोग्राम धागे के उत्पादन में भी 20 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष नवंबर में रुई के दाम 120 रुपये किलोग्राम थे, जो छह महीने बाद 330 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुका है।

क्या करें हम मजूबर हैं
केमिकल और कोयले के रेट कई गुना बढ़ गए हैं। लेबर की सैलरी भी बढ़ गई है। लेबर छुट्टियों में अपने घर चली गई है। काम बिल्कुल धीमा हो गया है। डाइंग दोगुनी हो गई है। इसलिए उनको भी अपने रेट बढ़ाने पड़ रहे हैं। सप्ताह में दो दिन उद्योगों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। लेबर का चार दिन का वेतन कटेगा।
– भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन

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फ्यूल और केमिकल महंगा, 25 हजार करोड़ का डाइंग कारोबार आधा

– बंद होने के कगार पर आए डाइंग हाउस

– कोयले के रेट छह से बढ़कर 16 रुपये प्रति किग्रा हुआ, केमिकल 100 से बढ़कर 200 रुपये हुए

– अब उद्यमियों को दो दिन बंद करने पड़ेंगे उद्योग

संदीप सिंह

पानीपत। इस वक्त पानीपत का डाइंग कारोबार बुरे दौर से गुजर रहा है। डाइंग यूनिट को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं क्योंकि एक्सपोर्ट कम हो गया है। कोयले का रेट छह से बढ़कर 16 रुपये किलोग्राम हो गया है। केमिकल के रेट 100 से बढ़कर 200 रुपये किलोग्राम हो गया है। डाइंग में इस्तेमाल होने वाले सभी पांचों केमिकलों के दाम दोगुने हो गए हैं। लिक्विड ब्रीच का रेट दो से बढ़कर आठ रुपये किग्रा. हो गया है। ऐसे में डाई करना उद्यमियों के लिए तीन गुना महंगा हो रहा है। डायर्स भी अपने रेट 20 प्रतिशत बढ़ा रहे हैं। इससे टेक्सटाइल कारोबार को झटका लग रहा है। डाइंग के रेट बढ़ने से कपड़े के रेट भी बढ़ेंगे। उद्यमियों ने खर्च कम करने के लिए सप्ताह में दो दिन डाइंग यूनिट बंद करने का निर्णय लिया है। 10 जून के बाद हर शनिवार और रविवार को उद्योग बंद रहेंगे। लेबर की महीने में चार दिन की सैलरी काटी जाएगी। 25 हजार करोड़ का डाइंग कारोबार 50 प्रतिशत तक कम हो गया है।



धागा लगभग तीन गुना महंगा

रूस-यूक्रेन युद्ध से टेक्सटाइल नगरी को इस वर्ष रुई की बढ़ी कीमतों के कारण करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पिछले वर्ष के 120 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर रुई के दाम 330 रुपये तक पहुंच गया है। इससे कॉटन यार्न यानी धागा महंगा हो गया है। इसका सीधा असर कपड़ा उद्योग पर पड़ रहा है। यार्न के दाम बढ़ने से विदेशों से मिलने वाले ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं। पानीपत के निर्यात में इस वर्ष 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में निर्यात 20 हजार करोड़ तक पहुंच गया था। इस साल यह महज 12 हजार करोड़ पर ही अटक सकता है। यार्न के बढ़े दामों से सीधा आठ हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है। यूरोपियन देशों के खरीदार माल को पांच-छह माह बाद भेजने के लिए ई-मेल कर रहे हैं। ऐसे में निर्यातक काफी परेशान हैं। वर्ष 2020 में इटली को पछाड़कर पानीपत रंगीन धागे के उत्पादन में पहले स्थान पर पहुंचा था। रोज 20 लाख किलोग्राम धागे के उत्पादन में भी 20 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष नवंबर में रुई के दाम 120 रुपये किलोग्राम थे, जो छह महीने बाद 330 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुका है।



क्या करें हम मजूबर हैं

केमिकल और कोयले के रेट कई गुना बढ़ गए हैं। लेबर की सैलरी भी बढ़ गई है। लेबर छुट्टियों में अपने घर चली गई है। काम बिल्कुल धीमा हो गया है। डाइंग दोगुनी हो गई है। इसलिए उनको भी अपने रेट बढ़ाने पड़ रहे हैं। सप्ताह में दो दिन उद्योगों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। लेबर का चार दिन का वेतन कटेगा।

– भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन

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