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प्रदेश की टीमों में खेल रहे पानीपत के खिलाड़ियों ने दिलाई प्रदेश को चांदी


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पानीपत। पानीपत के खिलाड़ी खेलो इंडिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। प्रदेश के खिलाड़ी प्रतियोगिता में मेडल की झड़ी लगा रहे हैं। इसमें पानीपत के खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश की महिला वॉलीबॉल टीम ने सिल्वर मेडल जीता है। टीम का नेतृत्व पानीपत की कीर्ति ने किया। उन्होंने टीम की जीत में अहम रोल अदा किया। पुरुष वॉलीबॉल टीम में पानीपत के आशीष छौक्कर ने अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनकी टीम ने भी सिल्वर मेडल जीता है। कबड्डी में नितिन, विकास और हिमांशु ने खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। कबड्डी में भी प्रदेश को सिल्वर मिला।
गांव भादड़ के रहने वाले आशीष छौक्कर हरियाणा वॉलीबॉल की टीम के अहम सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान के साथ सेमीफाइनल हुआ था। वह 3-0 से मैच जीत गए। फाइनल में तमिलनाडु से हार का सामना करना पड़ा। आशीष ने कोरोना महामारी के दौरान खेल की शुरुआत की। इस दौरान अभ्यास कर खेल को सुधारा और नेशनल में चार पदक जीते। गांव में ही खेलना शुरू किया। पहली बार खेलो इंडिया में भाग लिया था। जीत के बाद पिता राजबीर के साथ खुुशी मनाई।
इसराना क्षेत्र के गांव नौल्था के रहने वाले नितिन ने आठ साल पहले गांव के खिलाड़ियों को खेलते देखकर खेलना शुरू किया था। नितिन ने बताया कि महाराष्ट्र की टीम को 54-23 से हराने के बाद मंगलवार को फाइनल में हिमाचल की टीम से उनका मुकाबला हुआ। उनकी टीम हार गई उनको रजत पदक से संतोष करना पड़ा। नितिन ने जूनियर नेशनल में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। राज्य स्तर पर अब तक पांच पदक जीत चुके हैं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया सोनीपत में रहकर अपने खेल को निखारा है। खेलो इंडिया के लिए पंचकूला कैंप में अभ्यास कर रहे थे।
नौल्था गांव के ही रहने वाले विकास ने चार साल पहले गांव में ही कबड्डी खेलना शुरू किया। अच्छे खेल प्रदर्शन को खेलो इंडिया में भी बरकरार रखा। इसकी बदौलत अब तक उनका प्रदर्शन शानदार रहा। गांव में अभ्यास करते थे और खेलो इंडिया के लिए पंचकूला कैप में अभ्यास किया है।
इसी गांव के खिलाड़ी हिमांशु कहते हैं कि खेल शुरू करने के दौरान सोचा भी नहीं था कि इतना आगे तक आ सकेंगे। पदक जीतने के बाद खुशी मिली है। हिमांशु का कहना है कि स्वर्ण पदक का सोचा था, रजत से संतोष करना पड़ रहा है। उनकी उम्र महज 15 साल है, लेकिन प्रदर्शन बेहद उम्दा रहा है।
वॉलीबॉल टीम में पानीपत के ये खिलाड़ी
– शिवानी : सनौली खंड के गांव जलालपुर-प्रथम की रहने वाली वॉलीबॉल की खिलाड़ी शिवानी सात से खेल रही हैं। खेलो इंडिया यूथ गेम्स में टीम के साथ रोजाना अभ्यास किया। इससे रजत पदक जितवाने में उनका विशेष सहयोग रहा। 18 वर्ष की उम्र में ही कई स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। पिता बिजेंद्र रावल उनके कोच हैं। अंडर-14 खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही चार बार नेशनल खेल चुकी हैं। पहले कबड्डी खेलती थीं।
– कीर्ति : सनौली खंड के गांव जलालपुर-प्रथम की कीर्ति ने वॉलीबॉल टीम की कप्तानी करने हुए टीम को रजत पदक दिलवाया। कीर्ति ने खुद अभ्यास करने के साथ अच्छी कप्तानी साबित की है। अंडर-14 खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। सब जूनियर में कांस्य जीत चुकी हैं। पिता मजदूरी करते हैं। एशिया कैंप अंडर-20 के लिए भुवनेश्वर में अभ्यास कर रही हैं। कीर्ति का खेलो इंडिया में खेलने पर संदेह था फिर भी खेला और टीम को रजत पदक दिलवाया।
– अनु रानी : गांव जलालपुर प्रथम की ही रहने वाली अनु पिछले चार साल से वॉलीबॉल खेल रही हैं। खेलो इंडिया से पहले गांव में कोच बिजेंद्र रावल की देखरेख में अभ्यास करती थीं। स्कूल अंडर-14 में मेडल जीत चुकी हैं। पिता सतपाल का सपना है कि बेटी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बने। पंचकूला खेलो इंडिया कैंप में अभ्यास कर रही थी।

पानीपत। पानीपत के खिलाड़ी खेलो इंडिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। प्रदेश के खिलाड़ी प्रतियोगिता में मेडल की झड़ी लगा रहे हैं। इसमें पानीपत के खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश की महिला वॉलीबॉल टीम ने सिल्वर मेडल जीता है। टीम का नेतृत्व पानीपत की कीर्ति ने किया। उन्होंने टीम की जीत में अहम रोल अदा किया। पुरुष वॉलीबॉल टीम में पानीपत के आशीष छौक्कर ने अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनकी टीम ने भी सिल्वर मेडल जीता है। कबड्डी में नितिन, विकास और हिमांशु ने खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। कबड्डी में भी प्रदेश को सिल्वर मिला।

गांव भादड़ के रहने वाले आशीष छौक्कर हरियाणा वॉलीबॉल की टीम के अहम सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान के साथ सेमीफाइनल हुआ था। वह 3-0 से मैच जीत गए। फाइनल में तमिलनाडु से हार का सामना करना पड़ा। आशीष ने कोरोना महामारी के दौरान खेल की शुरुआत की। इस दौरान अभ्यास कर खेल को सुधारा और नेशनल में चार पदक जीते। गांव में ही खेलना शुरू किया। पहली बार खेलो इंडिया में भाग लिया था। जीत के बाद पिता राजबीर के साथ खुुशी मनाई।

इसराना क्षेत्र के गांव नौल्था के रहने वाले नितिन ने आठ साल पहले गांव के खिलाड़ियों को खेलते देखकर खेलना शुरू किया था। नितिन ने बताया कि महाराष्ट्र की टीम को 54-23 से हराने के बाद मंगलवार को फाइनल में हिमाचल की टीम से उनका मुकाबला हुआ। उनकी टीम हार गई उनको रजत पदक से संतोष करना पड़ा। नितिन ने जूनियर नेशनल में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। राज्य स्तर पर अब तक पांच पदक जीत चुके हैं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया सोनीपत में रहकर अपने खेल को निखारा है। खेलो इंडिया के लिए पंचकूला कैंप में अभ्यास कर रहे थे।

नौल्था गांव के ही रहने वाले विकास ने चार साल पहले गांव में ही कबड्डी खेलना शुरू किया। अच्छे खेल प्रदर्शन को खेलो इंडिया में भी बरकरार रखा। इसकी बदौलत अब तक उनका प्रदर्शन शानदार रहा। गांव में अभ्यास करते थे और खेलो इंडिया के लिए पंचकूला कैप में अभ्यास किया है।

इसी गांव के खिलाड़ी हिमांशु कहते हैं कि खेल शुरू करने के दौरान सोचा भी नहीं था कि इतना आगे तक आ सकेंगे। पदक जीतने के बाद खुशी मिली है। हिमांशु का कहना है कि स्वर्ण पदक का सोचा था, रजत से संतोष करना पड़ रहा है। उनकी उम्र महज 15 साल है, लेकिन प्रदर्शन बेहद उम्दा रहा है।

वॉलीबॉल टीम में पानीपत के ये खिलाड़ी

– शिवानी : सनौली खंड के गांव जलालपुर-प्रथम की रहने वाली वॉलीबॉल की खिलाड़ी शिवानी सात से खेल रही हैं। खेलो इंडिया यूथ गेम्स में टीम के साथ रोजाना अभ्यास किया। इससे रजत पदक जितवाने में उनका विशेष सहयोग रहा। 18 वर्ष की उम्र में ही कई स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। पिता बिजेंद्र रावल उनके कोच हैं। अंडर-14 खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही चार बार नेशनल खेल चुकी हैं। पहले कबड्डी खेलती थीं।

– कीर्ति : सनौली खंड के गांव जलालपुर-प्रथम की कीर्ति ने वॉलीबॉल टीम की कप्तानी करने हुए टीम को रजत पदक दिलवाया। कीर्ति ने खुद अभ्यास करने के साथ अच्छी कप्तानी साबित की है। अंडर-14 खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। सब जूनियर में कांस्य जीत चुकी हैं। पिता मजदूरी करते हैं। एशिया कैंप अंडर-20 के लिए भुवनेश्वर में अभ्यास कर रही हैं। कीर्ति का खेलो इंडिया में खेलने पर संदेह था फिर भी खेला और टीम को रजत पदक दिलवाया।

– अनु रानी : गांव जलालपुर प्रथम की ही रहने वाली अनु पिछले चार साल से वॉलीबॉल खेल रही हैं। खेलो इंडिया से पहले गांव में कोच बिजेंद्र रावल की देखरेख में अभ्यास करती थीं। स्कूल अंडर-14 में मेडल जीत चुकी हैं। पिता सतपाल का सपना है कि बेटी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बने। पंचकूला खेलो इंडिया कैंप में अभ्यास कर रही थी।

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