पीयू केंद्रीयकरण का मुद्दा गरमाया , प्रोफेसर ने हिमाचल की हिस्सेदारी का पक्ष रखा


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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के केंद्रीयकरण का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। हर दिन प्रोफेसर, विद्यार्थी और गैर शैक्षणिक कर्मचारी केंद्रीयकरण के मुद्दे को लेकर गृह मंत्रालय और पंजाब सरकार को पत्र लिख रहे हैं। हाल ही में पीयू के प्रो. मनु शर्मा ने पंजाब के सीएम को उनकी ओर से गृह मंत्रालय को पीयू के केंद्रीयकरण के विरोध में लिखे पत्र के जवाब में पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने पीयू पर पंजाब का एकाधिकार होने की बात को गलत ठहराया है और पीयू में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी होने की भी बात कही है।
प्रो. मनु शर्मा ने पत्र में लिखा है कि पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब की तत्कालीन राजधानी लाहौर से होशियारपुर और फिर चंडीगढ़ पंजाब की वर्तमान राजधानी में स्थानांतरित की गई थी। पंजाब सीएम का यह कथन आंशिक रूप से गलत है। भारत के विभाजन के बाद, पंजाब विश्वविद्यालय की स्थापना 1 अक्टूबर 1947 को सोलन (वर्तमान हिमाचल प्रदेश) में हुई थी और इसे पूर्वी पंजाब यूनिवर्सिटी कहा जाता था। शुरुआत में इसे मुख्य रूप से सोलन में एक छावनी में रखा गया था बाद में इसे एक नई यूनिवर्सिटी में स्थानांतरित कर दिया गया। नौ वर्षों के बाद चंडीगढ़ में वर्तमान परिसर बनाया गया और इसका नाम बदलकर पंजाब यूनिवर्सिटी कर दिया गया।
1947 से 1956 तक हिमाचल प्रदेश के सोलन में थी पीयू
1947 में देश की स्वतंत्रता के बाद 9 वर्षों के लिए पीयू 1947 से 1956 तक हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थित थी। पंजाब यूनिवर्सिटी की औपचारिक रूप से स्थापना 14 अक्टूबर 1882 को शिमला में सीनेट की पहली बैठक के आयोजन के साथ हुई थी इसलिए हिमाचल प्रदेश ने 1882 में पंजाब यूनिवर्सिटी (लाहौर) की औपचारिक स्थापना की मेजबानी की। स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक वर्षों में पंजाब यूनिवर्सिटी को न केवल राज्य सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय बल्कि पुनर्वास के लिए केंद्रीय मंत्रालय की ओर से भी वित्त पोषित किया गया था। हिमाचल प्रदेश भी पंजाब विश्वविद्यालय की समृद्ध विरासत/इतिहास साझा करता है इसलिए यह भी स्वीकार किए जाने का पात्र है।
सथ कार्यकर्ताओं ने एमएलए खैरा से की केंद्रीयकरण पर मुद्दे पर मुलाकात
पीयू के छात्र संगठन सथ की ओर से वीरवार को पंजाब के एमएलए सुखपाल खैरा से केंद्रीयकरण के मुद्दे पर मुलाकात की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने पीयू के केंद्रीयकरण पर चल रही चर्चा पर ध्यान देने और इस मुद्दे को पंजाब विधानसभा में उठाने की मांग रखी। छात्रों ने कहा कि पंजाब विधानसभा 24 जून से शुरू हो रही है इसलिए छात्रों की तरफ से उनके मुद्दे को विधानसभा में रखा जाए। पीयू का केंद्रीयकरण पंजाब स्वीकार नहीं करेगा। इस दौरान खैरा ने आश्वासन दिया कि वीरवार को कांग्रेस की होने वाली बैठक और आगामी विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। इस मौके पर सथ कार्यकर्ता चरणजीत सिंह, रिमलजोत सिंह, सुखविंदर सिंह, हरमनप्रीत सिंह, जोध सिंह, करणदीप सिंह, जपजीत सिंह, बल विंदर सिंह और प्रीतइंदर सिंह मौजूद रहे।

चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के केंद्रीयकरण का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। हर दिन प्रोफेसर, विद्यार्थी और गैर शैक्षणिक कर्मचारी केंद्रीयकरण के मुद्दे को लेकर गृह मंत्रालय और पंजाब सरकार को पत्र लिख रहे हैं। हाल ही में पीयू के प्रो. मनु शर्मा ने पंजाब के सीएम को उनकी ओर से गृह मंत्रालय को पीयू के केंद्रीयकरण के विरोध में लिखे पत्र के जवाब में पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने पीयू पर पंजाब का एकाधिकार होने की बात को गलत ठहराया है और पीयू में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी होने की भी बात कही है।

प्रो. मनु शर्मा ने पत्र में लिखा है कि पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब की तत्कालीन राजधानी लाहौर से होशियारपुर और फिर चंडीगढ़ पंजाब की वर्तमान राजधानी में स्थानांतरित की गई थी। पंजाब सीएम का यह कथन आंशिक रूप से गलत है। भारत के विभाजन के बाद, पंजाब विश्वविद्यालय की स्थापना 1 अक्टूबर 1947 को सोलन (वर्तमान हिमाचल प्रदेश) में हुई थी और इसे पूर्वी पंजाब यूनिवर्सिटी कहा जाता था। शुरुआत में इसे मुख्य रूप से सोलन में एक छावनी में रखा गया था बाद में इसे एक नई यूनिवर्सिटी में स्थानांतरित कर दिया गया। नौ वर्षों के बाद चंडीगढ़ में वर्तमान परिसर बनाया गया और इसका नाम बदलकर पंजाब यूनिवर्सिटी कर दिया गया।

1947 से 1956 तक हिमाचल प्रदेश के सोलन में थी पीयू

1947 में देश की स्वतंत्रता के बाद 9 वर्षों के लिए पीयू 1947 से 1956 तक हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थित थी। पंजाब यूनिवर्सिटी की औपचारिक रूप से स्थापना 14 अक्टूबर 1882 को शिमला में सीनेट की पहली बैठक के आयोजन के साथ हुई थी इसलिए हिमाचल प्रदेश ने 1882 में पंजाब यूनिवर्सिटी (लाहौर) की औपचारिक स्थापना की मेजबानी की। स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक वर्षों में पंजाब यूनिवर्सिटी को न केवल राज्य सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय बल्कि पुनर्वास के लिए केंद्रीय मंत्रालय की ओर से भी वित्त पोषित किया गया था। हिमाचल प्रदेश भी पंजाब विश्वविद्यालय की समृद्ध विरासत/इतिहास साझा करता है इसलिए यह भी स्वीकार किए जाने का पात्र है।

सथ कार्यकर्ताओं ने एमएलए खैरा से की केंद्रीयकरण पर मुद्दे पर मुलाकात

पीयू के छात्र संगठन सथ की ओर से वीरवार को पंजाब के एमएलए सुखपाल खैरा से केंद्रीयकरण के मुद्दे पर मुलाकात की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने पीयू के केंद्रीयकरण पर चल रही चर्चा पर ध्यान देने और इस मुद्दे को पंजाब विधानसभा में उठाने की मांग रखी। छात्रों ने कहा कि पंजाब विधानसभा 24 जून से शुरू हो रही है इसलिए छात्रों की तरफ से उनके मुद्दे को विधानसभा में रखा जाए। पीयू का केंद्रीयकरण पंजाब स्वीकार नहीं करेगा। इस दौरान खैरा ने आश्वासन दिया कि वीरवार को कांग्रेस की होने वाली बैठक और आगामी विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। इस मौके पर सथ कार्यकर्ता चरणजीत सिंह, रिमलजोत सिंह, सुखविंदर सिंह, हरमनप्रीत सिंह, जोध सिंह, करणदीप सिंह, जपजीत सिंह, बल विंदर सिंह और प्रीतइंदर सिंह मौजूद रहे।

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Written by Haryanacircle

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