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पिता का दर्जा भगवान से भी बड़ा होता है। पिता ही वह शख्स होता है जो अपनी संतान को अपने से आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है। पिता द्वारा दिखाए गए सत्य और सेवा के मार्ग पर चलकर ही राजनीति को जन-सेवा का माध्यम बनाया है।
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पिता का दर्जा भगवान से भी बड़ा : सत्यवीर

