पांचवें पायदान पर पहुंचा जिला रेवाड़ी


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शिक्षा बोर्ड की दसवीं की वार्षिक परीक्षा के शुक्रवार को घोषित परिणाम में जिले का प्रदेश में 5वां स्थान रहा। इस साल जिले की 4780 लड़कियां और 5234 लड़के परीक्षा में बैठे जिनमें से 4001 लड़कियां और 4303 लड़के उत्तीर्ण हुए जबकि 260 लड़कियों और 238 लड़कों को अगली अनुपूरक परीक्षा देनी होगी। लड़कियों का पास प्रतिशत 83.70 जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 82.21 दर्ज किया गया।
प्रदेश और जिले की वरीयता सूची में लड़कियां टॉपर बनीं। लड़कियों का पास प्रतिशत जहां 83.70 प्रतिशत दर्ज हुआ वहीं लड़के इस मामले में पिछड़ते हुए 82.21 प्रतिशत पर ठहर गए।
जिले के इस परीक्षा के परिणाम पर नजर डालें तो स्वयंपाठी छात्रों ने इस बार प्रदेश में 7वां स्थान हासिल किया। इस वर्ग में कुल 8 यानी 3 लड़की और 5 लड़कों ने यह परीक्षा दी और सभी पास हुए और इनका परिणाम शत प्रतिशत रहा।
आगे बेहतरी के लिए कदम उठाएगा शिक्षा विभाग
दसवीं की बोर्ड के परीक्षा परिणाम में जिले के छात्रों के प्रदर्शन को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी नसीब सिंह ने कहा कि आगे बेहतरी के लिए शिक्षा विभाग नए कदम उठाएगा। शिक्षा में कमजोर बच्चों को अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर अन्य बच्चों के समानांतर लाने के लिए प्रयास किया जाए। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है या फिर किसी कारणवश पाठयक्रम का दोहराव दो – तीन बार नहीं हो पाया उस पर ध्यान दिया जाएगा। बच्चों की स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए मनोविज्ञान के माध्यम से बच्चों को प्रेरित किया जाएगा ताकि वे जीवन की दौड़ में कभी न पिछड़ें।
जिले के ये रहे टॉपर
जिला स्तर पर 8 टॉपरों की सूची में सबसे पहला नाम कशिश मेहता का है जिन्होंने 495 अंक लेकर प्रथम, भावना यादव ने 494 अंक लेकर द्वितीय जबकि 494 अंक लेकर ही खुशी यादव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है। पहली दो लड़कियां शिवा स्कूल डहीना की जबकि तीसरी लड़की जीवन ज्योति स्कूल मोतला कलां से संबंधित है। इनके बाद 493 अंक लेकर क्रमश: सनराइज स्कूल मस्तापुर की महक, एसकेजी भाकली का लक्की यादव, संत कबीर स्कूल अलावलपुर की अंजलि, एसडी स्कूल बोलनी का दीपक और श्रीकृष्णा स्कूल हांसाका के कार्तिक शर्मा ने इस सूची में अपना नाम दर्ज कराया है। खास यह है कि इस सूची में 8 में से 6 लड़कियां जबकि दो लड़के हैं।
टॉपर के मन में छुपी बातें
– स्कूल से घर आने पर खुद पढ़ाई करती हूं। शिक्षकों की बदौलत सफलता मिली। मेडिकल लाइन में जाना चाहती हूं। मेरे माता-पिता और दादा-दादी के आशीर्वाद ने कभी मेरा मनोबल कम नहीं होने दिया। मेरे दादा बीरेंद्र सिंह 1983 के बीए पास हैं। मेरे पिता मनजीत बीकॉम जबकि मां दस जमा दो पास हैं। दादी भी आठवीं पास हैं। एक भाई गौरव अब 12वीं की पढ़ाई करेगा।
– कशिश।
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– आगे एमबीबीएस करके डॉक्टर बनना चाहती हूं। रोजाना नियमित 6 – 7 घंटे पढ़ती हूं। मोबाइल से दूरी भली है। पौधे लगाकर पृथ्वी पर ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाया जाए तभी पर्यावरण संतुलन हो सकेगा। खुद को फिट रखने के लिए आधा घंटा योग करती हूं। पौष्टिक भोजन लेती हूं। अखबार पत्रिकाएं पढ़ती हूं। ये दुनिया भर की जानकारी से अपडेट करते हैं। स्कूल में कक्षा प्रभारी सामान्य ज्ञान के प्रश्न नोटबुक में लिखवाते हैं, उन पर हम सब बैठकर चर्चा करते हैं। – भावना यादव।
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– मेरी चाहत आईएएस बनने की है। सभी लोगों की सेवा करना चाहती हूं ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ अधिकाधिक लोगों तक पहुंच सके। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देना चाहती हूं। पर्यावरण के प्रति रुचि है। पुस्तकें पढ़ते रहना अच्छा लगता है। खूब पढ़ना चाहती हूं। पूरा परिवार और विद्यालय के गुरुजन इस उपलब्धि के हकदार हैं। मेरी मेहनत भी इसमें शामिल है। – खुशी यादव ।
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जिला शिक्षा विभाग का प्रत्येक शिक्षक अपनी मेहनत पर मंजिल हासिल करने की क्षमता रखता है। दसवीं की परीक्षा में जिले का परिणाम गुणात्मक सुधार लाया है। इस बार हम 83 प्रतिशत तक पहुंचे हैं। बोर्ड का परिणाम 73 प्रतिशत रहा। शिक्षकों ने मेहनत कराई। आंकड़े के आधार पर बेशक हम कुछ पीछे रहे मगर सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है। निश्चित तौर पर अगले साल अतिरिक्त मेहनत करेंगे और बच्चों के भविष्य को संवारने का काम निरंतर जारी रहेगा। नई शिक्षा नीति को लेकर निपुण हरियाणा के प्रशिक्षण हमारे शिक्षकों का मनोबल अधिक बढ़ाएंगे, ऐसी मुझे आशा है। प्रदेश और की जिले की वरीयता सूची में अपनी मेधा के बल पर जगह बनाने वाले सभी बच्चों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।
– नसीब सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी।

शिक्षा बोर्ड की दसवीं की वार्षिक परीक्षा के शुक्रवार को घोषित परिणाम में जिले का प्रदेश में 5वां स्थान रहा। इस साल जिले की 4780 लड़कियां और 5234 लड़के परीक्षा में बैठे जिनमें से 4001 लड़कियां और 4303 लड़के उत्तीर्ण हुए जबकि 260 लड़कियों और 238 लड़कों को अगली अनुपूरक परीक्षा देनी होगी। लड़कियों का पास प्रतिशत 83.70 जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 82.21 दर्ज किया गया।

प्रदेश और जिले की वरीयता सूची में लड़कियां टॉपर बनीं। लड़कियों का पास प्रतिशत जहां 83.70 प्रतिशत दर्ज हुआ वहीं लड़के इस मामले में पिछड़ते हुए 82.21 प्रतिशत पर ठहर गए।

जिले के इस परीक्षा के परिणाम पर नजर डालें तो स्वयंपाठी छात्रों ने इस बार प्रदेश में 7वां स्थान हासिल किया। इस वर्ग में कुल 8 यानी 3 लड़की और 5 लड़कों ने यह परीक्षा दी और सभी पास हुए और इनका परिणाम शत प्रतिशत रहा।

आगे बेहतरी के लिए कदम उठाएगा शिक्षा विभाग

दसवीं की बोर्ड के परीक्षा परिणाम में जिले के छात्रों के प्रदर्शन को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी नसीब सिंह ने कहा कि आगे बेहतरी के लिए शिक्षा विभाग नए कदम उठाएगा। शिक्षा में कमजोर बच्चों को अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर अन्य बच्चों के समानांतर लाने के लिए प्रयास किया जाए। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है या फिर किसी कारणवश पाठयक्रम का दोहराव दो – तीन बार नहीं हो पाया उस पर ध्यान दिया जाएगा। बच्चों की स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए मनोविज्ञान के माध्यम से बच्चों को प्रेरित किया जाएगा ताकि वे जीवन की दौड़ में कभी न पिछड़ें।

जिले के ये रहे टॉपर

जिला स्तर पर 8 टॉपरों की सूची में सबसे पहला नाम कशिश मेहता का है जिन्होंने 495 अंक लेकर प्रथम, भावना यादव ने 494 अंक लेकर द्वितीय जबकि 494 अंक लेकर ही खुशी यादव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है। पहली दो लड़कियां शिवा स्कूल डहीना की जबकि तीसरी लड़की जीवन ज्योति स्कूल मोतला कलां से संबंधित है। इनके बाद 493 अंक लेकर क्रमश: सनराइज स्कूल मस्तापुर की महक, एसकेजी भाकली का लक्की यादव, संत कबीर स्कूल अलावलपुर की अंजलि, एसडी स्कूल बोलनी का दीपक और श्रीकृष्णा स्कूल हांसाका के कार्तिक शर्मा ने इस सूची में अपना नाम दर्ज कराया है। खास यह है कि इस सूची में 8 में से 6 लड़कियां जबकि दो लड़के हैं।

टॉपर के मन में छुपी बातें

– स्कूल से घर आने पर खुद पढ़ाई करती हूं। शिक्षकों की बदौलत सफलता मिली। मेडिकल लाइन में जाना चाहती हूं। मेरे माता-पिता और दादा-दादी के आशीर्वाद ने कभी मेरा मनोबल कम नहीं होने दिया। मेरे दादा बीरेंद्र सिंह 1983 के बीए पास हैं। मेरे पिता मनजीत बीकॉम जबकि मां दस जमा दो पास हैं। दादी भी आठवीं पास हैं। एक भाई गौरव अब 12वीं की पढ़ाई करेगा।

– कशिश।

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– आगे एमबीबीएस करके डॉक्टर बनना चाहती हूं। रोजाना नियमित 6 – 7 घंटे पढ़ती हूं। मोबाइल से दूरी भली है। पौधे लगाकर पृथ्वी पर ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाया जाए तभी पर्यावरण संतुलन हो सकेगा। खुद को फिट रखने के लिए आधा घंटा योग करती हूं। पौष्टिक भोजन लेती हूं। अखबार पत्रिकाएं पढ़ती हूं। ये दुनिया भर की जानकारी से अपडेट करते हैं। स्कूल में कक्षा प्रभारी सामान्य ज्ञान के प्रश्न नोटबुक में लिखवाते हैं, उन पर हम सब बैठकर चर्चा करते हैं। – भावना यादव।

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– मेरी चाहत आईएएस बनने की है। सभी लोगों की सेवा करना चाहती हूं ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ अधिकाधिक लोगों तक पहुंच सके। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देना चाहती हूं। पर्यावरण के प्रति रुचि है। पुस्तकें पढ़ते रहना अच्छा लगता है। खूब पढ़ना चाहती हूं। पूरा परिवार और विद्यालय के गुरुजन इस उपलब्धि के हकदार हैं। मेरी मेहनत भी इसमें शामिल है। – खुशी यादव ।

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जिला शिक्षा विभाग का प्रत्येक शिक्षक अपनी मेहनत पर मंजिल हासिल करने की क्षमता रखता है। दसवीं की परीक्षा में जिले का परिणाम गुणात्मक सुधार लाया है। इस बार हम 83 प्रतिशत तक पहुंचे हैं। बोर्ड का परिणाम 73 प्रतिशत रहा। शिक्षकों ने मेहनत कराई। आंकड़े के आधार पर बेशक हम कुछ पीछे रहे मगर सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है। निश्चित तौर पर अगले साल अतिरिक्त मेहनत करेंगे और बच्चों के भविष्य को संवारने का काम निरंतर जारी रहेगा। नई शिक्षा नीति को लेकर निपुण हरियाणा के प्रशिक्षण हमारे शिक्षकों का मनोबल अधिक बढ़ाएंगे, ऐसी मुझे आशा है। प्रदेश और की जिले की वरीयता सूची में अपनी मेधा के बल पर जगह बनाने वाले सभी बच्चों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

– नसीब सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी।

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Written by Haryanacircle

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