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पंजाब के मुख्यमंत्री मान ने बाबा फरीद विश्वविद्यालय के कुलपति का इस्तीफा स्वीकार किया


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भाषा | Updated: Aug 11, 2022, 6:17 PM

चंडीगढ़, 11 अगस्त (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाबा फरीद स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राज बहादुर का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है जिन्हें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने निरीक्षण के दौरान एक अस्पताल में गंदे गद्दे पर लेटने के लिए कथित तौर पर मजबूर किया था। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय के कुलपति का प्रभार अब निदेशक, चिकित्सा शिक्षा को दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस्तीफा स्वीकार करने के बाद इसे पंजाब के राज्यपाल को भेज दिया। स्वास्थ्य मंत्री चेतन सिंह जोरमाजरा की वजह से ‘‘अपमानित’’ महसूस करने के कारण डॉ

 

चंडीगढ़, 11 अगस्त (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाबा फरीद स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राज बहादुर का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है जिन्हें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने निरीक्षण के दौरान एक अस्पताल में गंदे गद्दे पर लेटने के लिए कथित तौर पर मजबूर किया था।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय के कुलपति का प्रभार अब निदेशक, चिकित्सा शिक्षा को दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस्तीफा स्वीकार करने के बाद इसे पंजाब के राज्यपाल को भेज दिया।

स्वास्थ्य मंत्री चेतन सिंह जोरमाजरा की वजह से ‘‘अपमानित’’ महसूस करने के कारण डॉ राज बहादुर ने अपना इस्तीफा दे दिया था। यह घटना पिछले महीने हुई थी जब जोरमाजरा विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का निरीक्षण कर रहे थे।

इस घटना का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर सामने आया जिसमें दिखा कि जोरमाजरा ने अनुभवी डॉक्टर के कंधे पर हाथ रखकर अस्पताल में एक गद्दे की ‘‘खराब और गंदी स्थिति’’ की ओर इशारा किया था। इसके बाद मंत्री द्वारा डॉ बहादुर को उसी गद्दे पर लेटने के लिए कथित तौर पर मजबूर करते देखा गया था।

घटना के बाद डॉ बहादुर ने पंजाब के मुख्यमंत्री को ‘‘अपमान’’ से अवगत कराया और अनुरोध किया कि उन्हें सेवा से मुक्त किया जाए क्योंकि काम के लिए अनुकूल माहौल नहीं है। इस घटना ने रोष पैदा कर दिया और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सहित डॉक्टरों के विभिन्न निकायों ने स्वास्थ्य मंत्री के व्यवहार को लेकर उनकी आलोचना की थी और राज्य मंत्रिमंडल से उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी।

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