पंचगव्य औषधियों पर होगा रिसर्च, दो संस्थाओं के साथ हुआ एमओयू


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श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय का मंगलवार को हरियाणा गौवंश अनुसंधान केंद्र सुख दर्शनपुर (हरियाणा गौ सेवा आयोग) और नूंह के कामधेनु आरोग्य संस्थान के साथ पंचगव्य आधारित औषधियों पर रिसर्च और रोजगार स्वावलंबन के लिए गाय के गोबर आधारित खाद से औषधीय पौधे उपजाने, उनकी गुणवत्ता जांच पर काम करने के लिए एमओयू हुआ है। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव कुमार और दोनों संस्थाओं के चेयरमैन उपस्थित रहे।
कुलपति डॉ. बलदेव कुमार ने संस्थाओं के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि गौवंश के संवर्धन और उत्पाद पर मिलकर अच्छा काम किया जाएगा। जिसमें शोध के सभी पैरामिटर आयुर्वेद और भारतीय परंपरा के अनुसार होंगे। विश्वविद्यालय का मकसद वैदिक परंपरा और विज्ञान को बढ़ावा देना है। पंचगव्य से बने पदार्थ रसायन मुक्त होने के कारण आरोग्य दायी होते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों संस्थाओं के साथ मिलकर पंचगव्य के अधिकतम उपयोग पर बल दिया जाएगा। इसके लिए बाकायदा योजना बनाई जानी है और कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। गौशाला में औषधियों के निर्माण के लिए तकनीकी योग्यता विकसित की जाएगी और गौशाला में पंचकर्म व आयुर्वेदिक ओपीडी खोलने की योजना है। इसके साथ ही आयुर्वेदिक पंचगव्य आधारित दवाइयों के शोध व मार्केटिंग पहलू पर काम करते हुए टेक्नोलॉजी विकसित की जाएगी। रिसर्च एंड इनोवेशन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. रजनीकांत ने कहा कि पंचगव्य आधारित उत्पाद को रोजगार के अवसरों में बदला जा सकता है। इसके लिए पंचगव्य आधारित उत्पाद बनाने के लिए युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि देश का युवा स्वावलंबन की ओर उन्मुख हो। शोध कार्य तेज गति से हों और किसी प्रकार की कोई रुकावट न आए इसके लिए पंचगव्य आधारित शोध कार्य हेतु राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अनुदान प्राप्त करने के लिए संयुक्त योजना बनाई जाएगी। इस अवसर पर कुल सचिव डॉ. नरेश कुमार भार्गव, हरियाणा गौ सेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग और नूंह कामधेनु आरोग्य संस्थान के चेयरमैन एसपी गुप्ता मौजूद रहे।

श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय का मंगलवार को हरियाणा गौवंश अनुसंधान केंद्र सुख दर्शनपुर (हरियाणा गौ सेवा आयोग) और नूंह के कामधेनु आरोग्य संस्थान के साथ पंचगव्य आधारित औषधियों पर रिसर्च और रोजगार स्वावलंबन के लिए गाय के गोबर आधारित खाद से औषधीय पौधे उपजाने, उनकी गुणवत्ता जांच पर काम करने के लिए एमओयू हुआ है। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव कुमार और दोनों संस्थाओं के चेयरमैन उपस्थित रहे।

कुलपति डॉ. बलदेव कुमार ने संस्थाओं के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि गौवंश के संवर्धन और उत्पाद पर मिलकर अच्छा काम किया जाएगा। जिसमें शोध के सभी पैरामिटर आयुर्वेद और भारतीय परंपरा के अनुसार होंगे। विश्वविद्यालय का मकसद वैदिक परंपरा और विज्ञान को बढ़ावा देना है। पंचगव्य से बने पदार्थ रसायन मुक्त होने के कारण आरोग्य दायी होते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों संस्थाओं के साथ मिलकर पंचगव्य के अधिकतम उपयोग पर बल दिया जाएगा। इसके लिए बाकायदा योजना बनाई जानी है और कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। गौशाला में औषधियों के निर्माण के लिए तकनीकी योग्यता विकसित की जाएगी और गौशाला में पंचकर्म व आयुर्वेदिक ओपीडी खोलने की योजना है। इसके साथ ही आयुर्वेदिक पंचगव्य आधारित दवाइयों के शोध व मार्केटिंग पहलू पर काम करते हुए टेक्नोलॉजी विकसित की जाएगी। रिसर्च एंड इनोवेशन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. रजनीकांत ने कहा कि पंचगव्य आधारित उत्पाद को रोजगार के अवसरों में बदला जा सकता है। इसके लिए पंचगव्य आधारित उत्पाद बनाने के लिए युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि देश का युवा स्वावलंबन की ओर उन्मुख हो। शोध कार्य तेज गति से हों और किसी प्रकार की कोई रुकावट न आए इसके लिए पंचगव्य आधारित शोध कार्य हेतु राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अनुदान प्राप्त करने के लिए संयुक्त योजना बनाई जाएगी। इस अवसर पर कुल सचिव डॉ. नरेश कुमार भार्गव, हरियाणा गौ सेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग और नूंह कामधेनु आरोग्य संस्थान के चेयरमैन एसपी गुप्ता मौजूद रहे।

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Written by Haryanacircle

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