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नियमों का उल्लंघन कर की गई रजिस्ट्रियों की जांच करेगी कमेटी


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पलवल। रजिस्ट्रियों में अनियमितताओं की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। जिला उपायुक्त के नेतृत्व में गठित कमेटी एक अप्रैल 2010 से लेकर 31 मार्च 2017 के बीच हुई रजिस्ट्रियों की जांच करेगी। कमेटी में तीन अधिकारी, छह लिपिक सहित कर्मचारियों को शामिल किया गया है। कमेटी हरियाणा शहरी विकास एवं विनियम अधिनियम 1975 की धारा 7ए तहत नियमों का उल्लंघन के दायरे में आने वाली रजिस्ट्रियों की जांच करेगी। उक्त अवधि के दौरान एनओसी के बिना हुई रजिस्ट्रियों तथा रजिस्ट्री करने वाले तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी व रजिस्ट्री क्लर्क की जानकारी जुटाएगी।
विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने साल 2010 से 2017 के बीच हुई रजिस्ट्रियों की जांच करवाने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की इसी घोषणा के अनुरूप पलवल में रजिस्ट्रियों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। जिला उपायुक्त कृष्ण कुमार के नेतृत्व में गठित कमेटी में जिला राजस्व अधिकारी सुशील कुमार, जिला नगर योजनाकार देवेंद्र पाल व स्टांप ऑडिटर को सदस्य बनाया गया है। जांच के लिए उपायुक्त कार्यालय से लिपिक ओमप्रकाश, भरतपाल, हरकेश, मोहित, एसडीएम कार्यालय से लिपिक दीपक सहरावत और तहसील कार्यालय से मोहन को कमेटी में शामिल किया गया है। रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी रजिस्ट्रार क्लर्क मजलिस खान को सौंपी गई है। उपायुक्त कार्यालय के उप अधीक्षक गजेंद्र सिंह एवं अजय कुमार को ऑवर आल इंचार्ज बनाया गया है। जांच रिपोर्ट 15 दिनों में प्रस्तुत करनी होगी। जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त संजय जून के माध्यम से राज्य सरकार को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आरोपी अधिकारियों व कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।
कोरोना काल के दौरान कंट्रोल एरिया में कृषि योग्य जमीन को रिहायशी क्षेत्र दिखाकर रजिस्ट्रियां करवाई गईं थी। पूरे प्रदेश में नियमों का उल्लंघन कर करीब 64 हजार रजिस्ट्रियों में गड़बड़ी पाई गईं। इनमें फरीदाबाद मंडल के जिला पलवल, फरीदाबाद व नूंह में 18,358 रजिस्ट्रियां शामिल हैं। हरियाणा सरकार ने गड़बड़ी के आरोप में सब-रजिस्ट्रार, संयुक्त सब-रजिस्ट्रार, लिपिकों व पटवारियों को नोटिस दे चुकी है। अब मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट के बाद राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

पलवल। रजिस्ट्रियों में अनियमितताओं की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। जिला उपायुक्त के नेतृत्व में गठित कमेटी एक अप्रैल 2010 से लेकर 31 मार्च 2017 के बीच हुई रजिस्ट्रियों की जांच करेगी। कमेटी में तीन अधिकारी, छह लिपिक सहित कर्मचारियों को शामिल किया गया है। कमेटी हरियाणा शहरी विकास एवं विनियम अधिनियम 1975 की धारा 7ए तहत नियमों का उल्लंघन के दायरे में आने वाली रजिस्ट्रियों की जांच करेगी। उक्त अवधि के दौरान एनओसी के बिना हुई रजिस्ट्रियों तथा रजिस्ट्री करने वाले तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी व रजिस्ट्री क्लर्क की जानकारी जुटाएगी।

विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने साल 2010 से 2017 के बीच हुई रजिस्ट्रियों की जांच करवाने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की इसी घोषणा के अनुरूप पलवल में रजिस्ट्रियों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। जिला उपायुक्त कृष्ण कुमार के नेतृत्व में गठित कमेटी में जिला राजस्व अधिकारी सुशील कुमार, जिला नगर योजनाकार देवेंद्र पाल व स्टांप ऑडिटर को सदस्य बनाया गया है। जांच के लिए उपायुक्त कार्यालय से लिपिक ओमप्रकाश, भरतपाल, हरकेश, मोहित, एसडीएम कार्यालय से लिपिक दीपक सहरावत और तहसील कार्यालय से मोहन को कमेटी में शामिल किया गया है। रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी रजिस्ट्रार क्लर्क मजलिस खान को सौंपी गई है। उपायुक्त कार्यालय के उप अधीक्षक गजेंद्र सिंह एवं अजय कुमार को ऑवर आल इंचार्ज बनाया गया है। जांच रिपोर्ट 15 दिनों में प्रस्तुत करनी होगी। जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त संजय जून के माध्यम से राज्य सरकार को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आरोपी अधिकारियों व कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।

कोरोना काल के दौरान कंट्रोल एरिया में कृषि योग्य जमीन को रिहायशी क्षेत्र दिखाकर रजिस्ट्रियां करवाई गईं थी। पूरे प्रदेश में नियमों का उल्लंघन कर करीब 64 हजार रजिस्ट्रियों में गड़बड़ी पाई गईं। इनमें फरीदाबाद मंडल के जिला पलवल, फरीदाबाद व नूंह में 18,358 रजिस्ट्रियां शामिल हैं। हरियाणा सरकार ने गड़बड़ी के आरोप में सब-रजिस्ट्रार, संयुक्त सब-रजिस्ट्रार, लिपिकों व पटवारियों को नोटिस दे चुकी है। अब मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट के बाद राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

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