निगम के गोताखोर रक्षक बनने के साथ प्रदेश स्तरीय तैराकी और नाविक प्रतियोगिता में भी अव्वल


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पानीपत। नगर निगम के गोताखोर डूबतों को बचाने वाले रक्षक तो हैं ही साथ में प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत कर निगम का नाम रोशन कर रहे हैं। जिले में सिर्फ निगम के ही चार गोताखोर हैं। जो जान पर खेलकर दिल्ली पैरलल नहर से लेकर यमुना नदी तक में डूबने वालों को बचाने और डूब चुके शवों को निकालने का काम करते हैं। अब तक करीब 25 डूबते लोगों निकालकर जीवनदान दे चुके हैं। इसके अलावा पानी में डूब चुके सैकड़ों शवों को भी उन्होंने ही निकाला। अपनी बहादुरी और जिंदादिली के साथ अब ये गोताखोर कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में आयोजित राज्य स्तरीय कैंप प्रतियोगिताओं में ट्रॉफी और पदक जीतकर लौटे हैं।
खास बात यह है कि ये चारों गोताखोर निगम के कच्चे कर्मचारी हैं। जो बापौली ब्लॉक के मिर्जापुर गांव के निवासी हैं। इनमें धर्मेंद्र, शिव कुमार, अमित और कुलदीप हैं। ये प्रतियोगिताओं में खेल से लेकर किसी जान बचाने के लिए एक टीम की तरह काम करते हैं और जीत दर्ज करने के बाद ही लौटते हैं। अमर उजाला से बातचीत में गोताखोरों ने बताया कि हर वर्ष बाढ़ आपदा प्रबंधन की ओर से कैंप प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इनमें प्रदेश भर के गोताखोर भाग लेेते हैं। इस बार कुरुक्षेत्र में 18 से 23 अप्रैल को यह प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इसमें चारों ने पदक जीतकर प्रदेशभर में पानीपत निगम का नाम रोशन किया। इसके बाद छह से 10 जून तक यमुनानगर के हथनीकुंड बैराज बांध पर फ्लड रिलीफ कैंप लगाया गया। इसमें भी चारों ने तैराकी में पदक और नाव संचालन में ट्राफी जीती। विशेष ये रहा कि चारों ने प्रदेश भर के गोताखोरों को पछाड़ते हुए पहले दूसरे और तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जिला प्रशासन की ओर से डीआरओ ने इनका पानीपत पहुंचने पर स्वागत भी किया। अब ये अपनी ट्राफी निगम को भेंट करना चाहते हैं।
इन्होंने जीते ये पदक
राज्य स्तरीय यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में आयोजित की गई इन कैंप प्रतियोगिताओं में कुलदीप ने प्रथम स्थान प्राप्त किया शिवकुमार दूसरे स्थान पर रहे जबकि धर्मेंद्र ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा अमित ने कुरुक्षेत्र की प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जबकि चारों ने मिलकर नाव चलाने में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए ट्राफी जीती है।
24 घंटे रहते हैं ऑन-ड्यूटी
इन गोताखोरों ने बताया कि किसी भी आपातकालीन समय इनकी ड्यूटी 24 घंटे की हो जाती है। बात यमुना नदी की हो या किसी तालाब, जोहड़ या दिल्ली पैरलल नहरों की हो ये पूरे जिले को कवर करते हैं। खास तौर पर यमुना नदी पर आयोजित होने वाले मेलों में इनकी ड्यूटी लगाई जाती है ताकि अगर कोई पानी में डूबने लगे तो ये उसे निकाल सकें। अब तक ये पानी से करीब 30 लोगों को जिंदा निकाल चुके हैं वहीं, सैकड़ों डूब चुके लोगों के शव ढूंढ चुके हैं।

पानीपत। नगर निगम के गोताखोर डूबतों को बचाने वाले रक्षक तो हैं ही साथ में प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत कर निगम का नाम रोशन कर रहे हैं। जिले में सिर्फ निगम के ही चार गोताखोर हैं। जो जान पर खेलकर दिल्ली पैरलल नहर से लेकर यमुना नदी तक में डूबने वालों को बचाने और डूब चुके शवों को निकालने का काम करते हैं। अब तक करीब 25 डूबते लोगों निकालकर जीवनदान दे चुके हैं। इसके अलावा पानी में डूब चुके सैकड़ों शवों को भी उन्होंने ही निकाला। अपनी बहादुरी और जिंदादिली के साथ अब ये गोताखोर कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में आयोजित राज्य स्तरीय कैंप प्रतियोगिताओं में ट्रॉफी और पदक जीतकर लौटे हैं।

खास बात यह है कि ये चारों गोताखोर निगम के कच्चे कर्मचारी हैं। जो बापौली ब्लॉक के मिर्जापुर गांव के निवासी हैं। इनमें धर्मेंद्र, शिव कुमार, अमित और कुलदीप हैं। ये प्रतियोगिताओं में खेल से लेकर किसी जान बचाने के लिए एक टीम की तरह काम करते हैं और जीत दर्ज करने के बाद ही लौटते हैं। अमर उजाला से बातचीत में गोताखोरों ने बताया कि हर वर्ष बाढ़ आपदा प्रबंधन की ओर से कैंप प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इनमें प्रदेश भर के गोताखोर भाग लेेते हैं। इस बार कुरुक्षेत्र में 18 से 23 अप्रैल को यह प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इसमें चारों ने पदक जीतकर प्रदेशभर में पानीपत निगम का नाम रोशन किया। इसके बाद छह से 10 जून तक यमुनानगर के हथनीकुंड बैराज बांध पर फ्लड रिलीफ कैंप लगाया गया। इसमें भी चारों ने तैराकी में पदक और नाव संचालन में ट्राफी जीती। विशेष ये रहा कि चारों ने प्रदेश भर के गोताखोरों को पछाड़ते हुए पहले दूसरे और तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जिला प्रशासन की ओर से डीआरओ ने इनका पानीपत पहुंचने पर स्वागत भी किया। अब ये अपनी ट्राफी निगम को भेंट करना चाहते हैं।

इन्होंने जीते ये पदक

राज्य स्तरीय यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में आयोजित की गई इन कैंप प्रतियोगिताओं में कुलदीप ने प्रथम स्थान प्राप्त किया शिवकुमार दूसरे स्थान पर रहे जबकि धर्मेंद्र ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा अमित ने कुरुक्षेत्र की प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जबकि चारों ने मिलकर नाव चलाने में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए ट्राफी जीती है।

24 घंटे रहते हैं ऑन-ड्यूटी

इन गोताखोरों ने बताया कि किसी भी आपातकालीन समय इनकी ड्यूटी 24 घंटे की हो जाती है। बात यमुना नदी की हो या किसी तालाब, जोहड़ या दिल्ली पैरलल नहरों की हो ये पूरे जिले को कवर करते हैं। खास तौर पर यमुना नदी पर आयोजित होने वाले मेलों में इनकी ड्यूटी लगाई जाती है ताकि अगर कोई पानी में डूबने लगे तो ये उसे निकाल सकें। अब तक ये पानी से करीब 30 लोगों को जिंदा निकाल चुके हैं वहीं, सैकड़ों डूब चुके लोगों के शव ढूंढ चुके हैं।

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Written by Haryanacircle

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