नार्वे में पूरी तरह से डिवाइस की तकनीक से रूबरू टीम


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यमुनानगर। प्रदेश सरकार यूरोप की तर्ज पर हरियाणा की सड़कों पर भी इलेक्ट्रिक बसों को दौड़ने की तैयारी कर रही है। अगर ये बसें चली तो यहां की सड़कें प्रदूषण मुक्त हो जाएंगी और डीजल की खपत भी बचेगी।
दरअसल, परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा, दो विधायकों और तीन अधिकारियों के साथ यूरोप के नार्वे में इलेक्ट्रिक व्हीकल मेले में भाग लेने के लिए गए थे। वहां मंत्री ने इलेक्ट्रिक बस में सफर किया साथ ही वे इलेक्ट्रिक बसों की तकनीक से भी रूबरू हुए। यूरोप से लौटने के बाद परिवहन मंत्री ने 800 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरियाणा में भी चलाने का एलान किया।
नार्वे में बहुत कुछ सीखा : परिवहन मंत्री
मंत्री मूलचंद शर्मा ने बताया कि उन्होंने देखा नार्वे में डीजल व पेट्रोल की कोई कमी नहीं है। बावजूद इसके वहां इलेक्ट्रिक बसों को ही तवज्जो दी जा रही है। चूंकि क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए वहां इलेक्ट्रिक बसों की पॉलिसी को अपनाया है। इसी सिस्टम को देखने के लिए दूसरे देशों के मंत्री और अधिकारी भी वहां आए हुए थे। मंत्री ने बताया कि उनकी टीम ने वहां बसों का बैटरी स्टेशन, डबल डेकर बसें और उनकी तकनीक देखी। उनके अनुसार ऐसे में पेट्रोल-डीजल की जगह इलेक्ट्रिक व्हीकल बेहतर विकल्प है। इससे प्रदूषण बिल्कुल भी नहीं बढ़ेगा।
चार्ज करने पर 200 किमी से अधिक चलेगी बस
राज्य की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों को दौड़ाने का पायलट प्रोजेक्ट है। बताया जा रहा है अगर नई इलेक्ट्रिक बसें आई तो उसकी लंबाई 12 मीटर होगी जोकि एक बार चार्ज करने पर 200 किलोमीटर से अधिक चलेंगी। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं इसी साल नवंबर तक राज्य सरकार इन बसों को चलाने की तैयारी में जुटी है। वहीं अगर इलेक्ट्रिक बसें चलीं तो यात्रियों को सुखद यात्रा का अहसास होगा।
ऑनरूट हैं 2857 बसें
मौजूदा समय में हरियाणा में 3252 रोडवेज बसों में से 2857 बसें ही ऑनरूट हैं। जिनमें 15 फीसदी बसें ऐसे जो हांफ रही और रिटायर होने के कगार पर हैं। इन बसों में औसतन 15 लाख यात्री ही सफर कर पा रहे हैं। जबकि लॉकडाउन से पूर्व औसतन 21 लाख यात्री इन बसों में सफर किया करते थे लेकिन बसों की भारी कमी हो जाने से यात्रियों की संख्या भी घट गई। ऑल हरियाणा परिवहन कर्मचारी संघ के राज्य महासचिव प्रताप भनवाल का कहना है आबादी के हिसाब से डिपो में लगभग 14 हजार बसों की आवश्यकता है।

यमुनानगर। प्रदेश सरकार यूरोप की तर्ज पर हरियाणा की सड़कों पर भी इलेक्ट्रिक बसों को दौड़ने की तैयारी कर रही है। अगर ये बसें चली तो यहां की सड़कें प्रदूषण मुक्त हो जाएंगी और डीजल की खपत भी बचेगी।

दरअसल, परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा, दो विधायकों और तीन अधिकारियों के साथ यूरोप के नार्वे में इलेक्ट्रिक व्हीकल मेले में भाग लेने के लिए गए थे। वहां मंत्री ने इलेक्ट्रिक बस में सफर किया साथ ही वे इलेक्ट्रिक बसों की तकनीक से भी रूबरू हुए। यूरोप से लौटने के बाद परिवहन मंत्री ने 800 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरियाणा में भी चलाने का एलान किया।

नार्वे में बहुत कुछ सीखा : परिवहन मंत्री

मंत्री मूलचंद शर्मा ने बताया कि उन्होंने देखा नार्वे में डीजल व पेट्रोल की कोई कमी नहीं है। बावजूद इसके वहां इलेक्ट्रिक बसों को ही तवज्जो दी जा रही है। चूंकि क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए वहां इलेक्ट्रिक बसों की पॉलिसी को अपनाया है। इसी सिस्टम को देखने के लिए दूसरे देशों के मंत्री और अधिकारी भी वहां आए हुए थे। मंत्री ने बताया कि उनकी टीम ने वहां बसों का बैटरी स्टेशन, डबल डेकर बसें और उनकी तकनीक देखी। उनके अनुसार ऐसे में पेट्रोल-डीजल की जगह इलेक्ट्रिक व्हीकल बेहतर विकल्प है। इससे प्रदूषण बिल्कुल भी नहीं बढ़ेगा।

चार्ज करने पर 200 किमी से अधिक चलेगी बस

राज्य की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों को दौड़ाने का पायलट प्रोजेक्ट है। बताया जा रहा है अगर नई इलेक्ट्रिक बसें आई तो उसकी लंबाई 12 मीटर होगी जोकि एक बार चार्ज करने पर 200 किलोमीटर से अधिक चलेंगी। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं इसी साल नवंबर तक राज्य सरकार इन बसों को चलाने की तैयारी में जुटी है। वहीं अगर इलेक्ट्रिक बसें चलीं तो यात्रियों को सुखद यात्रा का अहसास होगा।

ऑनरूट हैं 2857 बसें

मौजूदा समय में हरियाणा में 3252 रोडवेज बसों में से 2857 बसें ही ऑनरूट हैं। जिनमें 15 फीसदी बसें ऐसे जो हांफ रही और रिटायर होने के कगार पर हैं। इन बसों में औसतन 15 लाख यात्री ही सफर कर पा रहे हैं। जबकि लॉकडाउन से पूर्व औसतन 21 लाख यात्री इन बसों में सफर किया करते थे लेकिन बसों की भारी कमी हो जाने से यात्रियों की संख्या भी घट गई। ऑल हरियाणा परिवहन कर्मचारी संघ के राज्य महासचिव प्रताप भनवाल का कहना है आबादी के हिसाब से डिपो में लगभग 14 हजार बसों की आवश्यकता है।

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Written by Haryanacircle

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