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नहरों को पक्का करने का कदम मूर्खतापूर्ण : राधेश्याम


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नारनौल। नारनौल के पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा ने कहा कि नहरों को पक्का करने से रिचार्ज नहीं हो पाएगा, भूजल स्तर गिर जाएगा। वहीं पीने लायक पानी भी बच पाएगा। मगर जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सरकार को चाहिए कि जिन अधिकारियों ने यह योजना बनाई उनके खिलाफ कार्रवाई करे और खर्चा भी वसूल किया जाए। अन्यथा इस तरह के लोग सरकार की आंखों में धूल झोंककर जनता का नुकसान करते रहेंगे।
पूर्व विधायक ने बताया कि हमींदपुर बांध से बदोपुर तक जो नाला बनाया गया है उसका भी यही परिणाम होगा। इन दोनों योजनाओं की जांच होनी चाहिए। अमृत महोत्सव में जोहड़ भरने मात्र की योजना का प्रचार अधिक किया जा रहा है। जबकि इसका लाभ नाम मात्र का है। दोहान और कृष्णावती नदियों पर छोटे-छोटे बांध बनाकर उनको यमुना के पानी से भर दिया जाता तो सारे क्षेत्र का भूजल भी ऊपर आ जाता और अंतिम छोर तक भी पानी पहुंच जाता, परंतु दुर्भाग्य से ऐसा नहीं किया गया। हमने जिस तरह से 2007-08 में हमींदपुर के बांध को नहर से जोड़ा था उसी प्रकार मूसनोता, पांचनोता, बायल, नांगल कालिया, रोपड़ सराय जैसे बांधों को जोड़ना चाहिए था और भी छोटे-छोटे बांध बनाने चाहिए थे। इसके अलावा कृष्णावती नदी पर मांदी, पटीकरा तथा रेवाड़ी रोड पर चिंकारा वन विभाग विश्राम गृह के पास छोटे-छोटे बांध बनाकर इनको पानी से भरा जाए।

नारनौल। नारनौल के पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा ने कहा कि नहरों को पक्का करने से रिचार्ज नहीं हो पाएगा, भूजल स्तर गिर जाएगा। वहीं पीने लायक पानी भी बच पाएगा। मगर जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सरकार को चाहिए कि जिन अधिकारियों ने यह योजना बनाई उनके खिलाफ कार्रवाई करे और खर्चा भी वसूल किया जाए। अन्यथा इस तरह के लोग सरकार की आंखों में धूल झोंककर जनता का नुकसान करते रहेंगे।

पूर्व विधायक ने बताया कि हमींदपुर बांध से बदोपुर तक जो नाला बनाया गया है उसका भी यही परिणाम होगा। इन दोनों योजनाओं की जांच होनी चाहिए। अमृत महोत्सव में जोहड़ भरने मात्र की योजना का प्रचार अधिक किया जा रहा है। जबकि इसका लाभ नाम मात्र का है। दोहान और कृष्णावती नदियों पर छोटे-छोटे बांध बनाकर उनको यमुना के पानी से भर दिया जाता तो सारे क्षेत्र का भूजल भी ऊपर आ जाता और अंतिम छोर तक भी पानी पहुंच जाता, परंतु दुर्भाग्य से ऐसा नहीं किया गया। हमने जिस तरह से 2007-08 में हमींदपुर के बांध को नहर से जोड़ा था उसी प्रकार मूसनोता, पांचनोता, बायल, नांगल कालिया, रोपड़ सराय जैसे बांधों को जोड़ना चाहिए था और भी छोटे-छोटे बांध बनाने चाहिए थे। इसके अलावा कृष्णावती नदी पर मांदी, पटीकरा तथा रेवाड़ी रोड पर चिंकारा वन विभाग विश्राम गृह के पास छोटे-छोटे बांध बनाकर इनको पानी से भरा जाए।

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