in

देश की सबसे बड़ी पंचायत में सरकार की खोलेंगे पोल – दीपेंद्र हुड्डा


ख़बर सुनें

बालसमंद। प्रदेश में देश की सबसे नामी किसान विरोधी सरकार चल रही है। बालसमंद में मुआवजे की मांग को लेकर किसान 56 दिन से धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। भीषण गर्मी में यह किसानों की अग्निपरीक्षा है। यह कहना है कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा का। उन्होंने बालसमंद के किसानों के धरना स्थल पर पहुंच सरकार को चेताया कि 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद सत्र से पहले किसानों की मांगें पूरी हों, नहीं तो देश की सबसे बड़ी पंचायत में सरकार की पोल खोलेंगे।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार यह न भूले कि हरियाणा में मजबूत विपक्ष है। विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही इस मुद्दे पर विपक्ष द्वारा काम रोको प्रस्ताव लाया जाएगा। जब तक किसानों के मुआवजे की मांगों का समाधान नहीं होता विधानसभा में पूरा विपक्ष बालसमंद तहसील के साथ एकजुट खड़ा रहेगा। सरकार को किसानों की नैतिक ताकत के आगे झुकना ही पड़ेगा। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि संसद में हरियाणा से कुल 15 सांसद हैं जिनमें 10 लोकसभा और 5 राज्यसभा के हैं। 14 सांसद भाजपा के हैं, वह अकेले विपक्षी सांसद हैं फिर भी सरकार सच्चाई की इस अकेली आवाज को कम न आंके।
बालसमंद तहसील की लड़ाई विधानसभा से संसद तक लड़ेंगे
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन बालसमंद तहसील के मुआवजे की मांग उठाई जाएगी। लोकतंत्र और संविधान में नैतिक अधिकार से वंचित करने पर संसद में और सड़क पर लड़ाई लड़ने के दो साधन दिए गए हैं। किसान आंदोलन के समय भी अहिंसा, शांति, अनुशासन व संयम से लड़ाई लड़कर किसानों ने तानाशाही सरकार को झुकाने का काम किया। कांग्रेस बालसमंद तहसील के किसानों के लिए विधानसभा से संसद तक लड़ाई लड़ेंगी। इस अवसर पर पूर्व विधायक रामनिवास घोड़ेला, पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, पूर्व मंत्री सुभाष गोयल पूर्व विधायक नरेश सेलवाल, सुरेंद्र आर्य, जिला परिषद के पूर्व चेयरमैन राजेंद्र सूरा, धर्मबीर गोयत, अनिल मान, जस्सी पेटवाड़, सतबीर, दिलबाग सिंह मौजूद रहे।

बालसमंद। प्रदेश में देश की सबसे नामी किसान विरोधी सरकार चल रही है। बालसमंद में मुआवजे की मांग को लेकर किसान 56 दिन से धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। भीषण गर्मी में यह किसानों की अग्निपरीक्षा है। यह कहना है कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा का। उन्होंने बालसमंद के किसानों के धरना स्थल पर पहुंच सरकार को चेताया कि 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद सत्र से पहले किसानों की मांगें पूरी हों, नहीं तो देश की सबसे बड़ी पंचायत में सरकार की पोल खोलेंगे।

उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार यह न भूले कि हरियाणा में मजबूत विपक्ष है। विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही इस मुद्दे पर विपक्ष द्वारा काम रोको प्रस्ताव लाया जाएगा। जब तक किसानों के मुआवजे की मांगों का समाधान नहीं होता विधानसभा में पूरा विपक्ष बालसमंद तहसील के साथ एकजुट खड़ा रहेगा। सरकार को किसानों की नैतिक ताकत के आगे झुकना ही पड़ेगा। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि संसद में हरियाणा से कुल 15 सांसद हैं जिनमें 10 लोकसभा और 5 राज्यसभा के हैं। 14 सांसद भाजपा के हैं, वह अकेले विपक्षी सांसद हैं फिर भी सरकार सच्चाई की इस अकेली आवाज को कम न आंके।

बालसमंद तहसील की लड़ाई विधानसभा से संसद तक लड़ेंगे

संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन बालसमंद तहसील के मुआवजे की मांग उठाई जाएगी। लोकतंत्र और संविधान में नैतिक अधिकार से वंचित करने पर संसद में और सड़क पर लड़ाई लड़ने के दो साधन दिए गए हैं। किसान आंदोलन के समय भी अहिंसा, शांति, अनुशासन व संयम से लड़ाई लड़कर किसानों ने तानाशाही सरकार को झुकाने का काम किया। कांग्रेस बालसमंद तहसील के किसानों के लिए विधानसभा से संसद तक लड़ाई लड़ेंगी। इस अवसर पर पूर्व विधायक रामनिवास घोड़ेला, पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, पूर्व मंत्री सुभाष गोयल पूर्व विधायक नरेश सेलवाल, सुरेंद्र आर्य, जिला परिषद के पूर्व चेयरमैन राजेंद्र सूरा, धर्मबीर गोयत, अनिल मान, जस्सी पेटवाड़, सतबीर, दिलबाग सिंह मौजूद रहे।

.


आन के लिए हत्या :सीबीआई कोर्ट ने लड़की के पिता की जमानत याचिका खारिज

Haryana: मेडल उगलने वाली धरती पर गैंगस्टर भी कम नहीं, कुल 144 कुख्यात अपराधी, रोहतक में सबसे अधिक, करनाल में एक भी नहीं