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देशी कट्टा, रिवॉल्वर, ऑटोमेटिक पिस्टल… सोशल मीडिया पर लग रही अवैध हथियारों की मंडी, होम डिलीवरी का दावा


गुड़गांव : किसी भाई को ‘सामान’ की जरूरत है तो वह बस एक कॉल कर दें। 24 घंटे में ‘सामान’ मिल जाएगा। ऑल इंडिया डिलिवरी अवेलेबल है। ‘सामान’ का जायज रेट लगाया जाएगा। यह किसी ग्रॉसरी ऐप का विज्ञापन नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर सामान यानी हथियार बेचने का नया तरीका है। कुछ लोगों ने अवैध हथियार बेचने के लिए फेसबुक को अपना नया ठिकाना बनाया है। यहां एक-दो नहीं बल्कि बड़ी संख्या में बनाए गए अकाउंट्स पर खुलेआम हथियारों की बिक्री की जा रही है। देसी कट्टा, रिवॉल्वर समेत विदेशी ऑटोमेटिक पिस्तौल तक बेचे जा रहे हैं। ये लोग होम डिलिवरी तक करने का दावा करते हैं। गुड़गांव में तेजी से बढ़ रहा हथियारों का शौक अब पुलिस के लिए चिंता का विषय बनने लगा है।

फेसबुक पर विज्ञापन देखकर हथियार मंगवाया था
हाल ही में अवैध हथियार के साथ पकड़े कुछ अपराधी तत्वों ने पुलिस के सामने खुलासा किया था कि उन्होंने फेसबुक पर विज्ञापन देखकर हथियार मंगवाया था। इसके बाद पुलिस ने अब सोशल मीडिया के कई अकाउंट की निगरानी शुरू की है। पुलिस रेकॉर्ड के मुताबिक, इस साल के पहले चार महीने में गुड़गांव में 163 अवैध हथियार बरामद हुए। पिछले साल इस अवधि में 136 अवैध हथियार मिले थे। गुड़गांव पुलिस के हथियार बरामद करने का सिलसिला लगातार जारी है। पुलिस हर रोज एक हथियार बरामद कर रही है।

जिले में अवैध हथियारों के खिलाफ पुलिस सख्ती बरत रही है। पहले चार महीने में आर्म्स एक्ट के 135 केस दर्ज कर 163 अवैध हथियार बरामद किए गए हैं। पुलिस मोबाइल और सोशल मीडिया पर भी नजर रखती है।

-प्रीतपाल, एसीपी क्राइम

एक्टिव अपराधियों के फेसबुक पेज से कनेक्ट हैं अकाउंट
दरअसल फेसबुक पर कई ऐसे अकाउंट हैं, जो गुड़गांव और आसपास के क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों के नाम पर चल रहे फेसबुक पेज के साथ कनेक्ट हैं। इन फेसबुक अकाउंट पर नए नए हथियारों की तस्वीरें अपलोड हैं। अकाउंट ऑपरेट करने वालों ने बाकायदा संपर्क करने के लिए वॉट्सऐप और मोबाइल नंबर दिए हुए हैं। साथ ही इस तरह के विज्ञापन में विश्वास दिलाया जा रहा है कि पूरी ईमानदारी से काम होगा। फ्रॉड से सावधान रहें। किसी भाई के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं की जाएगी।

बाहरी राज्यों में बैठे लोग चला रहे अकाउंट
क्राइम ब्रांच अधिकारियों के मुताबिक, कुछ फेसबुक अकाउंट्स की डिटेल खंगाली जाती है तो आईपी एड्रेस अन्य राज्यों के मिलते हैं। अगर किसी अकाउंट का लोकल कनेक्शन सामने आता है तो उस पर निगरानी कर धरपकड़ की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक गुड़गांव में ऐसा कोई गिरोह सक्रिय नहीं है और ये सभी बाहरी राज्यों में बैठे लोग अकाउंट चला रहे हैं।

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