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देवशयनी एकादशी 10 जुलाई को, चार माह तक मांगलिक कार्य बंद


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भगवान दास
करनाल। देवशयनी एकादशी 10 जुलाई को है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखेंगे। साथ ही मान्यता अनुसार भगवान श्री हरि विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे। इस कारण सभी मांगलिक और शुभ कार्य बंद हो जाएंगे। इन्हें चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है। बताया जाता है कि इन दिनों बारिश, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाएं भी देखने को मिलती हैं। साधु संत भी चातुर्मास में एक ही जगह ठहर कर भजन करते हैं।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को हरि या देवशयनी एकादशी कहते हैं। यह महा पुण्य वाली और मोक्षदायिनी होती है। सभी पापों को हरने वाला ये उत्तम व्रत है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष में हरि शयनी एकादशी के दिन कमल पुष्प से कमल लोचन भगवान विष्णु का पूजन और एकादशी का व्रत किया जाता है। जिन लोगों ने यह व्रत किया, तो माना जाता है कि उन्होंने सनातन देवताओं का पूजन कर लिया। इस दिन श्री हरि का स्वरूप राजा बलि के यहां रहता है और दूसरा क्षीर सागर में शेषनाग की शैय्या पर तब तक शयन करता है, जब तक आगामी कार्तिक एकादशी नहीं आ जाती।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक मनुष्य को भलीभांति धर्म का आचरण करना चाहिए। जो मनुष्य इस व्रत का अनुष्ठान करता है वह परम गति को प्राप्त होता है। इस कारण यत्न पूर्वक इस एकादशी का व्रत करना चाहिए।
पूजा करने की विधि
एकादशी की रात जागरण कर शंख चक्र गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु की भक्ति पूर्वक पूजा करनी चाहिए। इस दिन प्रात: काल उठकर पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर स्नान करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पीले आसन पर पीला वस्त्र पहनाकर स्थापित करें। भगवान को पीला रंग अत्यधिक प्रिय है, इसलिए पीले फूल से माला बनाकर श्रीहरि को पहनाएं। भगवान को चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद धूप, दीप और फूल चढ़ाकर आरती उतारें। पूजा करने के उपरांत ब्राह्मण को भोजन कराएं और यथाशक्ति दान दक्षिणा दें। इस प्रकार पूजन करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
किस माह क्या न खाएं
सावन में साग, भादो में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक महीने में दाल का त्याग कर देना चाहिए। चौमासे में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष और कार्तिक के कृष्ण पक्ष में जो एकादशी होती है, वह गृहस्थ के लिए व्रत रखने योग्य है। अन्य मास की कृष्ण पक्ष एकादशी व्रत रखने योग्य नहीं होती।
हरि शयनी एकादशी की तिथि और मुहूर्त
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि नौ जुलाई शाम 4 बजकर 40 मिनट से शुरू होगी, लेकिन उदयातिथि को ही मान्यता होती है, इसलिए हरि शयनी एकादशी 10 जुलाई को ही मनाई जाएगी। इसका समापन 10 जुलाई दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा।

भगवान दास

करनाल। देवशयनी एकादशी 10 जुलाई को है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखेंगे। साथ ही मान्यता अनुसार भगवान श्री हरि विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे। इस कारण सभी मांगलिक और शुभ कार्य बंद हो जाएंगे। इन्हें चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है। बताया जाता है कि इन दिनों बारिश, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाएं भी देखने को मिलती हैं। साधु संत भी चातुर्मास में एक ही जगह ठहर कर भजन करते हैं।

श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को हरि या देवशयनी एकादशी कहते हैं। यह महा पुण्य वाली और मोक्षदायिनी होती है। सभी पापों को हरने वाला ये उत्तम व्रत है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष में हरि शयनी एकादशी के दिन कमल पुष्प से कमल लोचन भगवान विष्णु का पूजन और एकादशी का व्रत किया जाता है। जिन लोगों ने यह व्रत किया, तो माना जाता है कि उन्होंने सनातन देवताओं का पूजन कर लिया। इस दिन श्री हरि का स्वरूप राजा बलि के यहां रहता है और दूसरा क्षीर सागर में शेषनाग की शैय्या पर तब तक शयन करता है, जब तक आगामी कार्तिक एकादशी नहीं आ जाती।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक मनुष्य को भलीभांति धर्म का आचरण करना चाहिए। जो मनुष्य इस व्रत का अनुष्ठान करता है वह परम गति को प्राप्त होता है। इस कारण यत्न पूर्वक इस एकादशी का व्रत करना चाहिए।

पूजा करने की विधि

एकादशी की रात जागरण कर शंख चक्र गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु की भक्ति पूर्वक पूजा करनी चाहिए। इस दिन प्रात: काल उठकर पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर स्नान करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पीले आसन पर पीला वस्त्र पहनाकर स्थापित करें। भगवान को पीला रंग अत्यधिक प्रिय है, इसलिए पीले फूल से माला बनाकर श्रीहरि को पहनाएं। भगवान को चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद धूप, दीप और फूल चढ़ाकर आरती उतारें। पूजा करने के उपरांत ब्राह्मण को भोजन कराएं और यथाशक्ति दान दक्षिणा दें। इस प्रकार पूजन करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

किस माह क्या न खाएं

सावन में साग, भादो में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक महीने में दाल का त्याग कर देना चाहिए। चौमासे में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष और कार्तिक के कृष्ण पक्ष में जो एकादशी होती है, वह गृहस्थ के लिए व्रत रखने योग्य है। अन्य मास की कृष्ण पक्ष एकादशी व्रत रखने योग्य नहीं होती।

हरि शयनी एकादशी की तिथि और मुहूर्त

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि नौ जुलाई शाम 4 बजकर 40 मिनट से शुरू होगी, लेकिन उदयातिथि को ही मान्यता होती है, इसलिए हरि शयनी एकादशी 10 जुलाई को ही मनाई जाएगी। इसका समापन 10 जुलाई दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा।

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