दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जीवाड़ा: टीम को जांच में मेडिकल कॉलेज अग्रोहा की नकली मुहर और हस्ताक्षर मिले


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हिसार। नागरिक अस्पताल में पिछले दिनों बने दिव्यांग प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े के मामले आए दिन उजागर हो रहे हैं। जांच में सामने आया कि एक प्रमाण पत्र पर मेडिकल कॉलेज अग्रोहा के ईएनटी विभाग की मुहर और हस्ताक्षर भी नकली मिले हैं। अभी तक छह से सात केस सामने आ चुके हैं, जो फर्जी हैं। चिकित्सकों की जांच अभी जारी है। नेत्र, हड्डी और ईएनटी के चिकित्सकों की फर्जी मुहर और हस्ताक्षर मिले हैं। शनिवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र से जुड़े चिकित्सकों ने अपने द्वारा बनाए गए दिव्यांग प्रमाण पत्रों की जांच की जिसमें कई और खुलासे होने के संकेत है।
मुहर और साइन में काफी अंतर
फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद सीएमओ रत्ना भारती ने जांच के लिए चार सदस्यीय टीम का गठन किया है। शनिवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने से संबंधित सभी चिकित्सक सीएमओ कार्यालय में एकत्रित हुए और एक हजार से ऊपर फार्मों की जांच की। जांच पड़ताल में करीब सात और फर्जी प्रमाण पत्र सामने आए। जिसमें नेत्र, हड्डी और कान, नाक और गले के चिकित्सक की नकली मुहर और नकली हस्ताक्षर मिले हैं। हैरान करने वाली बात ये भी है कि एक दिव्यांग प्रमाण पत्र पर मेडिकल कॉलेज अग्रोहा के ईएनटी विभाग की नकली मुहर और नकली हस्ताक्षर मिले हैं। नकली और असली मुहर में काफी अंतर है। जबकि चिकित्सकों के हस्ताक्षर भी मेल नहीं खा रहे।
रिकॉर्ड जांचा तो हुआ खुलासा
करीब तीन माह पहले सीएमओ कार्यालय में लगे कंप्यूटर ऑपरेटर का तबादला हो गया था। उसके स्थान पर एक महिला कर्मी की नियुक्ति हुई। उनके सहयोग के लिए एक कंप्यूटर ऑपरेटर को लगाया गया। शक है कि कि उक्त कंप्यूटर ऑपरेटर ने नकली मुुहर और नकली हस्ताक्षर कर फर्जी दिव्यांग पत्र बनाए हैं। इतना ही नहीं कंप्यूटर ऑपरेटर ने खुद का भी दिव्यांग प्रमाण पत्र बना लिया। फिलहाल अभी तक टीम ने किसी का नाम उजागर नहीं किया है। शक के आधार पर ही जांच की जा रही है। जांच में सामने ये भी आ रहा है कि जिनको फर्जी दिव्यांग पत्र मिले हैं उनमें कुछ शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारी हैं।
दिव्यांग प्रमाण पत्र बनने पर उठाए थे सवाल
विकलांग संघ उमंग के जिला प्रतिनिधि एवं शिक्षक वेदपाल ने मुद्दा उठाया था कि शिक्षा विभाग में कार्यरत प्राचार्यों, शिक्षकों व कर्मचारियों की दिव्यांगता का पुन: मूल्यांकन होना चाहिए। शिक्षा विभाग में कार्यरत दिव्यांग वर्तमान में भी दिव्यांग हैं, अगर हैं तो कितने फीसदी हैं। उक्त कार्यकर्ता के पत्र पर राज्य आयुक्त दिव्यांगजन ने संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग को पुन: मूल्यांकन के आदेश दिए थे। आदेश जारी होने के बाद शिक्षा विभाग में कार्यरत दिव्यांग अपना पुन: मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवेदन कर रहे हैं और हर बुधवार को आकर अपना दिव्यांग पत्र बनवा रहे है।

हिसार। नागरिक अस्पताल में पिछले दिनों बने दिव्यांग प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े के मामले आए दिन उजागर हो रहे हैं। जांच में सामने आया कि एक प्रमाण पत्र पर मेडिकल कॉलेज अग्रोहा के ईएनटी विभाग की मुहर और हस्ताक्षर भी नकली मिले हैं। अभी तक छह से सात केस सामने आ चुके हैं, जो फर्जी हैं। चिकित्सकों की जांच अभी जारी है। नेत्र, हड्डी और ईएनटी के चिकित्सकों की फर्जी मुहर और हस्ताक्षर मिले हैं। शनिवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र से जुड़े चिकित्सकों ने अपने द्वारा बनाए गए दिव्यांग प्रमाण पत्रों की जांच की जिसमें कई और खुलासे होने के संकेत है।

मुहर और साइन में काफी अंतर

फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद सीएमओ रत्ना भारती ने जांच के लिए चार सदस्यीय टीम का गठन किया है। शनिवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने से संबंधित सभी चिकित्सक सीएमओ कार्यालय में एकत्रित हुए और एक हजार से ऊपर फार्मों की जांच की। जांच पड़ताल में करीब सात और फर्जी प्रमाण पत्र सामने आए। जिसमें नेत्र, हड्डी और कान, नाक और गले के चिकित्सक की नकली मुहर और नकली हस्ताक्षर मिले हैं। हैरान करने वाली बात ये भी है कि एक दिव्यांग प्रमाण पत्र पर मेडिकल कॉलेज अग्रोहा के ईएनटी विभाग की नकली मुहर और नकली हस्ताक्षर मिले हैं। नकली और असली मुहर में काफी अंतर है। जबकि चिकित्सकों के हस्ताक्षर भी मेल नहीं खा रहे।

रिकॉर्ड जांचा तो हुआ खुलासा

करीब तीन माह पहले सीएमओ कार्यालय में लगे कंप्यूटर ऑपरेटर का तबादला हो गया था। उसके स्थान पर एक महिला कर्मी की नियुक्ति हुई। उनके सहयोग के लिए एक कंप्यूटर ऑपरेटर को लगाया गया। शक है कि कि उक्त कंप्यूटर ऑपरेटर ने नकली मुुहर और नकली हस्ताक्षर कर फर्जी दिव्यांग पत्र बनाए हैं। इतना ही नहीं कंप्यूटर ऑपरेटर ने खुद का भी दिव्यांग प्रमाण पत्र बना लिया। फिलहाल अभी तक टीम ने किसी का नाम उजागर नहीं किया है। शक के आधार पर ही जांच की जा रही है। जांच में सामने ये भी आ रहा है कि जिनको फर्जी दिव्यांग पत्र मिले हैं उनमें कुछ शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारी हैं।

दिव्यांग प्रमाण पत्र बनने पर उठाए थे सवाल

विकलांग संघ उमंग के जिला प्रतिनिधि एवं शिक्षक वेदपाल ने मुद्दा उठाया था कि शिक्षा विभाग में कार्यरत प्राचार्यों, शिक्षकों व कर्मचारियों की दिव्यांगता का पुन: मूल्यांकन होना चाहिए। शिक्षा विभाग में कार्यरत दिव्यांग वर्तमान में भी दिव्यांग हैं, अगर हैं तो कितने फीसदी हैं। उक्त कार्यकर्ता के पत्र पर राज्य आयुक्त दिव्यांगजन ने संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग को पुन: मूल्यांकन के आदेश दिए थे। आदेश जारी होने के बाद शिक्षा विभाग में कार्यरत दिव्यांग अपना पुन: मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवेदन कर रहे हैं और हर बुधवार को आकर अपना दिव्यांग पत्र बनवा रहे है।

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Written by Haryanacircle

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