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तेरह महाविद्यालयों को जल्द मिलेंगे प्राचार्य


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नारनौल। अस्थायी प्राचार्य के सहारे चल रहे जिले के महाविद्यालयों को जल्द ही स्थायी प्राचार्य मिलेंगे। इससे न सिर्फ कालेजों का प्रबंधन दुरुस्त होगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी सुधरेगी। उच्चतर शिक्षा विभाग ने गत 31 मई को 72 एसोसिएट प्रोफेसर को प्राचार्य पद पदोन्नत करने के आदेश जारी किए हैं। इनमें जिले के पांच एसोसिएट प्रोफेसर भी शामिल हैं। इनमें एक प्रोफेसर वर्तमान में लोहारू कॉलेज में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
हालांकि पदोन्नत हुए एसोसिएट प्रोफेसरों को फिलहाल कॉलेज आवंटित नहीं किए गए हैं लेकिन संभावना है कि जल्द ही उक्त सभी को विभिन्न कॉलेज आवंटित कर दिए जाएंगे। प्राचार्य के रूप में कालेजों में इनके कार्यभार ग्रहण करते ही कॉलेजों में विकास कार्यों के साथ-साथ व्यवस्था में सुुधार आएगा। वहीं प्राचार्य का अतिरिक्त कार्यभार संभाले हुए अन्य प्राध्यापकों को भी राहत मिलेगी।
जिले में करीब 14 राजकीय महाविद्यालय हैं। इनमें महेंद्रगढ़ कॉलेज के प्राचार्य मनीराम लांबा को छोड़कर अन्य 13 महाविद्यालय अस्थायी प्राचार्य के सहारे में ही चल रहे हैं। जिन प्राध्यापकों को कॉलेज में अस्थायी प्राचार्य का कार्यभार दिया गया है वे न तो सही प्रकार ने अपना शैक्षणिक कार्य कर पा रहे हैं और न ही कॉलेज के अन्य कार्य। कॉलेजों में विकास के नए कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं और न ही कोई योजना बन पा रही है। वहीं स्थायी प्राचार्य को कभी बजट के संबंध में तो कभी विभाग संबंधित अन्य कार्य के लिए एक दिन इस कॉलेज तो एक दिन उस कॉलेज में चक्कर लगाने पड़ते हैं।
जिले का सबसे पुराना और बड़ा कॉलेज राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भी तीन साल से बिना मुखिया के ही चल रहा है। कई साल से यह कॉलेज कार्यवाहक प्राचार्य के सहारे ही चल रहा है। जबकि जिले के अन्य कॉलेजों के मुकाबले यहां यूजी व पीजी कोर्स की सबसे अधिक सीटें और संकाय हैं। इस कारण यहां विद्यार्थियों की संख्या भी अधिक है। यहां जिले से बाहर के विद्यार्थी भी पढ़ने के लिए आते हैं। इस कॉलेज से जिले ही नहीं प्रदेश के मंत्री व विधायक भी पढ़कर निकले हैं। संवाद
प्रदेश के कॉलेजों में रिक्त प्राचार्य के पदों को भरने के लिए शिक्षा विभाग ने पूर्व प्राचार्यों को महाविद्यालयों में दोबारा से लगाने की योजना बनाई थी। जिस पर महाविद्यालयों में पदोन्नति की बांट जोह रहे एसोसिएट प्रोफेसरों ने न्यायालय की शरण ली। वहीं गत दिनों की प्राध्यापकों की यूनियन में कॉलेज स्तर पर सरकार के इस निर्णय के विरोध में धरना दिया। इसके बाद सरकार ने पूर्व प्राचार्यों को लगाने की योजना पर रोक लगा दी गई। वहीं गत 31 मई को प्रदेश के 72 एसोसिएट प्रोफेसरों की पदोन्नति सूची जारी की है।
जिले के पांच एसोसिएट प्रोफेसर बनेंगे प्राचार्य
उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी की गई पदोन्नति सूची में जिले के पांच एसोसिएट प्रोफेसर पदोन्नत हुए हैं। इनमें महेंद्रगढ़ महिला कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. संजय जोशी, नारनौल पीजी कॉलेज के डॉ. पूर्ण प्रभा व डॉ. सुरेंद्र कुमार तथा ज्ञानचंद राणा शामिल हैं। इसके बाद जगमेश जाखड़ जोकि कुछ दिन पहले तक पीजी कॉलेज में कार्यवाहक प्राचार्य थे, उनको भी पदोन्नति मिली है। निकाय चुनावों के चलते आचार संहिता लगने के कारण विभाग ने अभी पदोन्नत हुए प्रोफेसर को कॉलेज आवंटित नहीं किए है, लेकिन सभी ने उच्चतर शिक्षा निदेशालय में जाकर ज्वाइंनिंग कर ली है। ऐसे में संभावना है कि आचार संहिता के समाप्त होते ही सभी कॉलेज आवंटित कर दिए जाए।

नारनौल। अस्थायी प्राचार्य के सहारे चल रहे जिले के महाविद्यालयों को जल्द ही स्थायी प्राचार्य मिलेंगे। इससे न सिर्फ कालेजों का प्रबंधन दुरुस्त होगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी सुधरेगी। उच्चतर शिक्षा विभाग ने गत 31 मई को 72 एसोसिएट प्रोफेसर को प्राचार्य पद पदोन्नत करने के आदेश जारी किए हैं। इनमें जिले के पांच एसोसिएट प्रोफेसर भी शामिल हैं। इनमें एक प्रोफेसर वर्तमान में लोहारू कॉलेज में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

हालांकि पदोन्नत हुए एसोसिएट प्रोफेसरों को फिलहाल कॉलेज आवंटित नहीं किए गए हैं लेकिन संभावना है कि जल्द ही उक्त सभी को विभिन्न कॉलेज आवंटित कर दिए जाएंगे। प्राचार्य के रूप में कालेजों में इनके कार्यभार ग्रहण करते ही कॉलेजों में विकास कार्यों के साथ-साथ व्यवस्था में सुुधार आएगा। वहीं प्राचार्य का अतिरिक्त कार्यभार संभाले हुए अन्य प्राध्यापकों को भी राहत मिलेगी।

जिले में करीब 14 राजकीय महाविद्यालय हैं। इनमें महेंद्रगढ़ कॉलेज के प्राचार्य मनीराम लांबा को छोड़कर अन्य 13 महाविद्यालय अस्थायी प्राचार्य के सहारे में ही चल रहे हैं। जिन प्राध्यापकों को कॉलेज में अस्थायी प्राचार्य का कार्यभार दिया गया है वे न तो सही प्रकार ने अपना शैक्षणिक कार्य कर पा रहे हैं और न ही कॉलेज के अन्य कार्य। कॉलेजों में विकास के नए कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं और न ही कोई योजना बन पा रही है। वहीं स्थायी प्राचार्य को कभी बजट के संबंध में तो कभी विभाग संबंधित अन्य कार्य के लिए एक दिन इस कॉलेज तो एक दिन उस कॉलेज में चक्कर लगाने पड़ते हैं।

जिले का सबसे पुराना और बड़ा कॉलेज राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भी तीन साल से बिना मुखिया के ही चल रहा है। कई साल से यह कॉलेज कार्यवाहक प्राचार्य के सहारे ही चल रहा है। जबकि जिले के अन्य कॉलेजों के मुकाबले यहां यूजी व पीजी कोर्स की सबसे अधिक सीटें और संकाय हैं। इस कारण यहां विद्यार्थियों की संख्या भी अधिक है। यहां जिले से बाहर के विद्यार्थी भी पढ़ने के लिए आते हैं। इस कॉलेज से जिले ही नहीं प्रदेश के मंत्री व विधायक भी पढ़कर निकले हैं। संवाद

प्रदेश के कॉलेजों में रिक्त प्राचार्य के पदों को भरने के लिए शिक्षा विभाग ने पूर्व प्राचार्यों को महाविद्यालयों में दोबारा से लगाने की योजना बनाई थी। जिस पर महाविद्यालयों में पदोन्नति की बांट जोह रहे एसोसिएट प्रोफेसरों ने न्यायालय की शरण ली। वहीं गत दिनों की प्राध्यापकों की यूनियन में कॉलेज स्तर पर सरकार के इस निर्णय के विरोध में धरना दिया। इसके बाद सरकार ने पूर्व प्राचार्यों को लगाने की योजना पर रोक लगा दी गई। वहीं गत 31 मई को प्रदेश के 72 एसोसिएट प्रोफेसरों की पदोन्नति सूची जारी की है।

जिले के पांच एसोसिएट प्रोफेसर बनेंगे प्राचार्य

उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी की गई पदोन्नति सूची में जिले के पांच एसोसिएट प्रोफेसर पदोन्नत हुए हैं। इनमें महेंद्रगढ़ महिला कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. संजय जोशी, नारनौल पीजी कॉलेज के डॉ. पूर्ण प्रभा व डॉ. सुरेंद्र कुमार तथा ज्ञानचंद राणा शामिल हैं। इसके बाद जगमेश जाखड़ जोकि कुछ दिन पहले तक पीजी कॉलेज में कार्यवाहक प्राचार्य थे, उनको भी पदोन्नति मिली है। निकाय चुनावों के चलते आचार संहिता लगने के कारण विभाग ने अभी पदोन्नत हुए प्रोफेसर को कॉलेज आवंटित नहीं किए है, लेकिन सभी ने उच्चतर शिक्षा निदेशालय में जाकर ज्वाइंनिंग कर ली है। ऐसे में संभावना है कि आचार संहिता के समाप्त होते ही सभी कॉलेज आवंटित कर दिए जाए।

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