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तीन साल पहले बुक यूनिट का बिलडर ने किया आवंटन रद्द


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गुरुग्राम। जिला अदालत ने बिल्डर की ओर से मनमाने तरीके से 37 लाख रुपये काटने व आवंटन रद्द करने के मामले में बादशाहपुर थाना पुलिस को मामला दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया। पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में तीन करोड़ रुपये के लगभग का भुगतान किया है। बिना ओसी के फाइनल भुगतान नहीं देने पर आवंटन निरस्त करने का आरोप है। अदालत ने छह जून तक मामला दर्ज कर सूचित करने का आदेश भी दिया है।
पुलिस के अनुसार यह शिकायत में अखिलेशन कुमार नथानी ने बताया कि सात साल पहले सेक्टर 63 के एक प्रोजेक्ट में दो यूनिट बुक करने के बाद पेमेंट लेने पर भी अभी तक पजेशन नहीं दिया गया है। बिल्डर का सेक्टर 63 में एमथ्रीएम अर्बना नाम से प्रोजेक्ट है। उन्होंने 30 सितंबर, 2015 को बिल्डर के इस प्रोजेक्ट में दो यूनिट बुक किया था। इसके लिए तीन करोड़ से अधिक की रकम दी थी। यह रकम कई बार किस्तों में दी गई है। 21 दिसंबर, 2019 को बिल्डर की ओर से आई मेल में बताया गया कि यूनिट का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। वह फाइनल भुगतान करके अपना कब्जा ले लें। इस मेल में फाइनल भुगतान का तो जिक्र था, लेकिन ओसी नहीं थी। बार- बार कहने के बाद भी उनको ओसी नहीं दिया गया। बिल्डर की ओर से 20 अगस्त, 2020 को दोनों यूनिट रद्द करने का ई मेल भेज दिया। इतना ही नहीं उनके पैसे भी वापस नहीं दिए गए। इस शिकायत पर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हर्ष कुमार सिंह की कोर्ट ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिया है।

गुरुग्राम। जिला अदालत ने बिल्डर की ओर से मनमाने तरीके से 37 लाख रुपये काटने व आवंटन रद्द करने के मामले में बादशाहपुर थाना पुलिस को मामला दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया। पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में तीन करोड़ रुपये के लगभग का भुगतान किया है। बिना ओसी के फाइनल भुगतान नहीं देने पर आवंटन निरस्त करने का आरोप है। अदालत ने छह जून तक मामला दर्ज कर सूचित करने का आदेश भी दिया है।

पुलिस के अनुसार यह शिकायत में अखिलेशन कुमार नथानी ने बताया कि सात साल पहले सेक्टर 63 के एक प्रोजेक्ट में दो यूनिट बुक करने के बाद पेमेंट लेने पर भी अभी तक पजेशन नहीं दिया गया है। बिल्डर का सेक्टर 63 में एमथ्रीएम अर्बना नाम से प्रोजेक्ट है। उन्होंने 30 सितंबर, 2015 को बिल्डर के इस प्रोजेक्ट में दो यूनिट बुक किया था। इसके लिए तीन करोड़ से अधिक की रकम दी थी। यह रकम कई बार किस्तों में दी गई है। 21 दिसंबर, 2019 को बिल्डर की ओर से आई मेल में बताया गया कि यूनिट का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। वह फाइनल भुगतान करके अपना कब्जा ले लें। इस मेल में फाइनल भुगतान का तो जिक्र था, लेकिन ओसी नहीं थी। बार- बार कहने के बाद भी उनको ओसी नहीं दिया गया। बिल्डर की ओर से 20 अगस्त, 2020 को दोनों यूनिट रद्द करने का ई मेल भेज दिया। इतना ही नहीं उनके पैसे भी वापस नहीं दिए गए। इस शिकायत पर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हर्ष कुमार सिंह की कोर्ट ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिया है।

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