टोहाना में मंत्री बबली व प्रदेशाध्यक्ष तो फतेहाबाद में विधायक की साख दांव पर


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फतेहाबाद। नगर निकाय चुनाव को लेकर टोहाना में जहां जजपा के प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह और कैबिनेट मंत्री देवेंद्र बबली की तो फतेहाबाद शहर में विधायक दुड़ाराम की साख दांव पर लगी है। टोहाना में जजपा नेताओं ने जहां भाजपा का असहयोग झेला है, वहीं फतेहाबाद शहर में लगातार संगठन की खींचतान का शिकार रहे विधायक और उनकी टीम पर ही भाजपा प्रत्याशी को जिताने का दारोमदार रहा।
चुनाव के दिन के माहौल के हिसाब से मतदाताओं का रुझान चेयरमैन पद के लिए तीन प्रमुख उम्मीदवारों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आया। मौजूदा स्थिति के मुताबिक मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र खिंची, कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी वीरेंद्र एडवोकेट और निर्दलीय प्रत्याशी हरदीप सिंह के बीच ही रहेगा। हालांकि, कौन चेयरमैन की कुर्सी पर बैठेगा, इसका फैसला 22 जून को दोपहर 12 बजे तक हो जाएगा। संवाद
धनबल बनाम जनबल का मुद्दा रहा हावी
इस बार निकाय चुनाव में धनबल बनाम जनबल का मुद्दा हावी रहा। इस मुद्दे को सबसे अधिक हवा दी 11 महीने से लगातार चुनाव की तैयारियां कर रहे निर्दलीय प्रत्याशी हरदीप सिंह ने। बिना किसी राजनीतिक पहचान वाले हरदीप सिंह व उनकी टीम ने अकेले दम पर ही मतदाताओं में छाप छोड़ने का काम किया। यही कारण रहा कि पहले कमतर आंके जा रहे हरदीप सिंह मतदान के दिन टॉप थ्री में पूरी मजबूती के साथ नजर आए।
कोई निर्दलीय जीता तो बनेंगे नए समीकरण
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भाजपा प्रत्याशी को मात देकर कोई निर्दलीय प्रत्याशी चेयरमैन बनता है तो राजनीति के नए समीकरण बनेंगे। जनबल के नारे को हवा मिलेगी। आम घर के बेटों को राजनीति में स्थान मिलेगा। अब तक पार्टीबाजी ही हावी रही है। इसका प्रमुख कारण पार्षदों द्वारा चेयरमैन का चुनाव भी रहा है। पहली बार प्रत्यक्ष रूप से जनता को चेयरमैन चुनना है, इस दृष्टि से भी यह चुनाव बड़ा महत्वपूर्ण रहेगा।
भाजपा प्रत्याशी की जीत बढ़ाएगी विधायक का कद
भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र खिंची की जीत विधायक दुड़ाराम का कद बढ़ाने का काम करेगी। राजेंद्र खिंची को विधायक ने ही टिकट दिलवाई थी जबकि संगठन के प्रमुख पदाधिकारी उनका विरोध कर रहे थे। भाजपा प्रत्याशी की जीत से संगठन में यह संदेश भी जाएगा कि विधायक अकेले अपनी टीम के दम पर भी चेयरमैन प्रत्याशी को जीत दिलाने का दम रखते हैं। इससे संगठन में उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले हाशिये पर चले जाएंगे।
विधानसभा चुनाव पर भी रहेगा असर
निकाय चुनाव की हार जीत विधानसभा चुनाव पर भी असर डालेगा। जो भी प्रत्याशी जीतेगा, वह जिस दल का समर्थित होगा, उसी दल की विधानसभा चुनाव में हवा बनने की उम्मीद रहेगी। टोहाना में अगर जजपा प्रत्याशी की हार होगी तो एक बार फिर से सुभाष बराला व उनका गुट हावी होगा। लगातार सुभाष बराला के खिलाफ बयानबाजी करते रहे कैबिनेट मंत्री के भी कद को नुकसान पहुंचेगा।

फतेहाबाद। नगर निकाय चुनाव को लेकर टोहाना में जहां जजपा के प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह और कैबिनेट मंत्री देवेंद्र बबली की तो फतेहाबाद शहर में विधायक दुड़ाराम की साख दांव पर लगी है। टोहाना में जजपा नेताओं ने जहां भाजपा का असहयोग झेला है, वहीं फतेहाबाद शहर में लगातार संगठन की खींचतान का शिकार रहे विधायक और उनकी टीम पर ही भाजपा प्रत्याशी को जिताने का दारोमदार रहा।

चुनाव के दिन के माहौल के हिसाब से मतदाताओं का रुझान चेयरमैन पद के लिए तीन प्रमुख उम्मीदवारों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आया। मौजूदा स्थिति के मुताबिक मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र खिंची, कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी वीरेंद्र एडवोकेट और निर्दलीय प्रत्याशी हरदीप सिंह के बीच ही रहेगा। हालांकि, कौन चेयरमैन की कुर्सी पर बैठेगा, इसका फैसला 22 जून को दोपहर 12 बजे तक हो जाएगा। संवाद

धनबल बनाम जनबल का मुद्दा रहा हावी

इस बार निकाय चुनाव में धनबल बनाम जनबल का मुद्दा हावी रहा। इस मुद्दे को सबसे अधिक हवा दी 11 महीने से लगातार चुनाव की तैयारियां कर रहे निर्दलीय प्रत्याशी हरदीप सिंह ने। बिना किसी राजनीतिक पहचान वाले हरदीप सिंह व उनकी टीम ने अकेले दम पर ही मतदाताओं में छाप छोड़ने का काम किया। यही कारण रहा कि पहले कमतर आंके जा रहे हरदीप सिंह मतदान के दिन टॉप थ्री में पूरी मजबूती के साथ नजर आए।

कोई निर्दलीय जीता तो बनेंगे नए समीकरण

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भाजपा प्रत्याशी को मात देकर कोई निर्दलीय प्रत्याशी चेयरमैन बनता है तो राजनीति के नए समीकरण बनेंगे। जनबल के नारे को हवा मिलेगी। आम घर के बेटों को राजनीति में स्थान मिलेगा। अब तक पार्टीबाजी ही हावी रही है। इसका प्रमुख कारण पार्षदों द्वारा चेयरमैन का चुनाव भी रहा है। पहली बार प्रत्यक्ष रूप से जनता को चेयरमैन चुनना है, इस दृष्टि से भी यह चुनाव बड़ा महत्वपूर्ण रहेगा।

भाजपा प्रत्याशी की जीत बढ़ाएगी विधायक का कद

भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र खिंची की जीत विधायक दुड़ाराम का कद बढ़ाने का काम करेगी। राजेंद्र खिंची को विधायक ने ही टिकट दिलवाई थी जबकि संगठन के प्रमुख पदाधिकारी उनका विरोध कर रहे थे। भाजपा प्रत्याशी की जीत से संगठन में यह संदेश भी जाएगा कि विधायक अकेले अपनी टीम के दम पर भी चेयरमैन प्रत्याशी को जीत दिलाने का दम रखते हैं। इससे संगठन में उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले हाशिये पर चले जाएंगे।

विधानसभा चुनाव पर भी रहेगा असर

निकाय चुनाव की हार जीत विधानसभा चुनाव पर भी असर डालेगा। जो भी प्रत्याशी जीतेगा, वह जिस दल का समर्थित होगा, उसी दल की विधानसभा चुनाव में हवा बनने की उम्मीद रहेगी। टोहाना में अगर जजपा प्रत्याशी की हार होगी तो एक बार फिर से सुभाष बराला व उनका गुट हावी होगा। लगातार सुभाष बराला के खिलाफ बयानबाजी करते रहे कैबिनेट मंत्री के भी कद को नुकसान पहुंचेगा।

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Written by Haryanacircle

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