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ज्योतिसर तीर्थ पर विराट स्वरूप के पास से पेड़ काटने की नहीं मिली इजाजत


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एनजीटी से केडीबी को ज्योतिसर तीर्थ पर भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप के पास से पेड़ काटने की इजाजत नहीं मिली है। मुख्य सचिव, हरियाणा को एक महीने में प्रदेश में उपयुक्त रेगुलेटरी मेकेनिज्म बनाने के आदेश दिए गए हैं।
ग्रीन अर्थ संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली एनजीटी की मुख्य खंडपीठ ने मुख्य सचिव हरियाणा को आदेश दिए हैं की प्रदेश में एक उपयुक्त रेगुलेटरी मैकेनिज्म एक महीने में बनाकर अमल में लाएं। चार सदस्य खंडपीठ के अन्य सदस्य जस्टिस अरुण कुमार त्यागी, प्रोफेसर ए सेंथिल वेल और डॉ. अफरोज अहमद ने मामले की सुनवाई की।
गौरतलब है की हाल ही में ज्योतिसर तीर्थ पर कृष्ण वाटिका में भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप स्थापित किया गया है, जिसके आस -पास खड़े विभिन्न प्रजातियों के 24 पेड़ काटने की योजना थी। संगठन सदस्य अधिवक्ता सुशील कुमार ने बताया की ये पेड़ 70 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा और तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ बंसी लाल ने लगाए थे। पेड़ों को बचाने के लिए ग्रीन अर्थ संगठन ने मई में एनजीटी में याचिका डाली थी। एनजीटी ने 24 मई को इन पेड़ों की कटाई पर स्टे लगा दिया था। अगली सुनवाई 23 अगस्त को होनी थी, लेकिन केडीबी ने स्टे हटाने के लिए जल्दी सुनवाई के लिए याचिका डाल दी, जिस पर एक जुलाई को बहस सुनने के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान सरकार के वकील ने कहा की विराट स्वरूप की विजिबिलिटी के लिए सात पेड़ काटने की अनुमति दी जाए। इस पर ग्रीन अर्थ ने ऐतराज जताया । उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि ये पर्यावरण का मामला है और पेड़ों को काटने की कोई अनुमति नहीं ली गई है। इस पर सरकार की तरफ से बहस कर रहे वकील ने बताया की दिल्ली के वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 के तरह का कोई भी रेगुलेटरी मैकेनिज्म हरियाणा में नहीं है, इसलिए वन क्षेत्र के बाहर पेड़ काटने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं है। बहस सुनने के बाद खंडपीठ ने आदेश दिया की पेड़ों का पर्यावरणीय महत्व है तथा बिना किसी रेगुलेशन या अनुमति के पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं दी जा सकती। राज्य पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन के सिद्धांत में बंधा है इसलिए पेड़ों के मामले में रेगुलेटरी मैकेनिज्म बनाएं ताकि पर्यावरण संबंधी मामले इस मेकेनिज्म अनुसार हल किए जा सकें। खंडपीठ ने मुख्य सचिव हरियाणा को आदेश दिए की एक महीने में रेगुलेटरी मैकेनिज्म बनाएं तथा पेड़ों को काटने के मामले में रेगुलेटरी मैकेनिज्म का पालन सुनिश्चित करें। इस बाबत की कार्रवाई की रिपोर्ट 09 सितंबर तक ट्रिब्यूनल में दाखिल करें। संगठन सदस्य डॉ. नरेश भारद्वाज ने बताया की रेगुलेटरी मेकेनिज्म बनने के बाद प्रदेश में आए दिन बिना किसी खास कारण के पेड़ों को काटने घटनाओं पर रोक लगेगी और पेड़ों को सुरक्षित किया जा सकेगा।

एनजीटी से केडीबी को ज्योतिसर तीर्थ पर भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप के पास से पेड़ काटने की इजाजत नहीं मिली है। मुख्य सचिव, हरियाणा को एक महीने में प्रदेश में उपयुक्त रेगुलेटरी मेकेनिज्म बनाने के आदेश दिए गए हैं।

ग्रीन अर्थ संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली एनजीटी की मुख्य खंडपीठ ने मुख्य सचिव हरियाणा को आदेश दिए हैं की प्रदेश में एक उपयुक्त रेगुलेटरी मैकेनिज्म एक महीने में बनाकर अमल में लाएं। चार सदस्य खंडपीठ के अन्य सदस्य जस्टिस अरुण कुमार त्यागी, प्रोफेसर ए सेंथिल वेल और डॉ. अफरोज अहमद ने मामले की सुनवाई की।

गौरतलब है की हाल ही में ज्योतिसर तीर्थ पर कृष्ण वाटिका में भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप स्थापित किया गया है, जिसके आस -पास खड़े विभिन्न प्रजातियों के 24 पेड़ काटने की योजना थी। संगठन सदस्य अधिवक्ता सुशील कुमार ने बताया की ये पेड़ 70 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा और तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ बंसी लाल ने लगाए थे। पेड़ों को बचाने के लिए ग्रीन अर्थ संगठन ने मई में एनजीटी में याचिका डाली थी। एनजीटी ने 24 मई को इन पेड़ों की कटाई पर स्टे लगा दिया था। अगली सुनवाई 23 अगस्त को होनी थी, लेकिन केडीबी ने स्टे हटाने के लिए जल्दी सुनवाई के लिए याचिका डाल दी, जिस पर एक जुलाई को बहस सुनने के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान सरकार के वकील ने कहा की विराट स्वरूप की विजिबिलिटी के लिए सात पेड़ काटने की अनुमति दी जाए। इस पर ग्रीन अर्थ ने ऐतराज जताया । उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि ये पर्यावरण का मामला है और पेड़ों को काटने की कोई अनुमति नहीं ली गई है। इस पर सरकार की तरफ से बहस कर रहे वकील ने बताया की दिल्ली के वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 के तरह का कोई भी रेगुलेटरी मैकेनिज्म हरियाणा में नहीं है, इसलिए वन क्षेत्र के बाहर पेड़ काटने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं है। बहस सुनने के बाद खंडपीठ ने आदेश दिया की पेड़ों का पर्यावरणीय महत्व है तथा बिना किसी रेगुलेशन या अनुमति के पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं दी जा सकती। राज्य पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन के सिद्धांत में बंधा है इसलिए पेड़ों के मामले में रेगुलेटरी मैकेनिज्म बनाएं ताकि पर्यावरण संबंधी मामले इस मेकेनिज्म अनुसार हल किए जा सकें। खंडपीठ ने मुख्य सचिव हरियाणा को आदेश दिए की एक महीने में रेगुलेटरी मैकेनिज्म बनाएं तथा पेड़ों को काटने के मामले में रेगुलेटरी मैकेनिज्म का पालन सुनिश्चित करें। इस बाबत की कार्रवाई की रिपोर्ट 09 सितंबर तक ट्रिब्यूनल में दाखिल करें। संगठन सदस्य डॉ. नरेश भारद्वाज ने बताया की रेगुलेटरी मेकेनिज्म बनने के बाद प्रदेश में आए दिन बिना किसी खास कारण के पेड़ों को काटने घटनाओं पर रोक लगेगी और पेड़ों को सुरक्षित किया जा सकेगा।

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