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जोहड़ों की पट्टा नीलामी राशि डकार गए अधिकारी


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पलवल। पंचायत विभाग के गले में फंसी मनरेगा घोटाले की फांस अभी निकली भी नहीं थी कि विभाग में नया घोटाला उजागर हो गया। कार्यकाल खत्म होने बाद ग्राम पंचायतों की कृषि योग्य जमीन और जोहड़ों के पट्टा नीलामी की राशि डकार ली गई। गांवों की तरफ से पंचायत विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा करोड़ों रुपये डकारने की शिकायत दी गई हैं। शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली ने जिला अधिकारियों जांच के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, ग्राम पंचायतों की कृषि योग्य भूमि तथा जोहड़ों को मछली पालन के लिए पट्टे पर छोड़ा जाता है। ज्यादातर हर वर्ष पट्टा नीलामी की प्रक्रिया की जाती है। पट्टा नीलामी से होने वाली आमदनी को ग्राम पंचायतों के खाते में जमा करवाया जाता है, जिससे गांवों में विकास कार्य करवाए जाते हैं। बीते साल फरवरी माह में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया। पंचायत चुनावों में देरी होने पर ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों, पंचायती जमीन से होने वाली आमदनी सहित अन्य जिम्मेदारी संबंधित खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों को सौंपी गई थी। जिम्मेदारी मिलने पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, पंचायत ऑफिसर व ग्राम सचिवों ने पंचायती जमीन व जोहड़ों का पट्टा नीलामी की। जमीन व जोहड़ पट्टा नीलामी की राशि का कुछ हिस्सा ग्राम पंचायतों के खाते में जमा करवाया, बाकी हड़प गए। इस बारे में ग्रामीणों ने पंचायत विभाग के अधिकारियों की शिकायत शुरू कर दी।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला व पंचायत विभाग के मंत्री देवेंद्र बबली को पट्टा नीलामी घोटाले की शिकायतें भेजी गई। शिकायतों पर संज्ञान लेने पर पता चला कि पलवल में पट्टा नीलामी का राशि को जमा करवाने में अनियमितताएं बरती गई हैं। इस बारे में पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली ने जिला के अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से बात करने पर मामले में चुप्पी साध गए लेकिन घोटाले की जांच की बात से इनकार भी नहीं किया।

पलवल। पंचायत विभाग के गले में फंसी मनरेगा घोटाले की फांस अभी निकली भी नहीं थी कि विभाग में नया घोटाला उजागर हो गया। कार्यकाल खत्म होने बाद ग्राम पंचायतों की कृषि योग्य जमीन और जोहड़ों के पट्टा नीलामी की राशि डकार ली गई। गांवों की तरफ से पंचायत विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा करोड़ों रुपये डकारने की शिकायत दी गई हैं। शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली ने जिला अधिकारियों जांच के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, ग्राम पंचायतों की कृषि योग्य भूमि तथा जोहड़ों को मछली पालन के लिए पट्टे पर छोड़ा जाता है। ज्यादातर हर वर्ष पट्टा नीलामी की प्रक्रिया की जाती है। पट्टा नीलामी से होने वाली आमदनी को ग्राम पंचायतों के खाते में जमा करवाया जाता है, जिससे गांवों में विकास कार्य करवाए जाते हैं। बीते साल फरवरी माह में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया। पंचायत चुनावों में देरी होने पर ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों, पंचायती जमीन से होने वाली आमदनी सहित अन्य जिम्मेदारी संबंधित खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों को सौंपी गई थी। जिम्मेदारी मिलने पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, पंचायत ऑफिसर व ग्राम सचिवों ने पंचायती जमीन व जोहड़ों का पट्टा नीलामी की। जमीन व जोहड़ पट्टा नीलामी की राशि का कुछ हिस्सा ग्राम पंचायतों के खाते में जमा करवाया, बाकी हड़प गए। इस बारे में ग्रामीणों ने पंचायत विभाग के अधिकारियों की शिकायत शुरू कर दी।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला व पंचायत विभाग के मंत्री देवेंद्र बबली को पट्टा नीलामी घोटाले की शिकायतें भेजी गई। शिकायतों पर संज्ञान लेने पर पता चला कि पलवल में पट्टा नीलामी का राशि को जमा करवाने में अनियमितताएं बरती गई हैं। इस बारे में पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली ने जिला के अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से बात करने पर मामले में चुप्पी साध गए लेकिन घोटाले की जांच की बात से इनकार भी नहीं किया।

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