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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में मथूरा के चरकुला नृत्य एवं ब्रज लोकगीत मंच के कलाकार मयूर नृत्य लेकर पहुंचे हैं, जिन्होंने पवित्र ब्रह्मसरोवर के घाट पर अपने अभिनय का जलवा बिखेरा। पहली बार महोत्सव में पहुंचे कलाकारों ने प्रस्तुति देकर समां बांध दिया, जिसे देख पर्यटक भी गदगद हो उठे।
सोनिया, आशा, वर्षा सहित अन्य कलाकारों ने मथूरा के प्राचीन मयूर नृत्य को यहां जींवत कर दिखाया तो वहीं देश-दुनिया तक भी इस लोक संस्कृति को पहुंचा चुके हैं। वे बताते हैं कि अभी तक जापान, लंदन, इंडोनेशिया, रशिया, दुबई, बाली, वियतनाम में इस नृत्य की प्रस्तुति दे चुके हैं। जहां इस नृत्य की खूब सराहना हुई।
पहली बार महोत्सव में पहुंच उत्साहित हुए कलाकार
वर्ष 1986 से लोक संस्कृति को बचाने में लगे इस ग्रुप के कलाकारों ने विशेष चर्चा में बताया कि वे पहली बार महोत्सव में पहुंचे हैं। यहां उन्हें जो उत्साह पर्यटकों ने दिया है, उम्मीद से भी परे है। उनके नृत्य की हर किसी ने सराहना की है। उन्हें मौका मिला तो भविष्य में हर बार आएंगे।
श्रीृष्ण की अठखेलियां दर्शा रहे
कलाकार बताते हैं कि इस नृत्य के जरिए वे भगवान श्री कृष्ण की अठखेलियां दर्शा रहे हैं। जब राधा एक जंगल में मयूर को नाचते हुए देखने गई थी तो उन्हें कोई मयूर नहीं मिला था। इससे उनके मन में उदासी छा गई थी। यह देख भगवान श्रीकृष्ण ने लीला रची और खूद मयूर के रूप में नृत्य किया, जिससे राधा की खुशी का ठिकाना न रहा। ऐसी ही अठखेलियां इस नृत्य के जरिए दिखाई जा रही है। यह मथूरा ही नहीं पूरे उत्तरप्रदेश का प्राचीन लोक नृत्य है, जिसे जीवित रखना बेहद जरूरी है। युवा पीढ़ी को इससे जोड़ने की जरूरत है।
शौक पूरा करने के साथ रोजगार भी
कलाकार सोनिया, आशा व वर्षा व संतोष कुमार बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही नृत्य का शौक था। इसी के चलते वे ग्रुप से जुड़ी तो अनेक वर्षों से नृत्य कर रही है। मयूर नृत्य कर वे खुद को भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भी अपनी श्रद्वा व्यक्त कर पाती है। उनके शौक के साथ-साथ रोजगार भी मिल रहा है।
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जापान, लंदन, इंडोनेशिया, वियतनाम में मयूर नृत्य से जलवा बिखेर चुके मथूरा के कलाकार