चार बार विस चुनाव में हार के बाद अब मिला चेयरपर्सन का ताज


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नारनौल। भाना राम सैनी के परिवार के सदस्य चार बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और उनकी पुत्रवधू कमलेश सैनी को पहली बार चेयरपर्सन का ताज मिला है। 1996 से लेकर 2019 में वे और उनकी पुत्रवधू चार बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे लेकिन भाग्य ने एक बार भी उनका साथ नहीं दिया। 2009 में भाना राम सैनी तथा 2014 में कमलेश सैनी विधानसभा की चौखट तक पहुंचतीं-पहुंचतीं रह गई थीं। इस बार इस परिवार में एक नहीं दो लोग चेयरमैन बने हैं। उनकी पुत्रवधू कमलेश के अलावा उनके भतीजे रमेश सैनी ने महेंद्रगढ़ नगरपालिका चेयरमैन का चुनाव भाजपा टिकट पर जीता है।
26 वर्ष बाद परिवार में दोहरी खुशी आई है। इस वजह से घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। हालांकि पिछले कुछ समय से भाना राम सैनी बीमार चल रहे हैं लेकिन वह पुत्रवधू एवं भतीजे की जीत से काफी खुश हैं। 90 के दशक में भाना राम सैनी का नाम जिले के बड़े व्यापारियों के रूप में शुमार था। इसके बाद 1995 में वो राजनीति में सक्रिय हो गए। 1996 में वो महेंद्रगढ़ विधानसभा से कांग्रेस की टिकट के प्रबल दावेदार थे लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने उनकी टिकट कटवाकर भाई रामसिंह यादव को दे दी थी। उस समय उन्होंने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और उनको हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वो इनेलो पार्टी में शामिल हो गए। 2009 में उन्होंने इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने नारनौल विधानसभा से टिकट दे दी लेकिन इस बार भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया वो हरियाणा जनहित कांग्रेस प्रत्याशी राव नरेंद्र से मात्र 3261 वोटों से हार गए। 2014 में उनकी पुत्रवधू कमलेश सैनी फिर नारनौल विस क्षेत्र से इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ी लेकिन जीत की दहलीज तक पहुंचते-पहुंचते रह गईं। भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश यादव ने उसको 4573 वोटों से हरा दिया। कमलेश सैनी ने 2019 में जजपा टिकट से दूसरी बार भाग्य आजमाया लेकिन वो फिर भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश एडीओ से 14715 वोटों से हार गईं। चार बार विधानसभा चुनाव हारने के बाद परिवार में काफी निराशा थी लेकिन अब निकाय चुनावों में उन्होंने जजपा से बागी होकर चुनाव लड़ीं और शानदार 14634 मतों से विजय दर्ज कराई। वहीं भाना राम सैनी के भतीजे रमेश सैनी ने भाजपा की टिकट पर 4398 वोटों से जीत दर्ज की है। इस बार परिवार में एक साथ दो चेयरमैन बने। भाना राम सैनी रमेश सैनी के सगे ताऊ लगते हैं जबकि कमलेश सैनी रिश्ते में भाभी लगती हैं। संवाद

नारनौल। भाना राम सैनी के परिवार के सदस्य चार बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और उनकी पुत्रवधू कमलेश सैनी को पहली बार चेयरपर्सन का ताज मिला है। 1996 से लेकर 2019 में वे और उनकी पुत्रवधू चार बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे लेकिन भाग्य ने एक बार भी उनका साथ नहीं दिया। 2009 में भाना राम सैनी तथा 2014 में कमलेश सैनी विधानसभा की चौखट तक पहुंचतीं-पहुंचतीं रह गई थीं। इस बार इस परिवार में एक नहीं दो लोग चेयरमैन बने हैं। उनकी पुत्रवधू कमलेश के अलावा उनके भतीजे रमेश सैनी ने महेंद्रगढ़ नगरपालिका चेयरमैन का चुनाव भाजपा टिकट पर जीता है।

26 वर्ष बाद परिवार में दोहरी खुशी आई है। इस वजह से घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। हालांकि पिछले कुछ समय से भाना राम सैनी बीमार चल रहे हैं लेकिन वह पुत्रवधू एवं भतीजे की जीत से काफी खुश हैं। 90 के दशक में भाना राम सैनी का नाम जिले के बड़े व्यापारियों के रूप में शुमार था। इसके बाद 1995 में वो राजनीति में सक्रिय हो गए। 1996 में वो महेंद्रगढ़ विधानसभा से कांग्रेस की टिकट के प्रबल दावेदार थे लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने उनकी टिकट कटवाकर भाई रामसिंह यादव को दे दी थी। उस समय उन्होंने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और उनको हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वो इनेलो पार्टी में शामिल हो गए। 2009 में उन्होंने इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने नारनौल विधानसभा से टिकट दे दी लेकिन इस बार भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया वो हरियाणा जनहित कांग्रेस प्रत्याशी राव नरेंद्र से मात्र 3261 वोटों से हार गए। 2014 में उनकी पुत्रवधू कमलेश सैनी फिर नारनौल विस क्षेत्र से इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ी लेकिन जीत की दहलीज तक पहुंचते-पहुंचते रह गईं। भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश यादव ने उसको 4573 वोटों से हरा दिया। कमलेश सैनी ने 2019 में जजपा टिकट से दूसरी बार भाग्य आजमाया लेकिन वो फिर भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश एडीओ से 14715 वोटों से हार गईं। चार बार विधानसभा चुनाव हारने के बाद परिवार में काफी निराशा थी लेकिन अब निकाय चुनावों में उन्होंने जजपा से बागी होकर चुनाव लड़ीं और शानदार 14634 मतों से विजय दर्ज कराई। वहीं भाना राम सैनी के भतीजे रमेश सैनी ने भाजपा की टिकट पर 4398 वोटों से जीत दर्ज की है। इस बार परिवार में एक साथ दो चेयरमैन बने। भाना राम सैनी रमेश सैनी के सगे ताऊ लगते हैं जबकि कमलेश सैनी रिश्ते में भाभी लगती हैं। संवाद

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Written by Haryanacircle

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