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चंडीगढ़ जातिसूचक मामले में प्रशासन का एक्शन: प्रिंसिपल और टीचर का ट्रांसफर, बोली लंबे समय से हो रहीं उत्पीड़न शिकार – Chandigarh News Chandigarh News Updates

चंडीगढ़ जातिसूचक मामले में प्रशासन का एक्शन:  प्रिंसिपल और टीचर का ट्रांसफर, बोली लंबे समय से हो रहीं उत्पीड़न शिकार – Chandigarh News Chandigarh News Updates

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महिला टीचर द्बारा जारी किया गया विडियों।  

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक प्रिंसिपल और एक टीजीटी शिक्षक का ट्रांसफर कर दिया। यह कार्रवाई उस मामले में की गई, जिसमें दो टीचर ने वीडियो बनाकर आरोप लगाया था कि उन्हें जातिसूचक शब्द कहे जा रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल ह

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प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए विभाग से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद एजुकेशन सेक्रेटरी प्रेरणा पुरी ने आदेश जारी करते हुए सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-33 की प्रिंसिपल राजबाला मलिक को हटाकर सेक्टर-22 के हेल्थ सेंटर में इंचार्ज के रूप में नियुक्त किया है। वहीं, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन हरसुरिंदर पाल सिंह बराड़ ने टीजीटी शिक्षक रणबीर कुमार का तबादला करते हुए उन्हें सेक्टर-32 स्थित एससीईआरटी में नियुक्त किया है।

अब पढ़िए टीचरों की 8 बड़ी बातें…

  • हमारी वीडियो सुने और एक्शन लें: महिला टीचर ने कहा कि चंडीगढ़ के गवर्नर, चीफ सेक्रेटरी और एजुकेशन सेक्रेटरी से विनती की है कि हमारी वीडियो को सुना जाए और उस पर एक्शन लिया जाए। मेरा नाम मेधावी है। मैं सेक्टर-22ए के सरकारी स्कूल में फाइन आर्ट्स टीजीटी टीचर हूं। जबकि दूसरी टीचर प्रतिभा सरकारी स्कूल सेक्टर-27 में जेबीटी पद पर कार्यरत है। हम दोनों अनुसूचित जाति से संबंध रखती हैं और हम यूटी कैडर की टीचर हैं।
  • लंबे समय से हो रहीं उत्पीड़न का शिकार अभी हाल ही में एक दुखदायक घटना हुई है। जातिगत उत्पीड़न के कारण एक उच्च पद के अधिकारी वाई पूरन का निधन हुआ है। हम आपका ध्यान इस ओर दिलाना चाहते हैं कि यह घटना पहली नहीं है और यह आखिरी भी नहीं होगी। क्योंकि हम चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों की शिक्षिकाएं भी इस तरह के जातिगत उत्पीड़न और शोषण का शिकार लंबे समय से हो रही हैं। हम न्याय के लिए इधर-उधर ठोकरें खा रही हैं।
  • 2018 से 2025 तक किया शोषण: मैं सेक्टर-18 के सरकारी गर्ल्स स्कूल में 2018 से 2025 तक तैनात थी। उस समय वहां महिला प्रिंसिपल थी। वह हरियाणा से चंडीगढ़ में 20 सालों से अधिक समय से डेपुटेशन पर जमी हुई हैं। उन्होंने 7 साल तक मुझे प्रताड़ित किया है। क्योंकि मैं अनुसूचित जाति से संबंध रखती हूं। उनके लिए हम एससी और छोटे तबके से संबंध रखने वाले लोग आसान टारगेट होते हैं।
  • नौकरी से निकालने की धमकी: वह अक्सर स्कूल टाइम और उसके बाद अपने घर साफ-सफाई, सजावट व मेहंदी-मेकअप के लिए बुलाती थीं। मुझे प्रोबेशन का डर दिखाकर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती थी। मुझे अक्सर स्टाफ, पेरेंट्स और बच्चों के सामने गंदे-भद्दे कमेंट्स के साथ जलील किया जाता था, और अंत में जब उन्होंने सारी हदें पार कर दीं, तो उन्होंने मुझे बहुत गंदी अनुसूचित जाति की गालियां दीं। मुझे नौकरी से निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी। फर्जी कागजी कार्रवाई शुरू की।
  • लड़ाई शुरू की, केस दर्ज करवाया: जब पानी सिर से ऊपर निकल गया और बात मेरे सुसाइड तक आ गई, तो मैंने परिवार के सहयोग से मरने की बजाय लड़ने का फैसला लिया। मरने और लड़ने में बहुत हिम्मत लगती है। तो जब मैंने लड़ाई लड़ी, तो उस प्रिंसिपल मैडम के खिलाफ चंडीगढ़ शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग, एससी आयोग जहां भी शिकायत कर सकती थी, वहां लड़ाई शुरू की। जो आज भी जारी है। लोगों के सहयोग से प्रिंसिपल के खिलाफ एससी एक्ट में केस दर्ज है। आज भी वह केस चंडीगढ़ कोर्ट में चल रहा है। लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन से मुझे न्याय नहीं मिला है।
  • बड़े नेताओं का नाम लेकर डराता है: संबंधित प्रिंसिपल 58 साल की उम्र में रिटायर हो चुकी हैं। उन्हें 2 साल स्टेट अवॉर्ड के नाम पर एक्सटेंशन दी जानी थी, जो कि अपनी स्टेट में दी जानी थी, लेकिन वह चंडीगढ़ में दी गई। किस पॉलिसी के आधार पर दिया गया है, ताकि वह मुझे तंग करती रहें। एक टीचर के साथ मिलकर मुझे जान से मारने की धमकियां दी हैं। मेरे पर दबाव बनाया जाता है, ताकि मैं केस वापस ले लूं।
  • मेरा सारा रिकॉर्ड तक खराब किया: ये टीचर सेक्टर-16 के स्कूल में 2019 से लेकर 2025 तक प्रतिभा मैम के साथ कार्यरत रहा है। वहां पर ये भी तैनात था। ये टीचर प्रताड़ित करता रहा है। कभी उन्हें नीच कहता है। प्रतिभा मैम ने भी कई शिकायतें शिक्षा विभाग में दी हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला है।
  • क्या हमें भी न्याय मरने के बाद मिलेगा: दूसरे सेक्टर के स्कूल की प्रिंसिपल ने उसके कहने पर एसीआर खराब की। मेरा रिकॉर्ड खराब किया गया। शिक्षा विभाग उन्हें इनडायरेक्टली पूरा सहयोग कर रहा है। क्या हमें भी न्याय मरने के बाद मिलेगा। क्या आप मेरी मौत का इंतजाम कर रहे हैं। अगर कुछ भी होता है तो इसके लिए जिम्मेदारी केवल ये दो नहीं बल्कि प्रशासन और देश की न्याय प्रणाली होगी।

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