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घाटी में टारगेट किलिंग गंभीर मुद्दा, देश पर पड़ा रहा असर


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धरती पर स्वर्ग कही जाने वाली कश्मीर घाटी में टारगेट किलिंग से देश भर में आक्रोश है। वहां आए दिन कश्मीरी पंडितों सहित गैर कश्मीरियों को निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में महिला शिक्षक और बैंक मैनेजर की हत्या से कश्मीर घाटी में लोग डरे हुए हैं। हालात ऐसे बेकाबू हैं कि वहां के बाशिंदों ने पलायन की चेतावनी दी है। सोमवार का अमर उजाला की ओर से संवाद में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने इस संबंध में अपने विचार साझा किए। सभी लोगों ने कहा कि सरकार को घाटी में कड़े कदम उठाते हुए समस्या का स्थायी निदान करना होगा।
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फोटो:- 11
भाईचारे के प्रति करना होगा जागरूक
गांव गुमथला निवासी अधिवक्ता वरयाम सिंह ने कहा कि लोगों को भाईचारे के प्रति जागरूक करना होगा। कुछ शरारती लोग नफरत घोल रहे हैं। जिससे लोगों में नफरत का जहर विचारों में घर कर चुका है। जिसे दूर करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इसके लिए प्रशासनिक बैठक कर लोगों की राय लेनी चाहिए। जिससे सरकार इस दिशा में सटीक कदम उठाकर काम कर सकेगी।
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फोटो:- 12
बच्चों को एकता की देनी होगी शिक्षा
गांव गुमथला राव स्थित सरकारी स्कूल के अध्यापक रतन सिंह ने बताया कि नफरत कम हो इसके बच्चों में प्रेम जगाना होगा। बच्चों को स्कूल स्तर पर ही देश की एकता, संप्रभुता, अखंडता व अनेकता में एकता की शिक्षा देनी होगी। बच्चों को सभी धर्मों, संस्कृतियों और भाषाओं का सम्मान करना सिखाना होगा। बच्चों को जागरूक करना होगा ,तभी शांति बहाल की जा सकती हैं।
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फोटो:- 13
सरकार को निकाला चाहिए स्थायी समाधान
अधिवक्ता पूजा अरोड़ा ने कहा कि आजादी के समय से ही कश्मीर जलता आ रहा है। सरकारों ने इसका स्थायी निदान नहीं किया। जब भी इस दिशा में कदम उठाए जाते हैं, तो घाटी के हालात गंभीर हो जाते हैं। ऐसे में सभी को मिलकर इसमें प्रयास करना होगा। सबसे पहले कश्मीर के पिछड़े लोगों को मुख्य धारा में जोड़ना होगा। युवाओं को भटकने से रोकने के लिए रोजगार की व्यवस्था करनी होगी।
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फोटो:- 14
उठाने होंगे कुछ सख्त कदम
समाजसेवी नरसिंह पाल ने कहा कि कश्मीर भारत का ताज है। घाटी के बिगड़ते हालात देशभर के लिए चिंता का विषय हैं। वहां चंद लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए युवाओं को भटका रहे हैं। दिशाहीन युवा उनकी बातों में आकर अमानवीय कृत्य करने पर उतर जाते हैं। इसके लिए युवाओं को सही दिशा दिखानी होगी। सरकार को यहां कुछ सख्त कदम उठाने होंगे, अन्यथा कश्मीर ऐसे ही जलता रहेगा।

धरती पर स्वर्ग कही जाने वाली कश्मीर घाटी में टारगेट किलिंग से देश भर में आक्रोश है। वहां आए दिन कश्मीरी पंडितों सहित गैर कश्मीरियों को निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में महिला शिक्षक और बैंक मैनेजर की हत्या से कश्मीर घाटी में लोग डरे हुए हैं। हालात ऐसे बेकाबू हैं कि वहां के बाशिंदों ने पलायन की चेतावनी दी है। सोमवार का अमर उजाला की ओर से संवाद में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने इस संबंध में अपने विचार साझा किए। सभी लोगों ने कहा कि सरकार को घाटी में कड़े कदम उठाते हुए समस्या का स्थायी निदान करना होगा।

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भाईचारे के प्रति करना होगा जागरूक

गांव गुमथला निवासी अधिवक्ता वरयाम सिंह ने कहा कि लोगों को भाईचारे के प्रति जागरूक करना होगा। कुछ शरारती लोग नफरत घोल रहे हैं। जिससे लोगों में नफरत का जहर विचारों में घर कर चुका है। जिसे दूर करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इसके लिए प्रशासनिक बैठक कर लोगों की राय लेनी चाहिए। जिससे सरकार इस दिशा में सटीक कदम उठाकर काम कर सकेगी।

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बच्चों को एकता की देनी होगी शिक्षा

गांव गुमथला राव स्थित सरकारी स्कूल के अध्यापक रतन सिंह ने बताया कि नफरत कम हो इसके बच्चों में प्रेम जगाना होगा। बच्चों को स्कूल स्तर पर ही देश की एकता, संप्रभुता, अखंडता व अनेकता में एकता की शिक्षा देनी होगी। बच्चों को सभी धर्मों, संस्कृतियों और भाषाओं का सम्मान करना सिखाना होगा। बच्चों को जागरूक करना होगा ,तभी शांति बहाल की जा सकती हैं।

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सरकार को निकाला चाहिए स्थायी समाधान

अधिवक्ता पूजा अरोड़ा ने कहा कि आजादी के समय से ही कश्मीर जलता आ रहा है। सरकारों ने इसका स्थायी निदान नहीं किया। जब भी इस दिशा में कदम उठाए जाते हैं, तो घाटी के हालात गंभीर हो जाते हैं। ऐसे में सभी को मिलकर इसमें प्रयास करना होगा। सबसे पहले कश्मीर के पिछड़े लोगों को मुख्य धारा में जोड़ना होगा। युवाओं को भटकने से रोकने के लिए रोजगार की व्यवस्था करनी होगी।

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उठाने होंगे कुछ सख्त कदम

समाजसेवी नरसिंह पाल ने कहा कि कश्मीर भारत का ताज है। घाटी के बिगड़ते हालात देशभर के लिए चिंता का विषय हैं। वहां चंद लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए युवाओं को भटका रहे हैं। दिशाहीन युवा उनकी बातों में आकर अमानवीय कृत्य करने पर उतर जाते हैं। इसके लिए युवाओं को सही दिशा दिखानी होगी। सरकार को यहां कुछ सख्त कदम उठाने होंगे, अन्यथा कश्मीर ऐसे ही जलता रहेगा।

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