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गलत रिपोर्ट देने पर निजी लैब संचालक पर लगाया 5 हजार रुपये का जुर्माना


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सिरसा। सांगवान चौक पर स्थित एक निजी लैब पर स्वास्थ्य विभाग ने गलत रिपोर्ट देने पर पांच हजार रुपये को जुर्माना लगाया है। इस संबंध में गांव भंबूर निवासी प्रगट सिंह ने सीएम विड़ो पर शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी।
शिकायतकर्ता प्रगट सिंह ने कहा कि लैब संचालक गलत टेस्ट रिपोर्ट देकर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। इसको देखते हुए केवल जुर्माना करना ही ठीक नहीं है, बल्कि लैब को सील कर संचालक के खिलाफ बनती कार्रवाई की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह इस मामले को गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के दरबार में भी लेकर जाएगा।
बता दें कि प्रगट सिंह ने सांगवान चौक पर स्थित एक लैब और अन्य एक लैब से अपने टेस्ट करवाए थे, जिनकी रिपोर्ट में काफी अंतर था। जब इस संबंधी लैब संचालक से बात की तो वह अपनी गलती मानने के बजाय उसे ही धमकाने लगा। इस पर उसने सीएम विंडो का सहारा लिया। जिस पर उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक उप सिविल सर्जन डॉ. विपुल गुप्ता के नेतृत्व में टीम बनाकर मामले की जांच की तो लैब संचालक को दोषी पाया गया। विभाग की जांच में पाया गया कि लैब क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत नहीं हैं और बिना किसी डॉक्टरी सलाह के टेस्ट किए जा रहे हैं। इसके चलते लैब संचालक पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई। लैब संचालक को तुरंत प्रभाव से जुर्माना अदा करने के निर्देश दिए हैं।

सिरसा। सांगवान चौक पर स्थित एक निजी लैब पर स्वास्थ्य विभाग ने गलत रिपोर्ट देने पर पांच हजार रुपये को जुर्माना लगाया है। इस संबंध में गांव भंबूर निवासी प्रगट सिंह ने सीएम विड़ो पर शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी।

शिकायतकर्ता प्रगट सिंह ने कहा कि लैब संचालक गलत टेस्ट रिपोर्ट देकर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। इसको देखते हुए केवल जुर्माना करना ही ठीक नहीं है, बल्कि लैब को सील कर संचालक के खिलाफ बनती कार्रवाई की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह इस मामले को गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के दरबार में भी लेकर जाएगा।

बता दें कि प्रगट सिंह ने सांगवान चौक पर स्थित एक लैब और अन्य एक लैब से अपने टेस्ट करवाए थे, जिनकी रिपोर्ट में काफी अंतर था। जब इस संबंधी लैब संचालक से बात की तो वह अपनी गलती मानने के बजाय उसे ही धमकाने लगा। इस पर उसने सीएम विंडो का सहारा लिया। जिस पर उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक उप सिविल सर्जन डॉ. विपुल गुप्ता के नेतृत्व में टीम बनाकर मामले की जांच की तो लैब संचालक को दोषी पाया गया। विभाग की जांच में पाया गया कि लैब क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत नहीं हैं और बिना किसी डॉक्टरी सलाह के टेस्ट किए जा रहे हैं। इसके चलते लैब संचालक पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई। लैब संचालक को तुरंत प्रभाव से जुर्माना अदा करने के निर्देश दिए हैं।

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