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खुले दरबार में गलत बिल की लगाई फरियाद तो उपभोक्ता को ही बना दिया झूठा, आश्वासन के बाद शाम को काट दिया कनेक्शन


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पानीपत। बिजली निगम के एक उपभोक्ता को उसके ही मीटर अकांउट में बिल के 44 हजार रुपये जमा करवाना महंगा पड़ गया। निगम अधिकारियों ने उसे फिर से 64 हजार रुपये का बिल भेज दिया। शिकायत की तो अधिकारी उनसे सबूत मांगने लगे। एक साल तक चक्कर काटने के बाद उपभोक्ता बुधवार को खुले दरबार में पहुंचा लेकिन यहां अधिकारियों ने उसे झूठा करार दिया। इसके बाद उसकी समस्या का समाधान करने का आश्वासन देते हुए घर भेज दिया। यहां समस्या का समाधान तो नहीं किया दो घंटे बाद बिजली कनेक्शन काट दिया।
खटीक बस्ती के रहने वाले अजय कुमार ने अपने अपने बिजली अकाउंट में 31 अगस्त 2020 को 44 हजार रुपये जमा करवाए थे। इसके तीन महीने बाद 7 अक्तूबर 2020 को निगम ने उसे 64 हजार रुपये का बिल भेज दिया। इसकी शिकायत करते हुए अजय ने जमा करवाए हुए पैसों की रसीद तक एसडीओ सनौली रोड को दी, लेकिन उपभोक्ता की समस्या का समाधान नहीं हुआ। तब से लेकर आज तक अजय लगातार निगम कार्यालय में अपनी समस्या को लेकर चक्कर काट रहा है लेकिन कोई इसका हल नहीं निकला। अब उपभोक्ता ने अपनी फरियाद खुले दरबार में फरियाद लगाई तो अधिकारियों ने उसे अनसुना कर दिया। जिसके बाद शाम को उसके घर का बिजली कनेक्शन काटकर मीटर तक उखाड़ ले गए।
बाक्स
पैसे जमा होने के बाद भी काट दी बिजली
अजय ने बताया कि जब उसे खुले दरबार में अपनी बात रखी तो अधिकारियों ने उसे ही झूठा ठहरा दिया। अधिकारियों ने कहा कि कहीं ओर के पैसे इनके अकाउंट में जमा हो गए हैं। जिसका तीन महीने बाद ब्याज लगाकर उसके अकाउंट में जोड़ा गया है। अजय ने जवाब दिया कि अगर किसी और ने ये पैसे जमा किए हैं तो उसके सबूत उसे दिखाएं जाएं। इस पर चेयरमेन आरके शर्मा ने कहा कि उपभोक्ता से 44 हजार छोड़कर बाकी पैसे भरवाए जाएं। लेकिन शाम को उसके घर की बिजली काट दी गई है।
बाक्स
बोगस पैसे जमा होने की हुई चर्चा-
खुले दरबार में बैठे कुछ निगम अधिकारियों ने कहा है कि 2020 में बिजली बिल बोगस मामले में कुछ उपभोक्ता के अकाउंट में पैसे जमा हो गए थे। जिसे कुछ दिन बाद बिल बनाकर भेजा था। अब न तो उपभोक्ता के पास जमा पर्ची है न ही बिजली निगम के पास कोई दस्तावेज है कि पैसे उसके बिजली अकाउंट में किसने ये पैसे जमा किए हैं। जिससे यह केस खुले दरबार में गुत्थी ही बना हुआ है।
कोट
इस शिकायत के मामले में जो 44 हजार रुपये जमा दिखाए गए हैं। उससे अतिरिक्त जो बिल है, उसे उपभोक्ता किस्त में जमा कर दे।
-आरके शर्मा,चेयरमैन

पानीपत। बिजली निगम के एक उपभोक्ता को उसके ही मीटर अकांउट में बिल के 44 हजार रुपये जमा करवाना महंगा पड़ गया। निगम अधिकारियों ने उसे फिर से 64 हजार रुपये का बिल भेज दिया। शिकायत की तो अधिकारी उनसे सबूत मांगने लगे। एक साल तक चक्कर काटने के बाद उपभोक्ता बुधवार को खुले दरबार में पहुंचा लेकिन यहां अधिकारियों ने उसे झूठा करार दिया। इसके बाद उसकी समस्या का समाधान करने का आश्वासन देते हुए घर भेज दिया। यहां समस्या का समाधान तो नहीं किया दो घंटे बाद बिजली कनेक्शन काट दिया।

खटीक बस्ती के रहने वाले अजय कुमार ने अपने अपने बिजली अकाउंट में 31 अगस्त 2020 को 44 हजार रुपये जमा करवाए थे। इसके तीन महीने बाद 7 अक्तूबर 2020 को निगम ने उसे 64 हजार रुपये का बिल भेज दिया। इसकी शिकायत करते हुए अजय ने जमा करवाए हुए पैसों की रसीद तक एसडीओ सनौली रोड को दी, लेकिन उपभोक्ता की समस्या का समाधान नहीं हुआ। तब से लेकर आज तक अजय लगातार निगम कार्यालय में अपनी समस्या को लेकर चक्कर काट रहा है लेकिन कोई इसका हल नहीं निकला। अब उपभोक्ता ने अपनी फरियाद खुले दरबार में फरियाद लगाई तो अधिकारियों ने उसे अनसुना कर दिया। जिसके बाद शाम को उसके घर का बिजली कनेक्शन काटकर मीटर तक उखाड़ ले गए।

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पैसे जमा होने के बाद भी काट दी बिजली

अजय ने बताया कि जब उसे खुले दरबार में अपनी बात रखी तो अधिकारियों ने उसे ही झूठा ठहरा दिया। अधिकारियों ने कहा कि कहीं ओर के पैसे इनके अकाउंट में जमा हो गए हैं। जिसका तीन महीने बाद ब्याज लगाकर उसके अकाउंट में जोड़ा गया है। अजय ने जवाब दिया कि अगर किसी और ने ये पैसे जमा किए हैं तो उसके सबूत उसे दिखाएं जाएं। इस पर चेयरमेन आरके शर्मा ने कहा कि उपभोक्ता से 44 हजार छोड़कर बाकी पैसे भरवाए जाएं। लेकिन शाम को उसके घर की बिजली काट दी गई है।

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बोगस पैसे जमा होने की हुई चर्चा-

खुले दरबार में बैठे कुछ निगम अधिकारियों ने कहा है कि 2020 में बिजली बिल बोगस मामले में कुछ उपभोक्ता के अकाउंट में पैसे जमा हो गए थे। जिसे कुछ दिन बाद बिल बनाकर भेजा था। अब न तो उपभोक्ता के पास जमा पर्ची है न ही बिजली निगम के पास कोई दस्तावेज है कि पैसे उसके बिजली अकाउंट में किसने ये पैसे जमा किए हैं। जिससे यह केस खुले दरबार में गुत्थी ही बना हुआ है।

कोट

इस शिकायत के मामले में जो 44 हजार रुपये जमा दिखाए गए हैं। उससे अतिरिक्त जो बिल है, उसे उपभोक्ता किस्त में जमा कर दे।

-आरके शर्मा,चेयरमैन

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