कोरोना के कारण बच्चों का रुटीन टीकाकरण हुआ काफी प्रभावित, 30 प्रतिशत बच्चों को नहीं लग पाई बूस्टर डोज


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कोरोना महामारी के कारण 30 फीसदी बच्चों का पूरा नहीं हो पाया टीकाकरण
जींद। बच्चों को जन्म से लेकर 16 वर्ष की आयु तक छह गंभीर बीमारियों को बचाने के लिए समय-समय पर वैक्सीन दी जाती हैं। इससे उनमें इन बीमारियों से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और वह बीमारियों से बचे रहते हैं। कोरोना काल के दौरान जिले में 30 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें नियमित वैक्सीन नहीं लग सकी। ऐसे बच्चों के टीकाकरण को अब स्वास्थ्य विभाग ने छह से 12 जून तक विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया है।
जिले में प्रति वर्ष साढ़े 22 हजार बच्चे पैदा होते हैं। इसलिए वर्ष 2020-2021 के लगभग 45 हजार बच्चों को बूस्टर डोज और अन्य वैक्सीन लगाई जाएंगी। बच्चों को जन्म के समय बीसीजी, ओरल पोलियो वैक्सीन और हेपेटाइट्स बी वैक्सीन लगाई जाती है। छह सप्ताह बाद बच्चों को डीपीटी-1, एनएक्टिवेटिड पोलियो वैक्सीन, रोटावायरस-1 न्यूमोकॉकल कांन्जुगेट वैक्सीन लगाई जाती है। जन्म के 10 सप्ताह के बाद डीपीटी की दूसरी डोज, पोलियो की दूसरी डोज और रोटावायरस की दूसरी डोज दी जाती है। माता-पिता दो वर्ष तक के बच्चों को तो सभी प्रकार की डोज लगवा लेते हैं लेकिन इसके बाद भी वैक्सीन की जो बूस्टर डोज होती है, वह नहीं लगवाते। इससे बच्चों में पहले से ही बनी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लग जाती है। यदि बच्चों को बूस्टर डोज नहीं लगवाई जाए तो बच्चों को गंभीर बीमारियों हो सकती हैं।
बॉक्स
बच्चों को लगाई जाने वाली वैक्सीन व समय
समय वैक्सीन की खुराक
जन्म के समय बीसीजी,पोलियो, हेपेटाइटस-बी
छह सप्ताह डीपीटी, एनएक्टिवेटिड, पोलियो,रोटावायरस, न्यूमोकॉकल कांजुगेट
10 सप्ताह डीपीटी ,रोटावायरस और पोलियो की दूसरी खुराक
14 सप्ताह डीपी,रोटावायरस और पोलियो से बचाव की तीसरी खुराक
नौ से 12 माह खसरा और रुबेला-वन
16 से 24 माह खसरा की दूसरी खुराक, डीपीटी की बूस्टर डोज,ओरल पोलियो बूस्टर डोज
5-6 साल का होने पर डीपीटी की बूस्टर डोज
10 वर्ष का होने पर टेटनस टोक्साइड या टेटनस एंड एडल्ट डिप्थीरिया
16 वर्ष का होने पर टेटनस टोक्साइड या टेटनस एंड एडल्ट डिप्थीरिया की बूस्टर डोज
बॉक्स
बच्चे के विकास के लिए बहुत अहम होता है टीकाकरण
नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रघुबीर पूनिया ने बताया कि जन्म के समय लगने वाले बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटस बी के टीके प्रसव के बाद अस्पताल में ही दिए जाते हैं। इसके बाद के टीके अस्पताल या आंगनबाड़ी केंद्र में लगाए जाते हैं। पहले वर्ष में लगने वाले टीकों में देरी नहीं होनी चाहिए। इसमें अधिक से अधिक एक या दो सप्ताह की देरी हो सकती है लेकिन इससे अधिक देरी बच्चों को बीमारियों का न्यौता दे सकती हैं।
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जिले में 30 प्रतिशत बच्चों को बूस्टर डोज नहीं लग पाई है। यह सब कोरोना संक्रमण के कारण हुआ। अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष टीकाकरण अभियान चलाया है ताकि सभी बच्चों को बूस्टर डोज लगाई जा सके। बच्चों के विकास व बीमारियों से लड़ने के लिए यह बहुत ही जरूरी है। सभी अभिभावकों को अपने बच्चों को सही समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए।
-डॉ. नवनीत सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी।
फोटो कैप्शन
06जेएनडी01 : नागरिक अस्पताल में बच्चों का टीकाकरण करते स्वास्थ्य कर्मचारी। संवाद।

कोरोना महामारी के कारण 30 फीसदी बच्चों का पूरा नहीं हो पाया टीकाकरण

जींद। बच्चों को जन्म से लेकर 16 वर्ष की आयु तक छह गंभीर बीमारियों को बचाने के लिए समय-समय पर वैक्सीन दी जाती हैं। इससे उनमें इन बीमारियों से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और वह बीमारियों से बचे रहते हैं। कोरोना काल के दौरान जिले में 30 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें नियमित वैक्सीन नहीं लग सकी। ऐसे बच्चों के टीकाकरण को अब स्वास्थ्य विभाग ने छह से 12 जून तक विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया है।

जिले में प्रति वर्ष साढ़े 22 हजार बच्चे पैदा होते हैं। इसलिए वर्ष 2020-2021 के लगभग 45 हजार बच्चों को बूस्टर डोज और अन्य वैक्सीन लगाई जाएंगी। बच्चों को जन्म के समय बीसीजी, ओरल पोलियो वैक्सीन और हेपेटाइट्स बी वैक्सीन लगाई जाती है। छह सप्ताह बाद बच्चों को डीपीटी-1, एनएक्टिवेटिड पोलियो वैक्सीन, रोटावायरस-1 न्यूमोकॉकल कांन्जुगेट वैक्सीन लगाई जाती है। जन्म के 10 सप्ताह के बाद डीपीटी की दूसरी डोज, पोलियो की दूसरी डोज और रोटावायरस की दूसरी डोज दी जाती है। माता-पिता दो वर्ष तक के बच्चों को तो सभी प्रकार की डोज लगवा लेते हैं लेकिन इसके बाद भी वैक्सीन की जो बूस्टर डोज होती है, वह नहीं लगवाते। इससे बच्चों में पहले से ही बनी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लग जाती है। यदि बच्चों को बूस्टर डोज नहीं लगवाई जाए तो बच्चों को गंभीर बीमारियों हो सकती हैं।

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बच्चों को लगाई जाने वाली वैक्सीन व समय

समय वैक्सीन की खुराक

जन्म के समय बीसीजी,पोलियो, हेपेटाइटस-बी

छह सप्ताह डीपीटी, एनएक्टिवेटिड, पोलियो,रोटावायरस, न्यूमोकॉकल कांजुगेट

10 सप्ताह डीपीटी ,रोटावायरस और पोलियो की दूसरी खुराक

14 सप्ताह डीपी,रोटावायरस और पोलियो से बचाव की तीसरी खुराक

नौ से 12 माह खसरा और रुबेला-वन

16 से 24 माह खसरा की दूसरी खुराक, डीपीटी की बूस्टर डोज,ओरल पोलियो बूस्टर डोज

5-6 साल का होने पर डीपीटी की बूस्टर डोज

10 वर्ष का होने पर टेटनस टोक्साइड या टेटनस एंड एडल्ट डिप्थीरिया

16 वर्ष का होने पर टेटनस टोक्साइड या टेटनस एंड एडल्ट डिप्थीरिया की बूस्टर डोज

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बच्चे के विकास के लिए बहुत अहम होता है टीकाकरण

नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रघुबीर पूनिया ने बताया कि जन्म के समय लगने वाले बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटस बी के टीके प्रसव के बाद अस्पताल में ही दिए जाते हैं। इसके बाद के टीके अस्पताल या आंगनबाड़ी केंद्र में लगाए जाते हैं। पहले वर्ष में लगने वाले टीकों में देरी नहीं होनी चाहिए। इसमें अधिक से अधिक एक या दो सप्ताह की देरी हो सकती है लेकिन इससे अधिक देरी बच्चों को बीमारियों का न्यौता दे सकती हैं।

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जिले में 30 प्रतिशत बच्चों को बूस्टर डोज नहीं लग पाई है। यह सब कोरोना संक्रमण के कारण हुआ। अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष टीकाकरण अभियान चलाया है ताकि सभी बच्चों को बूस्टर डोज लगाई जा सके। बच्चों के विकास व बीमारियों से लड़ने के लिए यह बहुत ही जरूरी है। सभी अभिभावकों को अपने बच्चों को सही समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए।

-डॉ. नवनीत सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी।

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06जेएनडी01 : नागरिक अस्पताल में बच्चों का टीकाकरण करते स्वास्थ्य कर्मचारी। संवाद।

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Written by Haryanacircle

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