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कॉलेज के सामने नहीं रुकतीं बसें, पढ़ाई के लिए तीन किमी. पैदल चलने को बेबस बेटियां


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हिसार। 47 डिग्री तापमान में पढ़ाई के लिए बेटियों को अग्नि परीक्षा देनी पड़ रही है। नेशनल हाईवे स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय व राजकीय बहुतकनीकी संस्थान की छात्राओं को इस भीषण गर्मी में बसों के न रुकने के कारण घंटों बिना शेड के खड़ा रहना पड़ता है। इसके बाद जब घर जाने की जल्दी होती है तो बेटियों को बस स्टैंड तक करीब तीन किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है।
राजकीय महिला महाविद्यालय की छात्रा पूनम, अंजीत, निशा, रविना, मनीता, चंद्रकांता, मुकेश, सोनू, निधि ने बताया कि रोडवेज की सभी बसें यहां नहीं रुकती। छात्राएं अगर संख्या में खड़ी हों तो चालक बस रोक लेते हैं। अन्यथा बसों को दौड़ा ले जाते हैं। छात्राओं ने बताया कि यही हाल प्राइवेट बसों का है। हैरानी की बात है कि एक तरफ तो छात्राएं बसों की समस्याओं से परेशान हो रही है। वहीं दूसरी ओर स्पेशल छात्राओं के लिए चलाई गई पिंक बसें रोडवेज वर्कशॉप में खड़ी धूल फांक रही है।
3 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है बस स्टेंड
बहुतकनीकी संस्थान के छात्र रोहित, उमेश, हर्ष व हितेश और महिला कॉलेज की छात्राओं ने बताया कि एक तो तेज धूप में खड़े होकर उन्हें बसों का इंतजार करना पड़ता है और जब बस आती है तो वह रुकती तक नहीं है। ऐसे में उन्हें मजबूरन करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर बस स्टैंड पर जाना पड़ता है। विद्यार्थियों ने कहा कि शेड नहीं लगे होने के कारण उन्हें धूप में खड़ा रहना पड़ता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि दोनों संस्थानों के सामने एक स्थायी तौर पर बस स्टॉप बनाया जाए व शेड की व्यवस्था की जाए।
बस नहीं रुकने से 3 हजार छात्राएं परेशान
राजकीय महिला महाविद्यालय में करीब 3 हजार व बहुतकनीकी संस्थान में करीब 1 हजार छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं। इन 4 हजार में से करीब 3 हजार छात्राओं को कॉलेज आने-जाने के लिए बसों की समस्या से जूझना पड़ता है। छात्राओं का कहना है कि बस स्टैंड कॉलेज तक आने के लिए भी परेशानी होती है व कॉलेज से बस स्टैं पर जाने के लिए भी परेशान होना पड़ता है।
प्राइवेट वाहनों से लेनी पड़ती है लिफ्ट
वहीं, छात्र रवि, हर्ष, नवदीप, दीपक, रोहित आदि ने बताया कि बस चालकों को जब बहुतकनीकी संस्थान के छात्र दिख जाते हैं तो बसों को स्पीड ओर तेज कर लेते हैं। ऐसे में छात्रों को कभी ट्रैक्टर, कभी कैंटर व अन्य गाड़ी में लिफ्ट लेकर बस स्टैंड तक जाना पड़ता है।
हमारे विद्यार्थियों को संस्थान तक आने-जाने के लिए बसों की समस्या से जूझना पड़ रहा है। रोडवेज निगम छात्राओं के हित में स्पेशल बसों को संस्थान तक चला देना चाहिए। बहुतकनीकी संस्थान व महिला कॉलेज के सामने बस रुकने के लिए रोडवेज निगम ने आदेश भी जारी किए हैं जो हमने विद्यार्थियों के ग्रुप में भेज दिए हैं। कई बसें तो रुक जाती हैं, लेकिन सभी बसें नहीं रुकती हैं। – अशोक कुमार, प्राचार्य राजकीय बहुतकनीकी संस्थान हिसार

हिसार दिल्ली बाईपास रोड पर छात्र बस ना रुकने पर ट्रॉली में बैठकर जाते हुए। संवाद

हिसार दिल्ली बाईपास रोड पर छात्र बस ना रुकने पर ट्रॉली में बैठकर जाते हुए। संवाद– फोटो : Hisar

दिल्ली बाईपास पर बस के इंतजार में धूप में खड़ी छात्राएं। संवाद

दिल्ली बाईपास पर बस के इंतजार में धूप में खड़ी छात्राएं। संवाद– फोटो : Hisar

हिसार दिल्ली बाईपास पर छात्राएं बस को रुकवाने की कोशिश करती हुई। संवाद

हिसार दिल्ली बाईपास पर छात्राएं बस को रुकवाने की कोशिश करती हुई। संवाद– फोटो : Hisar

हिसार। 47 डिग्री तापमान में पढ़ाई के लिए बेटियों को अग्नि परीक्षा देनी पड़ रही है। नेशनल हाईवे स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय व राजकीय बहुतकनीकी संस्थान की छात्राओं को इस भीषण गर्मी में बसों के न रुकने के कारण घंटों बिना शेड के खड़ा रहना पड़ता है। इसके बाद जब घर जाने की जल्दी होती है तो बेटियों को बस स्टैंड तक करीब तीन किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है।

राजकीय महिला महाविद्यालय की छात्रा पूनम, अंजीत, निशा, रविना, मनीता, चंद्रकांता, मुकेश, सोनू, निधि ने बताया कि रोडवेज की सभी बसें यहां नहीं रुकती। छात्राएं अगर संख्या में खड़ी हों तो चालक बस रोक लेते हैं। अन्यथा बसों को दौड़ा ले जाते हैं। छात्राओं ने बताया कि यही हाल प्राइवेट बसों का है। हैरानी की बात है कि एक तरफ तो छात्राएं बसों की समस्याओं से परेशान हो रही है। वहीं दूसरी ओर स्पेशल छात्राओं के लिए चलाई गई पिंक बसें रोडवेज वर्कशॉप में खड़ी धूल फांक रही है।

3 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है बस स्टेंड

बहुतकनीकी संस्थान के छात्र रोहित, उमेश, हर्ष व हितेश और महिला कॉलेज की छात्राओं ने बताया कि एक तो तेज धूप में खड़े होकर उन्हें बसों का इंतजार करना पड़ता है और जब बस आती है तो वह रुकती तक नहीं है। ऐसे में उन्हें मजबूरन करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर बस स्टैंड पर जाना पड़ता है। विद्यार्थियों ने कहा कि शेड नहीं लगे होने के कारण उन्हें धूप में खड़ा रहना पड़ता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि दोनों संस्थानों के सामने एक स्थायी तौर पर बस स्टॉप बनाया जाए व शेड की व्यवस्था की जाए।

बस नहीं रुकने से 3 हजार छात्राएं परेशान

राजकीय महिला महाविद्यालय में करीब 3 हजार व बहुतकनीकी संस्थान में करीब 1 हजार छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं। इन 4 हजार में से करीब 3 हजार छात्राओं को कॉलेज आने-जाने के लिए बसों की समस्या से जूझना पड़ता है। छात्राओं का कहना है कि बस स्टैंड कॉलेज तक आने के लिए भी परेशानी होती है व कॉलेज से बस स्टैं पर जाने के लिए भी परेशान होना पड़ता है।

प्राइवेट वाहनों से लेनी पड़ती है लिफ्ट

वहीं, छात्र रवि, हर्ष, नवदीप, दीपक, रोहित आदि ने बताया कि बस चालकों को जब बहुतकनीकी संस्थान के छात्र दिख जाते हैं तो बसों को स्पीड ओर तेज कर लेते हैं। ऐसे में छात्रों को कभी ट्रैक्टर, कभी कैंटर व अन्य गाड़ी में लिफ्ट लेकर बस स्टैंड तक जाना पड़ता है।

हमारे विद्यार्थियों को संस्थान तक आने-जाने के लिए बसों की समस्या से जूझना पड़ रहा है। रोडवेज निगम छात्राओं के हित में स्पेशल बसों को संस्थान तक चला देना चाहिए। बहुतकनीकी संस्थान व महिला कॉलेज के सामने बस रुकने के लिए रोडवेज निगम ने आदेश भी जारी किए हैं जो हमने विद्यार्थियों के ग्रुप में भेज दिए हैं। कई बसें तो रुक जाती हैं, लेकिन सभी बसें नहीं रुकती हैं। – अशोक कुमार, प्राचार्य राजकीय बहुतकनीकी संस्थान हिसार

हिसार दिल्ली बाईपास रोड पर छात्र बस ना रुकने पर ट्रॉली में बैठकर जाते हुए। संवाद

हिसार दिल्ली बाईपास रोड पर छात्र बस ना रुकने पर ट्रॉली में बैठकर जाते हुए। संवाद– फोटो : Hisar

दिल्ली बाईपास पर बस के इंतजार में धूप में खड़ी छात्राएं। संवाद

दिल्ली बाईपास पर बस के इंतजार में धूप में खड़ी छात्राएं। संवाद– फोटो : Hisar

हिसार दिल्ली बाईपास पर छात्राएं बस को रुकवाने की कोशिश करती हुई। संवाद

हिसार दिल्ली बाईपास पर छात्राएं बस को रुकवाने की कोशिश करती हुई। संवाद– फोटो : Hisar

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