कार में जिंदा जले तीन दोस्त: NHAI की लापरवाही ने लील ली तीन जिंदगी, रिफ्लेक्टर होते तो बच सकती थी जान


हरियाणा के सोनीपत में नेशनल हाईवे बनने से जहां लोगों को सुविधा मिल रही है, वहीं अधूरे निर्माण कार्य व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है। एनएच-334बी पर हुए दर्दनाक हादसे में एमबीबीएस के तीन छात्र जिंदा जल गए। इस मामले में जान गंवाने वाले छात्र के पिता ने एनएचएआई पर घोर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कुछ दिन पहले एनएच-44 पर भी पराठे खाने आए दिल्ली के तीन युवकों की जान गई थी। 

हाईवे पर यात्रा के दौरान अक्सर वाहन चालक बेहतर यात्रा को लेकर आश्वस्त हो जाते हैं। वह हाईवे पर वाहन की रफ्तार को भी बढ़ा देते हैं। हाईवे पर रफ्तार के तय मानक भी कई बार पीछे छूट जाते हैं। ऐसे में हाईवे पर अधूरे इंतजाम वाहन चालकों पर भारी पड़ते हैं। सड़कों पर बने अवैध कट, बिना सूचना पट के निर्माण कार्य व रात के समय रोशनी की व्यवस्था न होना हादसे का कारण बन जाता है।

तीन छात्रों की मौत के मामले में भी परिजनों का आरोप है कि जहां पर हादसा हुआ है, वहां फ्लाईओवर के पास रास्ता बंद कर बीच सड़क पत्थर के बैरिकेड रखे गए हैं। पत्थरों पर न तो कोई रिफ्लेक्टर लगाया गया था और न ही पेंट किया गया था। कोई चिह्न, मार्का, रोड डाई वर्जन, ब्लिंकर लाइट तक नहीं हैं। जिसके चलते रात को पुलकित पत्थर नहीं देख सका और उनकी कार हादसाग्रस्त हो गई। रात को खाली हाईवे पर कार पत्थर पर ही चढ़ गई और आग लग गई।

केएमपी-केजीपी से लेकर एनएच-44 तक सुविधाओं का अभाव 

कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस वे और कुंडली-गाजियाबाद-पलवल एक्सप्रेस-वे के साथ ही नेशनल हाईवे-44 पर रोजाना सुविधाओं के अभाव में हादसे हो रहे हैं। तीनों ही हाईवे पर सुरक्षा मानकों को अभी तक पूरा नहीं किया गया है। रात के समय केएमपी पर रोशनी की व्यवस्था तक नहीं हो पाई है, जिससे केएमपी पर खड़े वाहनों से पीछे से वाहन टकराकर लोग जान गवां रहे हैं। भारी वाहन चालक तय लेन में न चलकर बीच में या फिर ओवरटेक कर दूसरी लेन में चलते हैं। इससे भी कई हादसे होते हैं। वाहन चालक के नियमों का उल्लंघन करने पर हाईवे पर लगातार कार्रवाई नहीं होती, जिससे भी हादसे होते हैं। इतना ही नहीं एनएच-44 पर भी बदइंतजामी कम नहीं हैं। निर्माण कार्य वाले स्थानों पर सूचना पट्ट या संकेतक होने के साथ ही ब्लैक स्पॉट हादसों की बड़ी वजह है। वाहन चालकों की तेज रफ्तार भी हादसों का सबब बन जाती है।

21 फरवरी को 334 बी पर गई थी दो युवकों की जान

एनएच-334बी पर 21 फरवरी की रात को भी कार स़क़ के बीच रखे कंक्रीट के ब्लॉक से टकरा गई थी। इस हादसे में जन्मदिन मनाने के बाद साथी को छोड़कर लौट रहे दो युवकों की मौत हो गई थी। उस समय निर्माणाधीन हाईवे की सड़क को कंक्रीट के ब्लॉक रखकर बंद किया गया था। 

एनएच-334बी पर बन रहे अवैध कट 

एनएच-334बी पर सुरक्षा के लिहाज से बहुत सी खामियों के साथ ही हाईवे पर कंवाली मोड़ के पास बना अवैध कट हादसों को न्योता दे रहा है। उसे लेकर भी एनएचएआई ठोस कदम नहीं उठा रही है। 

400 केवी लाइन की वजह से बंद किया है हाईवे

एनएचएआई के अधिकारी आनंद सिंह दहिया ने बताया कि राई के पास 334बी हाईवे के ऊपर से 400 केवी की लाइन गुजर रही है, जिसे हटाने का प्रस्ताव भेजा गया है। तब तक के लिए इस मार्ग को जेकेपीटीएल कंपनी के सुझाव पर बंद किया गया है। इस मार्ग पर अभी निर्माण कार्य भी अधूरा है। हालांकि, छोटी गाड़ियों को यहां से गुजरने में कोई खतरा नहीं, लेकिन यदि मार्ग को खोला जाता है तो बड़ी गाड़ियां भी यहां से गुजरने लगेंगी और खतरा बढ़ जाएगा।

केएमपी पर रात को प्रकाश की व्यवस्था के लिए खंभे व लाइट लगाने के साथ ही बिजली कनेक्शन भी लिए जा चुके हैं, लेकिन तार चोरी होना व्यवस्था में बाधा बना हुआ है। पुलिस विभाग के साथ हुई बैठक में भी इस समस्या को उठाया गया, लेकिन चोरी की वारदात नहीं रुकी। इसके चलते ही रात के समय केएमपी पर अंधेरा पसरा रहता है। वहीं, वाहन चालक नियमों को ताक पर रखकर चलते हैं, वह हादसे का कारण बनता है। जहां सुविधाओं की कमी है, उन्हें सुधारा जा रहा है। – आरपी वशिष्ठ, वरिष्ठ प्रबंधक, केएमपी

बहन-भाई से प्रेरणा लेकर एमबीबीएस कर रहे थे पुलकित व रोहित

अपनी बड़ी बहन और भाई से प्रेरणा लेकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे पुलकित और रोहित का सपना पूरा नहीं हो सका। हादसे ने दोनों की जिंदगी लील ली तो संदेश की मौत से उनके इंजीनियर भाई पर भी दुख का पहाड़ टूट गया है। अस्पताल में पहुंचे तीनों छात्रों के सहपाठी भी अपने आंखों से अश्रुधारा नहीं रोक पा रहे थे। सभी की जुबान था कि तीनों पढ़ाई में काफी मेहनती थे। एक हादसे ने तीनों को सदा के लिए परिजनों से अलग कर दिया। 

नारनौल के सेक्टर-1 निवासी रमेश का इकलौता बेटा पुलकित अपनी बड़ी बहन से प्रेरणा लेकर डॉक्टर बनना चाहता था। राजस्थान प्रशासन में अधिकारी रमेश ने भी उसकी चाहत को कभी कम नहीं होने दिया। एमबीबीएस बड़ी बेटी के साथ छोटे बेटे को एमबीबीएस की पढ़ाई करा रहे थे। उनकी बड़ी बेटी एमबीबीएस करने के बाद एमडी कर रही है। वहीं गुरुग्राम के सेक्टर-57 निवासी जय सिंह का बेटा रोहित भी अपने बड़े भाई कमल सिंह से प्रेरित होकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। उनके बड़े भाई ने एमबीबीएस कर एमडी की तैयारी कर रहे हैं। गुरुग्राम की मारुति कंपनी में अधिकारी जय सिंह ने ही पुलिस को शिकायत देकर एनएचएआई अधिकारी और गावड़ कंपनी के मालिक पर मुकदमा दर्ज कराया है। 

जम्मू में तैनात फौजी के बेटे संदेश की भी गई जान

रेवाड़ी के विजय नगर निवासी राजाराम भारतीय सेना में हैं और उनकी तैनाती जम्मू में है। राजाराम के छोटे बेटे संदेश की भी हादसे में जान चली गई। संदेश शुरुआत से ही पढ़ाई में होनहार था। संदेश का बड़ा भाई विकास बेंगलूरू में इंजीनियर हैं। 

पेट्रोल की थी कार, आग लगने पर धू-धू कर जली

गांव राई के पास हादसे के बाद धू-धू कर जली आई-20 कार में सीएनजी किट नहीं थी। पेट्रोल इंजन की गाड़ी जब पत्थर के बैरिकेड से टकराई तो उसमें आग लग गई। बताया गया है कि कार में चार साथी पीछे बैठे थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि उनमें से एक आगे की सीट पर जा गिरा। जिसके बाद कार में आग लग गई। आग ने तीन की जिंदगी लील ली। 

रात को भी वीडियो बनाते रहे राहगीर, चालक ने की मदद

पुलिस के अनुसार रात को आग लगने की सूचना के बाद तुरंत टीम मौके पर पहुंच गई थी। उस समय कई राहगीर वहां खड़े थे। किसी ने मदद नहीं की। चालक विशाल ने ही आगे आकर पुलिस की मदद की। 

आवश्यकता होने पर कराएंगे डीएनए टेस्ट  

कार में आग लगने के बाद तीनों छात्र बुरी तरह से जल गए थे। उनको पहचान पाना संभव नहीं था। परिजनों ने शरीर की बनावट व लंबाई आदि से अंदाजा लगाकर शवों की पहचान की। उसके बाद परिजन शवों को अपने साथ ले गए। उसके बावजूद पुलिस ने तीनों के शवों की एक-एक हड्डी सुरक्षित रखवाई है। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस उनका डीएनए टेस्ट भी करा सकती है। हालांकि पुलिस के सामने परिजनों ने इस तरह की कोई मांग नहीं की है।

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Written by Haryanacircle

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