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उम्मीद की मशाल : हादसे में एक पांव गंवाने के बावजूद नहीं टूटा हौसला, खाकी वाला जगा रहा पर्यावरण संरक्षण की अलख


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सोनीपत। मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी बाधा भी आपका रास्ता रोक नहीं सकती। ऐसा ही कुछ कर रहे हैं दिल्ली पुलिस के सिपाही अशोक आर्य। हादसे में अपना एक पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने दिव्यांगता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और चार साल से पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे हैं। इनके प्रयास का ही परिणाम है कि सेक्टर-23 में चारों तरफ हरियाली नजर आने लगी है। अशोक आर्य के जज्बे से प्रभावित होकर अन्य लोग भी पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देने लगे हैं।
मूलरूप से गांव जागसी और फिलहाल सेक्टर-23 निवासी अशोक आर्य ने बताया कि उनकी शिक्षा सोनीपत से ही हुई है। वर्ष 2010 में उन्होंने दिल्ली पुलिस में नियुक्ति पाई थी। उनका जीवन भी आम लोगों की भांति सामान्य तरीके से ही चल रहा था। वर्ष 2017 में ड्यूटी से लौटते समय ट्रेन से गिर गए थे। इस हादसे में उन्हेें अपना दाहिना पैर गंवाना पड़ा था। हादसे ने उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन किया। पैर गंवाने का दुख था, साथ ही हमेशा यही सोचता था कि किसी पर निर्भर नहीं रहूंगा। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे अशोक ने कड़ा परिश्रम कर अपना हर काम खुद ही किया। शुरुआत में काफी परेशानियां आई लेकिन निरंतर प्रयास से हर काम आसान होता चला गया।
देवेंद्र सूरा से प्रेरित होकर लगाए पौधे
अशोक बताते हैं कि वर्ष 2018 में देवेंद्र सूरा की मुहिम से ऐसी प्रेरणा मिली कि पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का मन करने लगा। इसके लिए सेक्टर में ही पौधे लगाने शुरू किए। ड्यूटी के दौरान सप्ताह में एक दिन का अवकाश मिलता है। यह पूरा दिन पर्यावरण को मजबूती देने में व्यतीत करता हूं। अशोक बताते हैं कि वे अब तक सेक्टर-23 और आसपास के क्षेत्र में करीब 400 से अधिक पौधे लगा चुके हैं। ड्यूटी से आने के बाद इन पौधों में पानी देने, निराई-गुड़ाई करने व पशुओं से इनकी रक्षा करने के लिए ट्री गार्ड व झाड़ियां लगाने का काम करते हैं। अशोक बताते हैं कि इस कार्य से उनके मन को बेहद शांति मिलती है।
सेक्टर 23 नजर आने लगी हरियाल, बुजुर्ग भी हुए प्रेरित
अशोक ने बताया कि सेक्टर-23 को हरा भरा बनाने के लिए शुरू किया गया उनका प्रयास अब रंग लाने लगा है। सेक्टर में हर जगह हरियाली नजर आती है। यही नहीं सेक्टर में रहने वाले बुजुर्ग व युवा भी क्षेत्र को हरा-भरा बनाने मेें योगदान देने लगे हैं। पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देने व आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने के लिए शुरू की गई मुहिम मेें राजेंद्र गहलावत, विनोद कादियान, राहुल आदि पूर्ण योगदान देने लगे हैं। आने वाली पीढ़ी को शुद्ध वायु देने के लिए अधिकाधिक लोगों को पौधरोपण करने के लिए प्रेरित किया जाता है। अशोक युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि युवाओं द्वारा दान की गई रक्त की बूंदों से किसी का जीवन बचाया जा सके।
दिन में खाकी की जिम्मेदारी, रात को पौधों की सेवा
अशोक आर्य दिन में खाकी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं और रात को पौधों की सेवा करते हैं। अशोक बताते हैं कि दिन में दिल्ली पुलिस की नौकरी कर शाम को घर आते हैं। उसके बाद वह पौधों की सेवा में जुट जाते हैं। रात को टैंकर से सभी पौधों में पानी डालते हैं। जिससे पौधों को बचाया जा सके। वह कहते हैं पौधों को पानी देने से मिलने वाले सुकून के बारे में लफ्जों में बता पाना मुमकिन नहीं हैं।

सोनीपत। मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी बाधा भी आपका रास्ता रोक नहीं सकती। ऐसा ही कुछ कर रहे हैं दिल्ली पुलिस के सिपाही अशोक आर्य। हादसे में अपना एक पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने दिव्यांगता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और चार साल से पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे हैं। इनके प्रयास का ही परिणाम है कि सेक्टर-23 में चारों तरफ हरियाली नजर आने लगी है। अशोक आर्य के जज्बे से प्रभावित होकर अन्य लोग भी पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देने लगे हैं।

मूलरूप से गांव जागसी और फिलहाल सेक्टर-23 निवासी अशोक आर्य ने बताया कि उनकी शिक्षा सोनीपत से ही हुई है। वर्ष 2010 में उन्होंने दिल्ली पुलिस में नियुक्ति पाई थी। उनका जीवन भी आम लोगों की भांति सामान्य तरीके से ही चल रहा था। वर्ष 2017 में ड्यूटी से लौटते समय ट्रेन से गिर गए थे। इस हादसे में उन्हेें अपना दाहिना पैर गंवाना पड़ा था। हादसे ने उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन किया। पैर गंवाने का दुख था, साथ ही हमेशा यही सोचता था कि किसी पर निर्भर नहीं रहूंगा। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे अशोक ने कड़ा परिश्रम कर अपना हर काम खुद ही किया। शुरुआत में काफी परेशानियां आई लेकिन निरंतर प्रयास से हर काम आसान होता चला गया।

देवेंद्र सूरा से प्रेरित होकर लगाए पौधे

अशोक बताते हैं कि वर्ष 2018 में देवेंद्र सूरा की मुहिम से ऐसी प्रेरणा मिली कि पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का मन करने लगा। इसके लिए सेक्टर में ही पौधे लगाने शुरू किए। ड्यूटी के दौरान सप्ताह में एक दिन का अवकाश मिलता है। यह पूरा दिन पर्यावरण को मजबूती देने में व्यतीत करता हूं। अशोक बताते हैं कि वे अब तक सेक्टर-23 और आसपास के क्षेत्र में करीब 400 से अधिक पौधे लगा चुके हैं। ड्यूटी से आने के बाद इन पौधों में पानी देने, निराई-गुड़ाई करने व पशुओं से इनकी रक्षा करने के लिए ट्री गार्ड व झाड़ियां लगाने का काम करते हैं। अशोक बताते हैं कि इस कार्य से उनके मन को बेहद शांति मिलती है।

सेक्टर 23 नजर आने लगी हरियाल, बुजुर्ग भी हुए प्रेरित

अशोक ने बताया कि सेक्टर-23 को हरा भरा बनाने के लिए शुरू किया गया उनका प्रयास अब रंग लाने लगा है। सेक्टर में हर जगह हरियाली नजर आती है। यही नहीं सेक्टर में रहने वाले बुजुर्ग व युवा भी क्षेत्र को हरा-भरा बनाने मेें योगदान देने लगे हैं। पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देने व आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने के लिए शुरू की गई मुहिम मेें राजेंद्र गहलावत, विनोद कादियान, राहुल आदि पूर्ण योगदान देने लगे हैं। आने वाली पीढ़ी को शुद्ध वायु देने के लिए अधिकाधिक लोगों को पौधरोपण करने के लिए प्रेरित किया जाता है। अशोक युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि युवाओं द्वारा दान की गई रक्त की बूंदों से किसी का जीवन बचाया जा सके।

दिन में खाकी की जिम्मेदारी, रात को पौधों की सेवा

अशोक आर्य दिन में खाकी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं और रात को पौधों की सेवा करते हैं। अशोक बताते हैं कि दिन में दिल्ली पुलिस की नौकरी कर शाम को घर आते हैं। उसके बाद वह पौधों की सेवा में जुट जाते हैं। रात को टैंकर से सभी पौधों में पानी डालते हैं। जिससे पौधों को बचाया जा सके। वह कहते हैं पौधों को पानी देने से मिलने वाले सुकून के बारे में लफ्जों में बता पाना मुमकिन नहीं हैं।

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